हे मधुमास

हाइकु
१.
सूझता नहीं
देशबासी क्या करें
घुट के मरें !
२.
छोरा है खडÞा
छोरी ने सिटी मारी
लो गिर पडÞा !
३.
कितने अच्छे
सारे के सारे बच्चे !र्
दर्पण सच्चे !
४.
जाडÞा कुहासा
र्सर्दी लगी है खासा !
देशी नेता को !
५.
आज खुला है
दिनों बाद मौसम
विरोध सभा !
६.
कागा बोले रे
हाय, कर्ुर्सर्ीीोले रे !
भय घोले रे !
७.
नाइट क्लब
जीने का सहारा है
प्यारा-प्यारा है !
८.
देश बनेगा
लुट जाने के बाद
निर्धनतम !
९.
शोर ही शोर !
चारों ओर हैं चोर !!
ओर न छोर !
१०.
सुन्दर शान्त
नेपाल आज क्लान्त
पथिक भ्रान्त !
हे मधुमास-मुकुन्द आचार्य
हे मदोन्मत मधुमास !
देख लो मेरे देश की दर्ुदशा
करो शान्ति बरसात !
हे मदोन्मत मधुमास !माना तुम्हारे तरकस में
भरे हैं कामोत्तेजक वाण
किन्तु अभी श्रृंङ्गगार नहीं
शान्तरस से होगा कल्याण !
प्रेम पराग से आप्लावित कर दो
निकुञ्ज निकुञ्ज ! निवास निवास !!
हे मदोन्मत्त मधुमास… !

हाँ तुम तो मधुमास हो
मस्ती से करो मधुवृष्टि !
कलह कलुष सब बह जाए
हो नव नेपाल की सृष्टि !
सद्भाव और स्नेह रस से
आप्लावित हो धरती आकाश !
हे मदोन्मत्त मधुमास !

सभी सुखी हों, सभी स्वस्थ हों
सब का भला हो, सभी मस्त हों
देश की हर बगिया महके
हर डाल पर चिडिÞया चहके
मानवता के पथ से तनिक न कर्ेइ बहके !
नव वर्षकी बेला में तुम से बँधी है
सब की यह आश !
हे कुसुमाकर ! हे रितुराज !
हे मदोन्मत्त मधुमास !

loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz