होटल व्यवसाय संकट में, अरबों का निवेश खतरे में

चन्द्रप्रकाश श्रेष्ठ ने अपनी नेपाल राष्ट्र बैंक की नौकरी छोड़कर पर्यटन व्यवसाय को चुना था । फिलहाल लुम्बिनी के पर्यटन प्रवद्र्धन में अपना

chandra prakas shretha

चन्द्रप्रकाश श्रेष्ठ
अध्यक्ष, सिद्धार्थ होटल
ऐशोसियशन (सान)

योगदान दे रहे हैं । आपने भैरहवा में होटल नान्स एण्ड रिसोर्ट की स्थापना की है और बहुत जल्द उनकी बेलहिया नाका में पाँचतारा होटल बनाने की योजना है । सिद्धार्थ होटल एशोसियशन के आप अध्यक्ष भी हैं साथ ही मानव अधिकार परिषद्, लायन्स इण्टरनेशनल, सिद्धार्थ नागरिक समाज आदि संस्थाओं से भी आप आबद्ध हैं । भूकम्प और मधेश आन्दोलन के कारण नेपाल के पर्यटन व्यवसाय में पड़े असर और उसके समाधान के सम्बन्ध में सम्झना शर्मा की श्रेष्ठ के साथ बातचीत का सम्पादित अंश —

फिलहाल भैरहवा लुम्बिनी क्षेत्र में कितने होटल संचालन में हैं ?
इस क्षेत्र में अभी छोटा बड़ा होटल मिलाकर कम से कम १५० होटल संचालन हो रहे हैं । पिछले समय में लुम्बिनी के विकास और अन्तरराष्ट्रीय आकर्षण की वजह से नेपाल सरकार ने लुम्बिनी से सम्बन्धित कुछ योजनाओं को आगे बढाया था । इसकी वजह से पर्यटन क्षेत्र में व्यवसायियों का आकर्षण बढ़ा और कई अच्छे होटलों का निर्माण हुआ । यहाँ जो भी होटल हैं उनमें करीब ४अरब तक का निवेश लगा हुआ है और होटलों की संख्या और भी बढने वाली है जिसके कारण निवेश में और भी वृद्धि होने की अत्यन्त संभावना है ।
पर्यटन के आगमन के अनुपात में होटलों की क्षमता कैसी है ?
यहाँ के होटलों में करीब ३हजार कमरे और ६हजार बेड हैं । यह पूरा पर्याप्त है यह तो कहना उचित नहीं होगा क्योंकि अन्य व्यवसायों की तरह इस व्यवसाय में भी प्रतिस्पद्र्धा स्वाभाविक है । पर्यटकों को अच्छी और स्तरीय सेवा दी जाय इसके लिए निरन्तर होटलों का निर्माण हो ही रहा है ।
भूकम्प और उसके बाद मधेश आन्दोलन के कारण नेपाल के पर्यटन व्यवसाय में क्या असर पड़ा है ?
गत बैशाख का भूकम्प नेपाल के इतिहास में एक काला दिन साबित हुआ है । जिसका सबसे अधिक नुकसान अगर कहीं हुआ है तो वह है पर्यटन व्यवसाय । यहाँ के पर्यटकीय स्थल को असुरक्षित समझते हुए पर्यटकों ने अपने आने का कार्यक्रम स्थगित किया अपने भिसा केन्सिल कराए । भूकम्प का असर लुम्बिनी में नहीं था बावजूद इसके यहाँ भी पर्यटकों की संख्या न्यून हो गई । इस बात को समझाने के लिए पयंटन व्यवसायियों की टोली बैंकाक भी गई थी । कुछ उम्मीद जगी थी किन्तु अभी मधेश आन्दोलन की वजह से पर्यटन व्यवसाय में लगे अरबों का निवेश खतरा में है । जिसकी वजह से वर्तमान में दैनिक करोड़ों का घाटा हो रहा है । इसका दीर्घकालीन असर को तो सोचकर ही डर लगता है । दुर्भाग्य तो यह है कि सरकार इस ओर सचेत नहीं हो रही है ।
तीन महीना हो चुका तराई ठप्प है । लुम्बिनी आनेवाले पर्यटकों की संख्या न्यून है । इसकी मार लगभग यहाँ के सभी होटल व्यवसायी झेल रहे हैं । होटल व्यवसाय के क्षेत्र में दैनिक १करोड़ ५० लाख रुपया का घाटा हो रहा है । व्यवसायी बैंकों का ऋृण देने की अवस्था में नहीं हैं । मजदूर की समस्या उतनी ही विकराल हो रही है । तराई असुरक्षित है यह कहकर भारत लाभ उठा रहा है । अभी श्रीलंकनों के आने का मुख्य समय है । यह समय उनकी छुट्टी का होता है जिसमें वो नेपाल भ्रमण के लिए आते हैं । पिछले वर्ष अगस्त महीने में करीब बारह हजार श्रीलंकन नेपाल आए थे । इस वर्ष तराई बन्द होने के कारण राष्ट्र को बहुत नुकसा नझेलना पड़ा है ।
तत्काल पर्यटन व्यवसायी के निवेश को सुरक्षित करने के लिए सरकार की तरफ से व्यवसायी क्या अपेक्षा कर रहे हैं ?
सर्वप्रथम तो तराई में हो रहे असंतुष्टि के कारणें को दूर कर उसे मिलाकर ले जाना पड़ा । दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि प्रायः सभी व्यवसायियों ने बैंक से ऋण लेकर व्यवसाय किया है और अभी ब्याज देने की उनकी अवस्था बिल्कुल नहीं है ऐसे में उनकी सरकार से यही अपेक्षा है कि उनका ब्याज माफ किया जाय । और यही माँग वो सरकार से कर रहे हैं ।
पर्यटन विकास का कोई और भी सम्भावित आधार है ?
अवश्य है । नेपाल आनेवाले पर्यटकों को जितना अधिक समय नेपाल में रोका जाएगा उस क्षेत्र का उतना अधिक विकास होगा । पर्यटक नेपाल आते हैं जो वस्तु उन्हें नया लगता है उसे खरीदते हैं । दैनिक प्रयोग की चीजें खरीदते हैं । यहाँ की संस्कृति में घुलना मिलना चाहते हैं और मनोरंजन करना चाहते हैं । इन सभी बातों में वो खर्च करते है जिसका सीधा लाभ नेपालियों को होता है । अगर उन्हें खर्च करने की जगह नहीं मिलेगी तो वो कहाँ खर्च करेंगे और ऐसे में पर्यटन का विकास कैसे सम्भव होगा ? पर्यटक कैसिनो जाना चाहते हैं परन्तु हमारी सरकार उसे बन्द करने पर लगी हुई है । वो नाइट लाइफ में मनोरंजन खोजते हैं और सरकार शाम से ही होटल बन्द कराना चाहती है । ऐसे में पर्यटन विकास किस तरह सम्भव है ? सरकार को बुद्ध सर्किट की अवधारणा को आन्तरिक रुप में भी प्रयोग में लाना पड़ेगा ।

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