ग़रीब कैसे हो गए हमारे प्रधानमंत्री प्रचण्ड, जरुर जनता की खून में मिलावट आ गई है

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बिम्मी शर्मा, वीरगंज, २० दिसिम्बर |  हमारे प्रधान मंत्री तो बहुत ही गरीब हैं भई । दो दो बार प्रधान मंत्री बनने के बाद भी कामरेड प्रचंड के पास सिर्फ एक कठ्ठा जमिन और तीन तोला सोना है । है न कितनी शर्म की बात ? देश गरीब है तो क्या हुआ ? प्रधान मंत्री को तो धनी होना चाहिए । क्या प्रचंड को प्रधानमंत्री इसी लिए बनाया गया है कि वह गरीब हो जाएं ? क्या सिरहा जिले के नागरिकों नें उन्हे वोट दे कर गरीब होने के लिए ही जिताया था ? उन्हे तो जनता का खून चूस कर भी सम्पति कमाना चाहिए ।

हमारे देश ने अति कम विकसित राष्ट्र की सूची में बनाया है तो क्या हुआ ? यहां के नेता और मंत्री धनी है इसी लिए तो यह देश गरीब है । यदि प्रधान मंत्री प्रचण्ड गरीब हैं तो इसका मतलब देश को धनी और विकसित होना चाहिए । सो तो नहीं हुआ पर बैठे बिठाए सारी दुनिया घूम कर और व्यापार कर के भी हमारे प्रधान मंत्री गरीब हो गए ? यह तो चुल्लू भर पानी में डूब मरने की बात है ।

थोडा तो शर्म करें कामरेड प्रचंड । यह तो देश की जनता का इज्जत का फालूदा बना दिया । क्या हम जनता टैक्स नहीं पे करते ? थोड़ी बहुत सेवा, सुविधा जो आपकी सरकार या यह राज्य जो हमको मुहैया कराती है उसके बदले में हम लोग भरपूर टैक्स देते ही हैं । तो आप गरीब कैसे हो गए हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री प्रचण्ड ? जरुर जनता की खून में मिलावट आ गई है ।

यदि जनता अपना राजस्व यानी अपने खून, पसीना और आंसूओं से भीगी हुई गाढी कमाई को राज्य को अपना परम कर्तव्य समझ कर देने में कजुंसी कर रहे हैं शायद ? इसी लिए तो आप इतने गरीब हो गए । नहीं तो १० साल तक जन युद्ध के बहाने जो धन युद्ध आपने किया था उस से तो आप माला माल हो गए थे । फिर आप इतने गरीब कैसे हो गए कि आप के पास सिर्फ एक कठ्ठा खेत और तीन तोला सोना ही बांकी रह गया । आप तो प्रचंड है अपने रुतबे के हिसाब से तो बोलिए न ?

बोल आप रहे हैं पर शर्म हम सब को आ रही है । हम उस देश के नागरिक हैं जो खुद भूखे और फटेहाल रह कर जमीन में चटाई में सो कर भी आप को डेढ लाख के पलंग में सुलाते थे । सब भूल गए क्या ? अपने पहले प्रधान मंत्रित्व काल में जो ईंसान डेढ लाख रुपए के पलंग मे सोता था दूसरे प्रधान मंत्रित्व काल में इतना गरीब हो गया कि उसके पास सिर्फ एक कठ्ठा जमीन और तीन तोला सोना ही है संपति के नाम पर ? या बेटा, बेटी और बहूओं को बांटते, बांटते सब खत्म हो गया ?

मंत्री मंडल का मुखिया बन कर राज्य कमान अपने हाथ में लेने का अर्थ ही पांचो उंगली घी में और सर कड़ाही में । पर यह कैसी अबिश्वसनीय बात है कि इस राज्य का मुखिया जिसको देश के सर्वोच्च सत्ता पर विराजमान किया गया है वह इतना गरीब कैसे हो गया ? जनता तो अपना पेट काट के भी आप और आपके मंत्री मंडल को खिला रही है । आप सबका दवा, दारु का खर्चा भी उठा रही हैं । आपके बीमार होने पर खुद बीमार होते हुए भी विदेशों मे इलाज के लिए भेजना अपना परम धरम समझती है । कमरेड प्रचंड आप को हर महीने लाख रुपए से ज्यादा वेतन मिलता है । उस वेतन को आप किसी अनाथ आश्रम दान करते हैं क्या, जो इतने गरीब हो गए ? गरीब आप हैं पर लज्जा मुझे आ रही है । जब देश का प्रधान मंत्री ही इतना गरीब है तो बांकी जनता की हालत तो ईथियोपिया और सोमालिया जैसी ही हो गयी है । यह तो राष्ट्रीय लज्जा और शोक का विषय है ।

हम तो आप को धनी बनाने के लिए सिर्फ एक बार खाना खाते है । आप को अच्छी नींद आए इसके लिए खुद जमीन पर दुबक कर सोते हैं । खुद रोग से ग्रसित हो कर घिसट, घिसट कर मर जाएंगे पर आपका इलाज बढ़िया कराने के लिए अपने शरीर का रहा सहा खून भी निचोड़ कर आप के सरकार को कर के रुप में देते हैं । इतने पर भी आप गरीब कैसे हो गए हैं ? यह बात कुछ हजम नहीं हो रही है कमरेड प्रचण्ड । कहीं पत्नी के नाम सब कुछ कर के अपना बैंक बैलेन्स शून्य तो नहीं दिखा रहे ?

कहीं आपने १० वर्ष के धन युद्ध में कमाए हुए धन को किसी “सुमार्ग” में तो नहीं लगा दिया ? आखिर में आप इतने बडे और प्रसिद्ध नेता है धर्म, कर्म करने या पूण्य कमाने का मन तो करता ही होगा ? इसी लिए तो भाटभटेनी सुपर मार्केट में लगानी करते हैं ताकि हम जैसे नागरिकों का अच्छी क्वालिटी के सामान में पहुंच बढ सके और हम ठगाते हुए भी आप का ही भला सोचते हैं । आप “कूमार्ग” से आए हुए काले धन को “सुमार्ग” में बद्लना बखुबी जानते हैं । आप एनसेल जैसी जनता को लूट कर फलने, फूलने वाली संस्था को गोद में ले कर पुचकारते हैं । लोकमान जैसे भ्रष्ट को अपना दाहिने हाथ बना लेते हैं । फिर भी आप इतने गरीब प्रधान मंत्री कैसे हो गए ? धिक्कार है आप को ।

अगर आप ने कोई अनियमितता या गलत काम नहीं किया है तो अख्तियार के प्रमुख लोकमान कार्की को इतना दुलार क्यों रहे थे ? आप इतने ईमानदार और गरीब हैं तो फिर हर भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी को इतना संरक्षण क्यों देते हैं ? जिस तरह ईमानदारी और गरीबी का चोली दामन का साथ है उसी तरह बेईमानी, भ्रष्टाचारी और धनिकों का भी चोली दामन का साथ रहता हैं । आप खुद को गरीब प्रधान मंत्री बता कर खुद ही ईमानदारी का तमगा पहनने के लिए बेताब हैं । लेकिन आप का डेढ़ लाख का पलंग और हाथ में बंधी हुई १४ लाख की रोलेक्स घड़ी आप का पोल खोल रही है । जिसके पास सिर्फ एक कठ्ठा जमिन और तीन तोला सोना होता है वह इतनी महंगी चीज नहीं पहनता है कमरेड प्रचंड । हां आप गरीब नहीं पर दरिद्र सोच के मालिक जरुर हैं । ऐसा दरिद्र प्रधान मंत्री नहीं चाहिए हमें । गरीबी बुरी बात नहीं है पर द्ररिदता जरुर बुरी चीज है । (व्यग्ंय…….)

 

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