१० वर्षमें १५ प्रतिशत जनसंख्या वृद्धि

कविता कर्ण् वीनतम आँकडे के अनुसार नेपाल की जनसंख्या २ करोडÞ ६४ लाख ९४ हजार ५ सौ ४ पहुँची है। १० साल पहले की तुलना में इस में १५ प्रतिशत की बढÞोत्तरी हर्ुइ है। वि.सं. ०५८ की जनगणना अनुसार नेपाल की जनसंख्या २ करोड ३१ लाख ५१ हजार ४ सौ २३ थी। केन्द्रीय तथ्यांक विभाग द्वारा र्सार्वजनिक की गई जनगणना ०६८ के अन्तिम नतिजा अनुसार नेपाल में महिला की संख्या पुरुष से तीन प्रतिशत ज्यादा है। गत वर्षर्सार्वजनिक जनगणना के प्रारम्भिक अनुमानित संख्या से वास्तविक जनसंख्या १ लाख २६ हजार तीन सौ ५ कम दिखाई देती है।
तथ्यांक अनुसार हाल की जनसंख्या में पुरुष की संख्या १ करोड २८ लाख ४९ हजार ४१ और महिला की संख्या १ करोड ३६ लाख ४५ हजार चार सौ ६३ है। जिस के अनुसार कूल जनसंख्या में महिला ५१.५० प्रतिशत और पुरुष ४८.५० प्रतिशत है। विभाग के अनुसार इस में विदेश में बसनेवाले १९ लाख २१ हजार चार सौ ९४ लोगों को नहीं समेटा गया है।
दश वर्षकी अवधि में विदेश जानेवालों की संख्या में ११ लाख ५९ हजार ३ सौ १३ वृद्धि हर्ुइ है।०५८ साल में विदेश में रहनेवालों की संख्या ७ लाख ६२ हजार १ सौ ८१ थी। दश वर्षकी अवधि में सब से ज्यादा तर्राई में २१ लाख ६ हजार २ सौ ५३ और सब से कम हिमाली क्षेत्र में ९३ हजार ९ सौ ३३ संख्या बढी है। पहाड में वृद्धि हर्ुइ संख्या ११ लाख ४२ हजार ८ सौ ९६ है। तथ्यांक अनुसार अभी तर्राई के जिले में कूल जनसंख्या का ५०.२७ प्रतिशत -१,३३,१८,७०५), पहाड में ४३.०१ प्रतिशत -१,१३,९४,००७) और हिमाली क्षेत्र में ६.७३ प्रतिशत -१७,८१,७९२) जनसंख्या है।
तथ्यांक के अनुसार दश वर्षमें सरदर वाषिर्क जनसंख्या वृद्धिदर २.२५ से घट कर १.३५ हो गया है। जनघनत्व १ सौ ५७ व्यक्ति प्रतिवर्गकिलोमिटर से बढ कर १ सौ ८० पहुँचा है। जनघनत्व सब से ज्यादा काठमांडू जिले में ४ हजार ४ सौ १६ व्यक्ति प्रतिवर्गकिलोमिटर और सब से कम मनाङ जिला में ३ व्यक्ति प्रतिवर्गकिलोमिटर है।
इस बार की जनगणना के अनुसार सब से ज्यादा जनसंख्या काठमांडू जिले में १७ लाख ४४ हजार २ सौ ४० पहुँची है। इसी तरह सब से कम जनसंख्या मनाङ जिला में ६ हजार ५ सौ ३८ है। जनगणना ने काठमांडू के बाद मोरङ, रुपन्देही, झापा और कैलाली जिलों को क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवें स्थान में दिखाया है। उसी तरह सबसे कम जनसंख्या वाले जिलों में मनाङ के बाद मुस्ताङ, डोल्पा, रसुवा और हुम्ला दिखाई पडÞते है।
१३ प्रतिशत जनता किराए के घर में
तथ्यांक अनुसार नेपाल में कूल ५४ लाख २३ हजार २९७ परिवार बसते है। कूल परिवार में से ८५.२६ प्रतिशत परिवार अपने ही घर में रहते है और १२.८१ प्रतिशत परिवार किराए के घर में रहते हैं। शहरी क्षेत्र में ४०.२२ प्रतिशत परिवार किराए के मकान में रहते हैं। उसी तरह प्रति परिवार औसत ४.८८ सदस्य संख्या है। परिवार का आकार रौतहट जिला में सब से ज्यादा ६.४४ और कास्की में सब से कम ३.९२ दिखाई पडÞता है।
२३ जिले में जनसंख्या घटी
०५८ की तुलना में तथ्यांक ने २३ जिले में जनसंख्या की कमी दिखाई है। ऐसे जिलों में ताप्लेजुङ, पाँचथर, धनकुटा, तेह्रथुम, भोजपुर, सोलुखुम्बु, ओखलढुंगा, खोटाङ, रामेछाप, दोलखा, सिन्धुपाल्चोक, नुवाकोट, रसुवा, धादिङ, गोरखा, लमजुङ, स्याङ्जा, मनाङ, मुस्ताङ, म्याग्दी, पर्वत, गुल्मी और अर्घर्ााँची हैं।
शौचालय से ज्यादा मोबाइल
जनगणना के नतीजे में शौचालय की तुलना में मोबाइल की संख्या ज्यादा दिखाई दिया है। ६१.३८ प्रतिशत परिवार के साथ शौचालय है लेकिन मोबाइल रखनेवाले परिवार की संख्या उससे ज्यादा ६४.६३ प्रतिशत है। जनगणना ने कूल परिवार संख्या में से शौचालय वाले परिवार की तुलना में मोबाइलधारी परिवार की संख्या ३.२५ प्रतिशत ज्यादा दिखाई है।
जनगणना के अनुसार शहरी क्षेत्र में शौचालय सुविधा विहीन परिवार ९.०९ प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्र में शौचालय विहीन परिवार की संख्या ४५.११ प्रतिशत है। शहरी क्षेत्र में मोबाइलधारी ८४.०७ प्रतिशत है तो ग्रामीण क्षेत्र में ५९.९८ प्रतिशत परिवार मोबाइलधारी हुए हैं।
नेपाली भाषी की संख्या घटी
जनगणना के नतीजे ने नेपाल में प्रचलित भाषाओं में दश वर्षकी तुलना में नेपाली बोलनेवालों की संख्या में कमी दिखाई है। यह कमी ४ प्रतिशत की है। तथ्यांक अनुसार देशभर की जनसंख्या में ४४.६ प्रतिशत ने मातृभाषा के रूप में नेपाली भाषाको स्वीकार किया है।
जनगणना अनुसार देश में १२३ मातृभाषी रहते है। नेपाली के बाद मैथिली -११.७ प्रतिशत), भोजपुरी -६.० प्रतिशत), थारु -५.८ प्रतिशत), तामाङ -५.१ प्रतिशत) और नेवार -३.२ प्रतिशत) है। इस बार तर्राई में मैथिली और भोजपुरी बहुल क्षेत्रों में हिन्दी भाषा को मातृभाषा के रुप में लिखाने का अभियान चलने पर भी हिन्दी को मातृभाषा माननेवालों की संख्या शर्ीष्ा १० स्थान में भी नहीं आया। मगर वहीं उर्दू को मातृभाषा बतानेवालों की संख्या २.६ प्रतिशत -शर्ीष्ा १०स्थान) में है।
इसीतरह जनगणना ने देशभर में कूल १२५ जातजाति और १२३ मातृभाषा दिखाया है। देश के प्रमुख १० जातिओं में सब से  ज्यादा क्षेत्री की संख्या है। उनकी संख्या लगभग १ प्रतिशत से बढÞकर १६.६ प्रतिशत पहुँचा है। पहाडी ब्राहृमण की संख्या घटी है।  फिलहाल मगर, थारू, तामाङ, नेवार और लोहार क्रमशः ७.१, ६.६ और ५.८ प्रतिशत -तेस्रो, चौथो और पाँचवें) प्रमुख जातजाति के स्थान में है। उसीतरह मुसलमान ४.४ प्रतिशत, यादव ४ प्रतिशत और र्राई २.३ प्रतिशत है। जनगणना के अनुसार सब से कम जनसंख्या कुसुण्डा जाति के -२७३) है।
८१ प्रतिशत हिन्दू
जनगणना में हिन्दू धर्म मानने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। हिन्दूओं की संख्या १० वर्षपहले की तुलना में बढी है। ०५८ में हिन्दू ८०.८ प्रतिशत थे तो इस बार जनगणना में ८१.३ प्रतिशत है। हिन्दू के बाद बौद्ध धर्मावलम्बी की संख्या है। कूल जनसंख्या में ९ प्रतिशत बौद्ध धर्मावलम्बी है। उसके बाद क्रमशः इस्लाम -४.४), किरात -३), क्रिस्चियन -१.४) और प्रकृति धर्म माननेवालों की संख्या ०.४ प्रतिशत है।

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