१५०वीं महामना मालवीय जन्मजयन्ती

रमेश झा:काठमांडू। महामना अर्थात् जिस व्यक्ति का मन महान है, वैसा महान मनवाले महापुरुष हैं- मदनमोहन मालवीय। ऐसे महापुरुष की एक सौ पचासवीं जन्म जयन्ती समारोह भव्यता के साथ विश्वभर में मनाए जा रहे है।
इसी क्रम में महामना मदन मोहन मालवीय मिशन काठमांडू द्वारा महामना मालवीय जी की १५०वीं जन्मजयन्ती समारोह १ दिसम्बर २०१२ के दिन आर्मी आँफिर्सस क्लब में भव्यता के साथ मनाया गया। इसकी अध्यक्षता महामहिम राष्ट्रपति रामवरण यादव ने किया। इस समारोह की शोभा बढÞाने हेतु भारत से विएचयू के कुलाधिपति डा. कर्ण्र्ाासंह, डा. भीष्मनारायण सिंह, पर्ूव राज्यपाल भी पधारे थे। मंच पर इनके साथ मालवीय मिशन नेपाल के प्रमुख संरक्षक लोकेन्द्रबहादुर चन्द, भारतीय राजदूत जयन्त प्रसाद, पन्नालाल जयसवाल, योगाचार्य गोरखनाथ सरस्वती आचार्य, श्री स्वामी धु्रव आसीन थे। र्
र्सवप्रथम नेपाल और भारत का राष्ट्रगीत गाया गया, फिर विएचयू के कुल गीत ‘मधुर मनोहक अतीव सुन्दर में र्सवाविद्या की राजधानी, ये तीनों लोगों से न्यारी काशी’ गाया गया। श्रोता गण मनमुग्ध हो आनन्द को प्राप्त किया।
उपस्थित श्रोताओं को स्वागत करते हुए पन्नालाल जयसवाल ने महामनाजी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डÞालते हुए कहा कि मालवीय जी ने अत्यन्त निर्धन परिवार में जन्म लिया था। उनके परिवार का भरण-पोषण सत्यनारायण भगवान की पूजापाठ से जो कुछ मिलता था, उसी से होता था। पर वे कर्मवीर थे। इसीलिए तो र्सवजनहिताय शिक्षा के लिए वीएचयू जैसे महान संस्था को स्थापित करने में सफल हुए। नेपाल में भारत के राजदूत जयन्त प्रसाद ने कहा कि मालवीय जी स्वतन्त्रता सेनानी थे। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतन्त्रता आन्दोलन में बढÞचढÞकर भाग लिया था। नेपाल-भारत की जनता को शिक्षा प्रदान करने हेतु उन्होंने बनारस हिन्दू युनिभर्सिटी की स्थापना करने का प्रण किया और भीक्षा मांगकर उक्त महान संस्था को स्थापित किया। इस पवित्र संस्था के स्थापन करने के लिए काशी नरेश प्रभुनारायण सिंह ने ३० एकडÞ जमीन प्रदान की थी। वसन्त पञ्चमी के दिन इस संस्था की नींब पडÞी। मालवीय जी द्वारा स्थापित वीएचयू ने नेपाल-भारत में कई शासन प्रमुख देने के साथ-साथ शासन प्रशासन चलाने वाले व्यक्तित्व को उजागर करनेवाले प्रशासक दिए। अन्त में जयन्त प्रसाद ने मालवीय जी के महान व्यक्तित्व को उजागर करने के लिए मैथिली शरण गुप्तरचित कविता पाठ किया-
भारत को अभिमान तुम्हारा, तुम भारत के अभिमानी
पूज्य पुरोहित थे हम सबके, रहे सदैव समाधानी
तुम्हें कुशल याचक कहते हैं, किन्तु कौन तुम सा दानी
अक्षय शिक्षा सत्र तुम्हारा हे ब्राह्मण ब्रह्मज्ञानी
स्वयं मदन मोहन की तुम में तन्मयता है समा गयी।
कल्याणी वाणी जन जन के हित में धुनी रमा गयी।
महामना मालवीय मिशन के प्रमुख संरक्षक पर्ूवप्रधानमन्त्री लोकेन्द्रबहादुर चन्द ने मालवीय जी के द्वारा स्थापित कार्य के आधार पर उन्हें कालजयी व्यक्तित्व की संज्ञा से अभिहित किया और कहा कि उन्होंने पर्ूर्वीय संस्कृति के रक्षार्थ वीएचयू की स्थापना की। महामना मालवीय मिशन काठमांडू नेपाल के संरक्षक भीष्मनारायण सिंह ने कहा- आज बडेÞ हर्षकी बात है कि मालवीय जी के जीवन मूल्यों का मेरे जीवन में एक महत्वपर्ूण्ा स्थान है। उनका मानना था कि ज्ञान-विज्ञान का विकास भारतीय शिक्षा के आधार पर होना चाहिए। नेपाल-भारत का सम्बन्ध जनतान्त्रिक सम्बन्ध है। १९१र्६र् इ. में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना हर्ुइ। तब से आजतक नेपाल-भारत की जनता लाभान्वित हो रही है।
मदन मोहन मालवीय जी की १५०वीं जन्मजयन्ती समारोह के प्रमुख अतिथि डा. कर्ण्र्ाासंह ने कहा कि मेरा यहाँ आना तीन कारणों से हुआ है। प्रथमतः वीएचयू के कुलाधिपति के नाते मैं नेपाल के राष्ट्रपति जी को मानार्थ उपाधि लेने के हेतु निमन्त्रित करने के लिए, द्वितीयतः मदन मोहन मिशन के उपाध्यक्ष के नाते, तृतीयतः नेपाल के दामाद होने के नाते यहाँ आया हूँ। डा. कर्ण्र्ाासंह ने कहा- यदि मदन मोहन मालवीय जी को याद करते है तो हम उनके नैतिक आदर्शों को अपनावें। मालवीय जी युवाओं को खूब प्रोत्साहित करते थे। वे कहते थे- उत्तिष्ठत ! जाग्रत ! प्राप्य बरान्निबोधत। क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया। दर्ुगं पथस्तत्कवयो वदन्ति।
इसी अवसर पर महामना मालवीयजी के जीवन से सम्बन्धित विषयवस्तुओं पर प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया ।

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