१५ साल की सीमा चौधरी ने सबको चकित करतेहुये नंगे पाँऊ दौड कर जीती कास्य पदक

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काठमांडू, २७ दिसम्बर ।  वैसे तो सीमा खूद को भी विश्वास नहीं किया था कि वह कास्य पदक जितने में सफल होगी । लेकिन हो गया चमत्कार ! रियो ओलम्पिक में राष्ट्रीय कीर्तिमान बनानेवाली सरस्वती भट्टराई और नेपाली सेना में कार्यरत कुशली खेलाडी सानुमाया कार्की भी १५ साल की सीमा चौधरी की क्षमता देखकर चकित हो गई । प्रतिस्पर्धा में सीमा ने नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के एक से एक विभागीय खेलाड़ी को पीछे छोड़ते हुए कास्य पदक जित लिया है । बात है, इटहरी में जारी सातवें बृहत राष्ट्रिय खेलकुद की । उक्त प्रतियोगिता अन्तर्गत एथलेटिक्स तरफ सीमा ने नंगे पैर दौड़ कर यह उपाधी हासिल की है ।

नंगे पैर दौड़ना सीमा का सौख नहीं है, बाध्यता है । उनकी परिवारिक अवस्था इतना कमजोर है कि वह पैर में जुता भी नहीं लगा पाती, एथलेटिक्स में प्रयोग में आनेवाले ‘स्पाइक’ खरीदना तो दूर की बात । सीमा ने कहा है– ‘मेरे पास स्पाइक खरिदने का पैसा नहीं है । मेरी पारिवारिक आर्थिक अवस्था ऐसा है कि मेरे पिता जुत्ता खरीद कर मुझे नहीं दे सकता ।’ टीकापुर के वीरेन्द्र विद्या मन्दिर में कक्षा ९ में अध्ययनरत सीमा के पिता मजदूरी करते हैं । लेकिन पैसा नहीं हुआ तो क्या हुआ, सीमाने कास्य जित कर राष्ट्रीय कीर्तिमान रखी है । नंगे पैर दौड़कर पदक जितनेवाली पहली खेलाड़ी का भी बनी है सीमा । उन्होंने ८ सय मिटर दूरी का दौड़ २ मिनट ३४ सेकेन्ड में पूरा किया है । सीमा की इस तरह का क्षमता देकर ओलम्पियन धाविका सरस्वती और सानुमाया ने उनको बधाई दिया है ।

पढाई में भी सीमा अब्बल रहती है । वह अपनी कक्षा में ‘फस्ट गर्ल’ है । पढाइ के साथ साथ खेलकुद में भी उन की दक्षता देखकर तीन महिना से स्कुल ने उन के लिए निःशुल्क होस्टेल और खाने के लिए व्यवस्था किया है ।

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