१९५० की संधि संसोधन नेपाल ही नही चाहता है : पूर्वजनरल अशोक मेहता

h-11विनय कुमार, काठमांडू,अगस्त १३ ।
नेपाल संघीय व्यवस्था लागु होने पर होनेवाले भावी संकट के प्रति नेपाल मामिला के भारतीय जानकारों ने सचेत कराया है । आज काठमाडौं मे आयोजित एक कार्यक्रम मे भारतीय पूर्व राजदुत के.बी राजन नें ‘संघीय व्यवस्था में सावधानीपूर्वक’ कदम आगे बढाने को कहा है । पूर्वा राजदुत राजन ने कहा है की प्रजातन्त्र और संघीयता दोनो को एकसाथ ‘म्याचुअर’ बनाना है । भारत वर्तमान समय में स्वायतता की पक्ष मे अपनी ध्यान केन्द्रीत कर रहा है, पूर्व राजदुत राजन नें ऐसा कहा की अब सर्वोच्च अदालत भी राज्य के पक्षों में अधिकार दे रहा है । भारत में पहले एकात्मक प्रकार का संघ था और बाद में ‘फेडरल’ होता चला गया । ‘ट्याक्स या कर’ लेने की शक्ति सिर्फ केन्द्र में थी लेकिन अब राज्य को मिल रहा है । उन्होने ऐसा कहा कि सैद्धान्तिक रुप से ‘इमरजेन्सी पावर’ लगा कर राज्य को विघटन कर सकने की क्षमता केन्द्र रखता था । लेकिन केन्द्र का राज्यप्रति के अधिपत्य अब कम हो रहा है । भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी आने के बाद राज्य को ‘गे्रजुएली विकास’ करना भारत का उद्देश्य रहा है पूर्व राजदुत राजन ने स्पष्ट कीया । भारत का इतिहास बहुत रक्तपातपूर्ण रहा है और इसी में बहुत कुछ सिखा भी है उन्होनें यह बात बतायी ।

इसीतरह सुरक्षा मामिला के भारतीय एक्सपर्ट पूर्व जनरल अशोक मेहता नें कहा की नेपाल भारत की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भाग है । भारत नेपाल में अवस्थित हिमालय को अपनी ‘टाउको’ समझता है, एक राजमुकुट की तरह समझता है ऐसा कहा । सन २००८ के बाद नेपाल में चीन की गतिविधि बहुत बढ चुकी है उन्होनें उल्लेख भी की । भारत में यह माना जा रहा है की चीन का प्रभाव कहीं तराई तक ना विस्तार हो जाय । इस घड़ी में नेपाल को ‘भारत या चीन’ दोनों मे से किस को प्राथमीकता में रखना है इसपर निर्णायक तौर पर खडाÞ होने के लिए मेहता ने इसारा भी कीया । इसीतरह स्थानीय विकास मन्त्री तथा नेपाली कांग्रेस के नेता प्रकाश मान सिंह नें संघीयता के विषय पर देश बिल्कुल नयां है कहा है । एक प्रश्न के जवाव में पूर्व जनरल अशोक मेहता नें कहा कि भारत १९५० की संधि संसोधन के लिए तैयार है | उन्होंने कहा की जब बस्तोला मंत्री थे तब  भारत ने स्पष्ट कह दिया था की आप क्या क्या संसोधन चाहते है उसका पूर्ण विवरण ढाचा तैयार करके लाइए | लेकिन मंत्री महोदय ने नही पेश किया | बाद में मंत्री बस्तोला से पुछेजाने पर कि क्यों नही संसोधन का ढांचा आया तो मंत्री महोदय का जवाव था कि हमने सभी राजनितिग दलों से माँगा है | लेकिन नेपाल के कोई भी दल ५० की संधि के सुधार का ढांचा पेश नही किया |

नेता सिंह नें भारत के संघीय प्रणाली से हमे बहुत कुछ सिखना बांकी है और हम इसपर काम कर रहें है बताया । उन्होने देश के बर्तमान राजनीतिक, आर्थिक के विषयपर भी प्रकास डाला था ।

प्रोग्राम ए आई डी आई ए द्वारा आयोजन किया गया था | ७ वा हिमालयाज फोरम के अन्तर्गत नेपाल एज ए फेडरल स्टेट एन्ड लेसन फ्रोम द इण्डिया विषय पर वक्ताओं ने अपना विचार रखा था \

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