३३ प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के साथ महिला सहभागिता में ब्रद्धि बढते जा रहा

हेमन्तराज काफ्ले

हेमन्तराज काफ्ले

हेमंत राज काफले,२९ ,नेपालगंज|  नापल्ग्न्ज स्थानीय निकायों में होनेवाली हरेक बिकास निर्माण के कामों में तथा समूह में महिला की सहभागिता पिछले कुछ दिनों से में बढता गया है । लेकिन महिला के लिए किटाण किया गया क्षेत्र में जितना चहिये उतना सहभागिता नही हो पा रही है । स्थानीय निकायों के बिकास के लियें वडा नागरिक मंच और नागरिक सचेतना केन्द्र स्थापना किया जाता है । साथ-साथ अन्य समूहों ने भी स्थानीय निकाय की बिकास में सहयोग करते आ रहा है । बिकास निर्माण के लियें योजना तर्जुमा से लेकर निर्णायक प्रक्रिया में महिलाए“ की सहभागिता बढ नही पा रहा है । स्थानीय निकायों की बिकास में महिलाए की सहभागिता बढाने के लिये बिभिन्न निकायों ने नेतृत्व मुखी कार्यक्रम समुदाय में सञ्चालन कर रहें है । पिहले की तुलना में थोडा धीरे धीरे महिलाए संघ तथा समूह में बैठने लगी है । लेकिन समस्याए कहा पे है उन लोगों की निर्णायक क्ष्ाँमता की बिकास नही हो पाई है इस लियें वो अवसरों से बन्चित हैं । महिला सदस्य अनिवार्य होना चाहिए समति में भी न होने की स्थिति है । इस से स्थानीय निकायों की बिकास सन्तुलित न होने की सम्बद्धों ने बताते है ।

३३ प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के साथ हरेक निकायों में महिला सहभागिता बढते जा रहा है । सन्तोष करने की स्थिति नही है तो भी क्रमिक रुप में महिलाए की सहभागिता बढ रहा है । लेकिन नेतृत्व में उन लोगों की पह“ुच उतना नही है । स्थाानीय निकायों की बिकास में महिलाए की सहभागिता बृद्धि करने के लियें बनाया गया निति नियम की कार्यान्वयन नही हो रही है । महिलाए को इस की महत्व के बारे में भी अच्छा से सम्झा नही पायें ऐसीे अवस्था है । इससे और समस्या बढा देती है । स्थानीय निकायों की बिकासों में महिला सहभागिता न बढने के कारणों से महिलाओं की अपनी भुमिका क्या मालूम नही है । जिस के कारण से महिला का नाम में आने वाली लक्षित वर्ग अन्तगरत की रकम में समेत उन लोगों की पह“ुच स्थापित नही हो पायी है । कुछ गाबिस कप् महिलाए मात्र अपनी नाम में आने वाली बिकास की लेखाजोखा दिखाई देती है । लेकिन अभी भी कुछ गाबिस की महिलाए“ को बिकास निर्माण और पारदर्शिता की बातों पर उतना इच्छा नही है दिखाई पडती है ।
महिलाए“ को वडा नागरिक मञ्च ,नागरिक सचेतना केन्द्र तथा उपभोक्ता समिति में रखा जाता है तो भी उन लोगों ने बिकास प्रक्रिया के बिषय पर पता ही नही होता है । कितना बजेट किस में खर्च हुआ है , वह समितियों में अपनी भूमिका क्या है उस के बारे में उन लोगों को नही समझ पा रही है । कुछ महिलाए“ पूर्ण सहभागिता दिखाती है तो सभी महिलाए“ की स्थानीय निकाय में पहु“च ही नही है । गाव“ बिकास समिति में आने वाली लक्षित वर्ग की बजेट बारे भी अधिका“श महिलाए“ तो अनबिज्ञ है । कुछ तो ऐसी महिलाए“ भी है उन लोगों को कोई भी मतलब नही है जो भी करें हम से कोई मतलबनही है । वैसी महिलाए को स्थानीय निकाय ने देने वाली सेवा सुबिधा और बिकास की सहभागिता के लियें सुझाव देना एकदम आश्वयक है । क्यों कि जिस के लियें आया है रकम उस ने उस के बिषय में समझ नही पाई है तो कल वह कैसे प्रभावकरिता होगी । शहर बाजार में रही एनजिओ में काम वाली माहिलाए“ तो केवल अपनी मात्र अधिकार समझती लेकिन उतना से कुछ नही होगा । जो राज्य से पह“ुचब से दूर है, उन को बिकास कया है किस को बिकास कहतथे है और सहभागिता की अर्थ क्या है कुछ पता ही नही है । वैसे ब्यक्तित्व सभी का पात्र होना चाहिए । अधिकार पाने वाले ही पायें और न पाने वाले हर समय दबकर रहने की परम्परा है उस की अन्त्य होना एकदम जरुरी है । क्यों कि आज की एक्काईसांै सताब्दी में पुरुष सरह महिलाए“ नही पहु“च पायी है । पहले की तुलना में ज्यादा हुआ है , लेकिन उतना मात्र प्रयाप्त नह िहै । गाव“ से लेकर शहर तक की सभी महिलाए“ ने स्थानीय निकाय कया है और स्थानीय निकाय ने देने वाला सेवा सुबिधाए“ के बारे में समझना जरुरी है । यह उन लोगों की अधिकार भी है । महिलाए“ भी स्वयंम यैसे बिषय पर होशियार होना चाहिए । और दुसरों ने कर देंगें वह सब से अब नही होगा अपना खूद सभी की बारे में सचेत होना जरुरी है एस बिषय पर सरोकारवाला निकायों की ध्यान जाना उतना ही जरुरी है ।

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