३५ वर्षों से कानून को ठेंगा दिखा रहे है, भ्रष्ट प्रधानाध्यापक:विनय दीक्षित

नेपालगंज। बाँके जिला के कालाफाँटा गा.बि.स. वार्ड नं.३ निवासी प्रधानाध्यापक पारस नाथ पाण्डे ने अपने जीवन की गैरकानूनी यात्रा को ३५वें वर्षमें प्रवेश कराया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि हाईस्कूल का नकली प्रमाण पत्र बनाकर पाण्डे ने लगातार कानून और नियमको पैरों तले रौंदा है।
नेपाल राष्ट्रिय प्राथमिक विद्यालय शंकरनगर कोटिया कालाफाँटा में कार्यरत पाण्डे पर विभिन्न सबूत प्रमाण सहित २०६७।१०।२० में स्थानीय मकबूल खाँ ने जिला प्रशासन कार्यालय बाँके सहित जिला शिक्षा कार्यालय, क्षेत्रीय शिक्षा निर्देशनालय सर्ुर्खेत, अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग सहित अनगिनत निकायों को कारवाही के लिए आवेदन दिया था। लेकिन जब मकबूल खाँ को सन्तोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने कारवाही प्रक्रिया को ढÞीली कर दी।
२०६७।१०।२० में मकबूल खाँ के द्वारा दिया गया आवेदन दर्ता नं.२०६९ में जिला प्रशासन कार्यालय बाँके में मौजुद है, लेकिन सहायक जिला अधिकारी द्वारा अख्तियार दुरुपयोग आयोग के लिए कहकर तोक आदेश देने के सिवा उसपर कोई कारवाई नहीं हर्ुइ।
पाण्डे की नौकरी अभी भी जारी है। और हाल ही में एक शिक्षक भर्ना में उन्होने लाखों का घोटाला भी किया है। इस घूसखोरी के चलते वे एक बार फिर चर्चा में आए हैं।
पाण्डे ने भारत श्रावस्ती जिला भिन्गा स्थित अलछेन्द्र इण्टर काँलेज से क्र.सं.१२४४१९ अनुक्रमाङ्क २६३७८५ से तृतीय श्रेणी में सन् १९६७ में हाईस्कूल परीक्षा पास की है, ऐसा उनके प्रमाणपत्र से दिखता है। लेकिन पाण्डेकी चाल तब पकडÞ में आई, जब भारत श्रावस्ती गोडधोई पोष्ट अमवा निवासी उमानाथ शर्मा के पुत्र बसुदेव प्रसाद शर्मा का अनुक्रमाङ्क समान पाया गया।
हालांकि पहले कम्प्युटर का जमाना नहीं था इसलिए पाण्डे अभी तक शिक्षा विभाग को सकल मार्कसीट नहीं दिखा सके है, क्योंकि पहले हाथों से लिखी हर्ुइ मार्कसीट ही विद्यार्थियोंको उपलब्ध कर्राई जाती थी। जिस में पाण्डे ने कागजपर अपना नाम लिखकर फोटोकापी करवाई और नेपाल की नौकरियों में हाथ अजमाया। लिहाजा पिछले ३५ वर्षों से गैर कानूनी ही सही, वे सेवारत हैं। साथ ही कुछ वर्षों में ही उन्हे अवकाश भी मिल जाएगा।
जहाँ एक तरफ सरकार आज के शिक्षित युवककों को रोजगार देने के लिए माथापच्ची कर रही है, वहीं इस तरह के नजाने कितने शिक्षक और सरकारी कर्मचारी नकली और अवैधानिक तवर पर सरकार और कानूनको अंगूठा दिखा रहे हैं।
इस विषय पर अभी तक कारवाई क्यों नहीं हो सकी – क्या कारवाही करने वाले सभी निकाय पाण्डे से मिले हुए है – या पाण्डे अपने बचाव के लिए किसीको मोटी रकम उपलब्ध करा रहे हैं – या पाण्डे जैसे लोगों से प्रशासन भी डÞर रहा है – यही सवाल जब हिमालिनी ने जिला शिक्षा कार्यालय बाँके के प्रशासकीय अधिकृत मनप्रसाद रेग्मीसे किया तो उन का जबाब था- उजूरी सम्बन्धी बात सच है, पाण्डे पर अख्तियार में भी उजूरी है। जिसका छानबीन हो रही है, अख्तियार दुरुपयोग खुद जाँच कर रहा है इसलिए समय लगरहा है, लेकिन सच बाहर आएगा।
लेकिन स्थानीय लोग इस जवाब से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है- शिक्षक भर्ना में लाखों की रकम घूस ली जाती है। उसमें निचले और उच्च तह के सभी को योग्यता और क्षमता के अनुसार अपना हिस्सा मिलजाता है।
अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग के अधिकारी सूरज श्रेष्ठ ने बताया- वाषिर्क २ हजार भारतीय मार्कसीट और र्सर्टर्ीीmकेट जाँच किया जा रहा है। भारतीय शिक्षा विभाग से नकली पुष्टि होने पर कारवाई की प्रक्रिया आगे बर्ढाई जाती है। साथ ही २०५९ साल के बाद के सभी विषय पर अख्तियार खुद कारवाई की सिफारिस करता है, और २०५९ से पहले पर भ्रष्टाचार निवारण ऐन २०१७ के अनुसार कारवाई होती है जिसमें जेल और जरिवाना दोनों की व्यवस्था है। पाण्डे के विषय पर जाँच अन्तिम में ही है, परिणाम जल्द सामने आ जाएगा।
श्रेष्ठ ने आगे बताया कि जाँच करने के लिए त्रिभुवन विश्वविद्यालय और माध्यमिक शिक्षा परिषद की संयुक्त टीम बनाई गई है, जो भारत जाकर खुद संदिग्ध प्रमाणपत्रों की छानबीन करती है।
शिक्षा क्षेत्रों में हो रहे भ्रष्टाचार और रिश्वत के सर्न्दर्भ में पत्रकार विनय त्रिपाठीका कहना है, पिछले दिनों भी नजाने कितने पाण्डे चर्चे में थे और आज भी हैं। अगर शिक्षा विभाग या निर्देशनालय इस तरह के अवैधानिक विषय को बढावा नहीं दे रहा है तो वह क्यों कारवाई आगे नहीं बढÞ रही है –
पत्रकार त्रिपाठी ने बताया कि बाँके जिलाका राप्तीपार क्षेत्र भौगोलिक रुप में विकट होने के कारण उस क्षेत्र के सभी विभाग इसका फायदा उठाते हैं। क्योंकि उन्हे पता है- इतनी जल्दी कोई कारवाही नहीं होनेवालीहै । अतः सरकारको ऐसे कर्मचारियों की जाँच कर अवैधानिक होने पर उनके द्वारा अर्जित की गई सम्पत्ति के साथ अन्य सम्पत्ति सीज कर उन्हे आजीवन कैद की ब्यवस्था ही कारगर सावित होगी।
कानूनी दायरा के सम्बन्ध में नेपालगंज मंे कार्यरत अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा ने हिमालिनी को बताया- किसी भी फर्जी कागज का प्रयोग कर यदि कोई कर्मचारी सेवारत है तो उसपर शिक्षा ऐन अर्न्तर्गत कडी कारवाई की जा सकती है। दोषी प्रमाणित होने पर उसे जेल सजाय के अतिरिक्त उसकी सम्पत्ति भी जफ्त की जा सकती है।

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