मधेश खून की होली के बाद क्या यह होली मना पाएगा ?
मधेशियों के खून की होली के साथ मोर्चा के नेताओं की दीवाली मनाने की तैयारी
मुरली मनोहर तिवारी
FB_IMG_1457889904314होली आ गई, सब लोग होली के रंग, हँसी, ख़ुशी, उल्लास में सराबोर दिख रहे है। मैं दुविधा में हूँ, क्या करूँ ? मधेश आंदोलन के क्रम में दिवाली, दशहरा, ईद सब बेरंग रहा। मधेश विरोधियो ने मधेश में ख़ून की होली पहले ही खेल लिया। क्या ये होली मनाने, नाचने गाने का सही समय है ?

अभी तक मेरे घर के छत पर काला झंडा लगा है। काला झंडा यानी दुःख, संघर्ष, मातम, इन सब के बीच उल्लास कैसे होगा ? फिर मन होता है, शहीद परिवार के बीच होली मनाउ, पर वहाँ भी क्या मुंह लेकर जाऊ ? क्या बताऊ बलिदान का उपलब्धि शून्य रहा। पहले मधेश को मधेशी सांसदों ने धोखा दिया। फिर मोर्चा ने आंदोलन के नाम पर खिलवाड़ किया। आंदोलन भर पहाड़ी दल के मधेशी साजिश करते रहे, गुमराह करते रहे। आंदोलन समाप्त होते ही अपने अपने कुनबे में सक्रिय हो गए।

मोर्चा फिर आंदोलन करने का सपना दिखा रहा है, जबकि हक़ीक़त यही है की बहुत जल्द, देउबा सरकार में शिरक़त करते दिखने वाले है। चित भी इनका पट भी इनका। जो लोग आंदोलन के क्रम में बिजय गच्छेदार को गद्दार कहकर पार्टी छोड़ने का घोषणा किए थे, सब दुम दबाए उसी पार्टी में काम कर रहे है। एक तरफ आंदोलन में शोहरत कमाया, दूसरे तरफ पार्टी में सौदेबाजी कर पद और पैसा बनाया। हर एक ने मधेश को अपने(अपने हिसाब से ठगा ही है, धोखा ही दिया है।

IMG_20160322_011915इन दिनों मोर्चा के कई दलों में पार्टी प्रवेश का सीज़न चल रहा है। मीडिया में इसे बड़ा( चढ़ा कर दिखाया जा रहा है, पर गांव(गांव में इनकी जितनी आलोचना हो रही है, मधेशी जनता ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है, मोर्चा के प्रति जितना क्षोभ और आक्रोश है, उसे नहीं दिखाया जा रहा है। पार्टी प्रवेश का समाचार तो आता है, पर जितने कार्यकर्त्ता नाराज होकर चले गए या निष्क्रिय हो गए उसका समाचार नही बनता। वैसे भी पार्टी प्रवेश करने में वैसे ही लोगो की तादाद दिख रही है, जिनकी जरूरत कांग्रेस को नही है, जिनका रस चूसा गया है। जिसे कांग्रेस अधिवेशन में जगह नहीं मिला। ऐसे लोग मधेश(प्रेम में नहीं, राजनितिक फ्रेम में टिके रहने के लिए आ रहे है।

हमलोग लगातार मोर्चा की कारस्तानियों को उजागर करते रहे। अब तो राजेन्द्र महतो ने ही मोर्चा का सारा कच्चा चिठ्ठा खोल दिया। महतो ने मोर्चा के नेता पर आंदोलन में बेईमानी का जो आरोप लगाया, उस पर कोई सफाई नही आना इन आरोपो को सही सिद्ध करता है। मोर्चा के दो नेताओ का दिल्ली भ्रमण हुआ, उसमें महतो का साथ नही जाना बहुत कुछ इशारा करता है।

मोर्चा के चार दल और बाद में शामिल तिन दल आगामी सरकार में अपने(अपने भागबण्डा के लिए कसरत कर रहे है। इनका दिल्ली भ्रमण और चीनी दूतावास को ज्ञापन देना आगामी सरकार में मलाईदार मंत्रालय पाने का हथकंडा है। इसकी पुष्टि इससे भी होती है, कि आंदोलन के समय जब चीन ने तेल का मदद किया, चीनी नाका से मॉल(सामान भेजने की कोशिश किया तब ज्ञापन ना देना और आंदोलन के बाद ज्ञापन देना दिल्ली दरबार को खुश करने का प्रयास है। राजेन्द्र महतो इन सब से खुद को अलग दिखाना चाहते है, क्योकि वे ख़ुद मंत्री नही बन सकते, इसलिए साधूवाद का खोल ओढ़े हुए है।

मोर्चा ने संबिधान में साइन करने वालों को मधेश प्रवेश निषेध किया है, उनका होलिका दहन भी करना है। योजना तो बढ़िया है, पर इसके साथ( साथ नक्कली इस्तीफा, दो नका खुला छोड़ने वालों, एकता नहीं करने वालों, तस्करी का कमिशन खाने वालों का पुतला दहन क्यों नही होना चाहिए रु शहीदों की मजारों का टेंडर कर सेल्फी खिंचाने वाले को कैसे छोड़ा जा सकता है ?

मधेश के चित्रगुप्त इनके बही( खाते का लेखा( जोखा खंगाल रहे है। जिन( जिन ने मधेश के साथ छल किया, उनमे से किसी को बक्शा नहीं जाएगा। मधेश को धोखा देने वालों से किसी प्रकार की हमदर्दी नही होगी। मधेश अजर( अमर है, इसकी बुनियादी ऐसे गद्दारो से कमजोर तो क्या हिलेगी तक नही। आंदोलन फिर होगा, पर पहले बहरूपियो को बेनक़ाब करना होगा। फिर होली और दीवाली भी मनेगी।
जय मधेश।।

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