30 मार्च 2018: आज गुड फ्राइडे, प्रायश्चित्त और प्रार्थना का दिन

 

इसाई धर्म के अनुसार, क्रिसमस के मौके पर ईसा मसीह के जन्म पर आनंद पर्व मनाने की सदियों से प्रथा चली आ रही है। मगर इसके बाद इस धर्म के सभी अनुयायी तपस्या, प्रायश्चित्त और उपवास में समय बिताते हैं। दरअसल ‘ऐश वेडनस्डे’ से शुरू होकर ‘गुड फ्राइडे’ तक ये दौर चलता है जिसे ‘लेंट’ भी कहा जाता है। इस साल गुड फाइडे 30 मार्च को है। इस दिन गिरिजाघरों में जिस सूली (क्रॉस) पर प्रभु यीशु को चढ़ाया गया था, उसके प्रतीकात्मक रूप को सभी भक्तों के लिए गिरजाघरों में रखा जाता है। जिसे सभी अनुयायी एक-एक कर आकर चूमते हैं.

कैसी प्रथा चली आ रही है

इसके बाद आज के दिन सभी प्रवचन, ध्यान और प्रार्थनाएं में समय व्यतीत करते हैं। दरअसल ऐसे श्रद्धालु प्रभु द्वारा तीन घंटे तक क्रॉस पर भोगी गई यातनाओं को याद करते हैं। इसाई मान्यताओं के अनुसार, कहीं-कहीं आज की रात कुछ लोगों द्वारा काले वस्त्र पहनकर ईसा मसीह की छवि लेकर मातम मनाते हुए जुलूस भी निकाले जाते हैं। वहीं कई लोग प्रतीकात्मक रूप से अंतिम संस्कार भी करते हैं। खास बात है कि गुड फ्राइडे का दिन प्रायश्चित्त और प्रार्थना के लिए है, इसलिए इस दिन गिरजाघरों में घंटियां नहीं बजाई जाती हैं।

सजावटी चीजें हटा ली जाती हैं 

इसके अलावा गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है। यह त्योहार पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाता है, जो ईस्टर संडे से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को आता है। खास बात है कि इस दौरान चर्च एवं अपने घरों से लोग सजावटी वस्तुएं हटा लेते हैं या फिर उन्हें कपडे़ से ढक दिया जाता है। इस पर्व की तैयारी प्रार्थना और उपवास के रूप में चालीस दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। आज के दिन ईसा मसीह के अंतिम शब्दों की खास व्याख्या की जाती हैं जो क्षमा, सहायता और त्याग का उपदेश देती हैं।

कैसे मनाते हैं ये खास दिन

इसाई मान्यताओं के अनुसार, आमतौर पर पवित्र बृहस्पतिवार की शाम के प्रभु भोज के बाद कोई उत्सव नहीं होता, जब तक कि ईस्टर की अवधि बीत न जाए। इसके साथ ही इस दौरान पूजा स्थल पूरी तरह से खाली रहता है। वहां क्रॉस, मोमबत्ती या वस्त्र कुछ भी नहीं रहता है। ऐसे प्रथा के अनुसार, जल का आशीर्वाद पाने के लिए पवित्र जल संस्कार के पात्र खाली किए जाते हैं। इसके अलावा प्रार्थना के दौरान बाइबल और अन्य धर्म ग्रंथों का पाठ, क्रॉस की पूजा और प्रभु भोज में शामिल होने की प्रथा चली आ रही है।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

avatar
  Subscribe  
Notify of
%d bloggers like this: