उड़ान भरने दो …
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गंगेश कुमार मिश्र

bird2
उड़ान भरने दो,
पर न काटो;
इन्हें उड़ने दो।
हक़ है इन्हें भी,
खुले आकाश में,
उड़ने का।
दामन, न समेटो;
दामन में, समेटो;
बन फूल खिलेंगे,
इन्हें,खिलने दो।
ज्ञान-दीप से,
दूर न हों,
कुछ ऐसा, जतन करो।
असीम ऊर्जा है, इनमें,
मत इसको तुम,
व्यर्थ करो।
दो ही तो हैं,
एक बेटा, एक बेटी;
अब बहुत हुआ,
न भेद करो।
पर न काटो,
इन्हें उड़ने दो।

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