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चुनाव : स्वीकार या बहिष्कार ?-नवीन मिश्रा

0 April 23, 2017

प्रधानमन्त्री प्रचंड सत्ता में रहते हुए ही चुनाव कराना चाहते हैं, जबकि इस कार्य में सबसे बड़ी बाधा राज्यों के पुनर्सीमांकन का है । यह कार्य किसी भी हा...

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पंचायत से लोकतंत्र तक का सफर कितना बदला नेपाल ? नवीन मिश्रा

0 February 18, 2017

संविधान तो बन गया है लेकिन अभी इसके सभी पक्षों का कार्यांवयन नहीं हो सका है । मधेशियों को राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक रूप में नेपाल की मूल धारा में न...

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प्रधानमन्त्री दहाल की भारत यात्रा- नहीं चली चतुराई : प्रो. नवीन मिश्रा

0 October 20, 2016

प्रो. नवीन मिश्रा, काठमांडू , २० अक्टूबर | नेपाल के प्रधानमन्त्री ओली जिस तरह भारत भ्रमण से पहले आनन–फानन में उच्चस्तरीय राजनीतिक संयन्त्र गठन कर मधेश...

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अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद

0 September 24, 2016

प्रो. नवीन मिश्रा राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने एक बड़ी चुनौती अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद की है । अलगाववादी तथा आतंकवादी संगठनों या व्यक्तियों के अध्ययन से, ...

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बड़े बे–आबरु होकर तेरे कूचे से हम निकले

0 August 22, 2016

प्रो. नवीन मिश्रा आखिरकार ओली सरकार को जाना ही पड़ा, लेकिन राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीयस्तर पर अपनी छिछालेदारी कराने के बाद । अब तक के प्रजातान्त्रिक न...

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पर्यावरण का उभरता संकट

July 27, 2016

प्रो. नवीन मिश्रा पर्यावरण के विषय में अन्तर्राष्ट्रीय जगत की चिन्ता द्वितीय महायुद्ध के बाद ही देखने को मिलती है । महायुद्ध के विध्वंस ने इस बात को र...

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ओली की चीन यात्रा मृगतृष्णा तो नहीं ?

April 26, 2016

प्रो. नवीन मिश्रा:नेपाली प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने अपनी चीन यात्रा के दौरान चीनी प्रधानमन्त्री प्रधानमन्त्री खछयाङ के साथ बेजिंग में दस सहमति तथ...

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ओली की भारत यात्रा

March 16, 2016

मधेशी आन्दोलन के समय भारत को दुश्मन बताने वाले ओली ने भारत में एक बार भी अघोषित नाकाबन्दी की चर्चा नहीं की और सज्जन पुरुष बने रहे हैं । भ्रमण के पहले ...

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नेपाल–भारत बनते–बिगड़ते रिश्ते

February 9, 2016

प्रो. नवीन मिश्रा :साल २०१४ में प्रधानमन्त्री पद की शपथ लेने के साथ ही नरेन्द्र मोदी ने भारत की विदेश नीति, खासकर दक्षिण एशियाई देशों के साथ भारत के र...

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गणतन्त्र के गुलाम

January 17, 2016

प्रो. नवीन मिश्रा:इतिहास साक्षी है कि राणा शासन काल में मधेशियों को अपने ही देश की राजधानी काठमांडू जाने के लिए पासपोर्ट लेना पड़ता था । सदियों से त्र...

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प्रस्तावित संविधान अभिशाप या वरदान

0 August 20, 2015

आनन फानन में प्रस्तावित संविधान का मसौदा बहुमत के आधार पर पास तो कर दिया गया, लेकिन क्या यह संविधान जनमुखी है ? क्या इस संविधान में मधेशी, दलित, जनजात...

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परमादेश की अवमानना : प्रो. नवीन मिश्रा

0 July 16, 2015

ऐसा नहीं है कि सबों ने न्यायालय के निर्णय की आलोचना की है । बहुत सारे प्रवुद्ध व्यक्तियों ने जिस में अमरेश सिंह, विमलेन्द्र निधि, रामसरोज यादव, मोहन व...