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कुसंग से होता है व्यक्ति का नाश

0 January 17, 2017

भगवत गीता के इस दृष्टान्त से यह शिक्षा मिलती है कि श्रेष्ठ व्यक्ति भी कुसंगत से पाकर नष्ट हो जाता है । गीता में भगवान् कहते हैं– ‘अपने द्वारा अपना संस...

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मेरा जन्म क्यों

0 December 18, 2016

रवीन्द्र झा ‘शंकर’ मनुष्य अपनी ओर नहीं देखता कि मेरा जन्म क्यों हुआ है, मुझे क्या करना चाहिये और मैं क्या कर रहा हूँ ? जब तक वह उसपर ध्यान नहीं देता, ...

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धन और मान में सच्चा सुख नहीं

0 November 25, 2016

रवीन्द्र झा उन्नसठवीं सदी के अन्तिम चरण की बात है, कराची के एक मध्यमवर्गीय सिन्धी परिवार में हरनाम नाम का एक बालक था । माँ बचपन में ही मर चुकी थी । बा...

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रे अभागे मन

0 October 23, 2016

रवीन्द्र झा ‘शंकर’ प्रभोः मेरे लिए ‘मैं’ जितना प्यारा हूँ, उससे कहीं अधिक तुम्हारे लिए ‘मैं’ प्यारा हूँ । फिर मैं अपने लिए इतनी चिन्ता क्यों करता हूँ ...