Tue. Sep 18th, 2018

बीरगंज भंसार का अवसान ! – मुरलीमनोहर तिबारी

मुरलीमनोहर तिबारी (सीपु), हिमालिनी, अंक अगस्त ,२०१८ | २००७ साल के बाद से मधेश में बाजार अड्डा का काम और बन्दोबस्त शुरू हुआ । उसके बाद अर्थ मन्त्रालय अन्तर्गत के ‘अर्थ आय विभाग’ से काम शुरु हुआ । वि.सं. २०१३ साल कार्तिक में तराई के सभी बाजारों के अड्डा को भन्सार कार्यालय में परिणत करने के क्रम में बीरगंज बाजार अड्डा, बीरगंज भन्सार कार्यालय में परिणत हुआ । पर्सा जिला के बीरगंज उपमहानगरपालिका – १९ इनर्वा में अवस्थित इस भन्सार कार्यालय ने वि.सं. २०१९ साल में भन्सार ऐन जारी होने के बाद से ही आधुनिक भन्सार कार्यालय के रूप में अपना उत्कृष्ट कार्य करता आ रहा है । इस भन्सार कार्यालय के अन्तर्गत मटिअर्वा, सिर्सिया, पिपरपाती, सिम्रौनगढ, भिस्वा अमृतधारा (ठोरी), अवही, कचर्वा, अलौ, गाढपर्सौनी और जानकी टोला सहित ११ छोटे भन्सार कार्यालय हैं ।



बीरगंज भन्सार कार्यालय से मुख्य रूप में सवारी साधन तथा स्पेयर पाटपुर्जा, पेट्रोलियम पदार्थ, पत्थर कोइला, लोहे के छड डण्डी, पाइप, सिमेन्ट क्लिङ्कर, तैयारी कपड़ा, हल्का पेय पदार्थ का कन्सन्ट्रेड, औद्योगिक मेशिनरी तथा कच्चापदार्थ, आयात होता है । फिड सप्लीमेन्ट, स्पोर्ट शूज (सेन्थेटीक शूज), जूस जाम, आल्मुनियम डण्डी, जमोठ कपडा, सि.आर.सिट, हाथ का झोला, टोपी तथा ताम्बे के सामान निर्यात होते हैं ।
नेपाल में सबसे ज्यादा माल सामान बीरगंज नाका से आता है । नेपाल में आयात का ५० प्रतिशत सामान बीरगंज से आता है । बीरगंज नाका से सवारी साधन तथा पेट्रोलियम पदार्थ, फैक्ट्री का कच्चा सामान ज्यादा आयात होता है । अन्य देश से कोलकाता बन्दरगाह होते हुए सामान बीरगंज भंसार से नेपाल आता है । व्यापार तथा निकासी प्रवर्धन केन्द्र (टीइपीसी) के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में कुल आयात का ४१ प्रतिशत बीरगंज से ही आया था । बीरगंज भन्सार नाका नेपाल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण नाका है । सिर्फ आयात ही नही, निर्यात के लिए भी बीरगंज नाका महत्वपूर्ण रहा है । टीइपीसी के अनुसार पिछले वर्ष कुल निर्यात में एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा बीरगंज से ही निर्यात हुआ है ।
बीरगंज भन्सार कार्यालय और अभी अभी संचालन में आए एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) भन्सार कार्यालय और सूखा बन्दरगाह भन्सार दोनों कार्यालय से आर्थिक बर्ष २०७४र०७५ का लक्ष्य पूरा करने में असफल साबित हुआ है। त्रिभुवन अन्तराष्टिूय विमान स्थल के बाद राजस्व संकलन होने वाले बीरगंज भन्सार कार्यालय के आर्थिक बर्ष २०७३÷०७४ में अनुमान से कम राजस्व संकलन हुआ है।
बीरगंज भन्सार कार्यालय ने ०७४÷०७५ में १ खर्ब ३१ अर्ब ३१ लाख ७ हजार का राजस्व संकलन किया है। भन्सार विभाग ने बीरगंज भन्सार कार्यालय को आर्थिक बर्ष ०७४÷०७५ में १ खर्ब ३४ अर्ब ३९ करोड २४ लाख २५ हजार का लक्ष्य दिया था । विभाग के दिए हुए लक्ष्य का ९७.४८ प्रतिशत मात्र राजस्व बीरगंज भन्सार कार्यालय ने संकलन किया है ।
बीरगंज भन्सार कार्यालय के तथ्यांक अनुसार अन्तशुल्क में लक्ष्य से ज्यादा राजस्व संकलन हुआ है । अन्तःशुल्क भन्सार कार्यालय ने १२४.८१ प्रतिशत अर्थात २२ अर्ब ९३ करोड, १० लाख ९३ हजार राजस्व संकलन किया है । भन्सार विभाग ने अन्तःशुल्क में १८ अर्ब ३७ करोड ३२ लाख ६३ हजार का लक्ष्य दिया था ।


अन्य भन्सार महशुल और मूल्य अभिवृद्धि कर में लक्ष्य से कम राजस्व संकलन हुआ है । भन्सार महशुल तरफ ८३.९३ प्रतिशत अर्थात ५६ अर्ब, ६३ करोड, ३० लाख ६९ हजार के लक्ष्य में ४७ अर्ब ५३ करोड, ११ हजार मात्र राजस्व संकलन हुआ है । उसी प्रकार मूल्य अभिवृद्धि कर में ५६ अर्ब ६३ करोड १५ लाख ३ हजार यानि ८७.३७ प्रतिशत राजस्व संकलन हुआ है ।
बीरगंज भन्सार कार्यालय के सूचना अधिकृत सन्तोष यादव के अनुसार भन्सार विभाग ने आषाढ़ महीना के लिए निर्धारित राजस्व वसुली लक्ष्य प्राप्त करने में कार्यालय सफल हुआ है । यादव ने बताया कि आषाढ़ महीना में १३ अर्ब ४३ करोड़ ९२ लाख ४३ हजार रुपया राजस्व संकलन के लक्ष्य में १३ अर्ब ८४ करोड़ ११ लाख २३ हजार रुपयां राजस्व संकलन हुआ । गौरतलब है कि पूर्व में बीरगंज भन्सार हमेशा लक्ष्य से ज्यादा राजस्व संकलन करता आया है ।
आषाढ़ महीना में नए सवारी साधन का ज्यादा आयात होने, इन्धन के नियमित आयात, ड्राइफ्रुटस और कस्मेटिक वस्तुओं के अन्तःशुल्क में वृद्धि होने जैसे कारणों से राजस्व वसुली उत्साहजनक रही । नए सवारी साधन, इन्धन, औद्योगिक कच्चा पदार्थ और दैनिक उपभोग्य वस्तु के आयात से इस भन्सार ने ज्यादा राजस्व संकलन किया । संकलित राजस्व मध्ये इन्धन और नए सवारी साधन से ही आधा राजस्व संकलित हुआ है ।
बीरगंज भन्सार कार्यालय के प्रमुख सेवन्त पोखरेल ने पिछले बर्ष के बाढ़, क्लिंकर आयात का अवरोध तथा दो तह के निर्वाचन ने भन्सार राजस्व संकलन को प्रभावित किया । पिछले बर्ष के बाढ़ से १५÷२० दिन नाका अवरुद्ध हुआ, मंसिर महीना भर क्लिंकर आयात ठप्प हो गया और दो निर्वाचन के समय में ७२ घण्टा के दर से ६ दिन नाकाबन्द होना भी राजस्व वसुली में प्रभाव डाला ।
उसी प्रकार तीसरे मुल्क के वस्तु आयात के लिए मुख्य स्थल बीरगंज स्थित सिर्सिया सूखा बन्दरगाह भन्सार कार्यालय ने आर्थिक बर्ष २०७४र०७५ में राजस्व वसूली लक्ष्य पूरा करने में असफल रहा । भन्सार विभाग ने सिर्सिया सूखा बन्दरगाह को दिए लक्ष्य से कम राजस्व वसुली किया है। सिर्सिया भन्सार कार्यालय के सूचना अधिकृत धन बहादुर बरुवाल के अनुसार भन्सार विभाग के लक्ष्य २८ अर्ब २९ करोड़ ४२ लाख ५९ हजÞार में सिर्सिया सूखा बन्दरगाह ने २७ अर्ब ३३ करोड ५१ लाख ९३ हजार रुपया अर्थात ९६.६१ प्रतिशत मात्र राजस्व संकलन किया है ।
सूखा बन्दरगाह कार्यालय ने पिछले वर्ष लक्ष्य से ज्यादा राजस्व संकलन किया था । पिछले आर्थिक बर्ष में सूखा बन्दरगाह भन्सार कार्यालय ने २१ अर्ब ५८ करोड ८५ लाख ९५ हजार अर्थात १०२.६ प्रतिशत राजस्व संकलन किया था । सूखा बन्दरगाह भन्सार कार्यालय को भन्सार विभाग ने पिछले बर्ष २१ अर्ब ४ करोड ८ लाख ८१ हजार रुपया का लक्ष्य दिया था । संकलित राजस्व मध्ये भन्सार महशुल ज्यादा रहा है । कार्यालय के तथ्यांक अनुसार ११ अर्ब ६४ करोड, ३० लाख ५३ हजार रुपैंया राजस्व वसूली हुआ है । उसी प्रकार मूल्य अभिवृद्धि कर तर्फ १४ अर्ब २ करोड, ६० लाख ३८ हजार राजस्व संकलन हुआ है ।
बीरगंज भन्सार कार्यालय अन्तःशुल्क में ज्यादा राजस्व संकलन किए, सिर्सिया सूखा बन्दरगाह कार्यालय ने मात्र मूल्य अभिवृद्धि कर द्वारा संकलन किया है । अन्तःशुल्क की ओर १ अर्ब ६६ करोड, ६१ लाख २ हजार राजस्व संकलन हुआ है । भन्सार विभाग द्वारा दिया गया लक्ष्य पूरा नही हुआ, सूखा बन्दरगाह भन्सार कार्यालय के प्रमुख सूर्य प्रसाद सेढांई ने बताया । सेंढाई ने बताया कि पिछले बर्ष सावन में आए बाढ़ के कारण राजस्व संकलन प्रभावित हुआ । सेढांई ने कहा कि बाढ़ ने भारत तरफ के रेलवे ट्रैक को क्षति पहुचाया जिसके चलते आयातकर्ताओं ने नाका परिवर्तन करके आयात किया ।
नेपाल सरकार को भन्सार से मिलने वाले कुल राजस्व का ५० प्रतिशत राशि बीरगंज से आता है । बीरगंज भंसार से कुल भन्सार में करीब ३० प्रतिशत सवारी साधन से और २७ प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ का योगदान रहता है । पिछले वित्त वर्ष में संकलित एक खर्ब ७६ अर्ब ११ करोड रूपये कुल राजश्व में बीरगंज से ही ८९ अर्ब ९६ करोड़ रूपये हुआ था, जो की लम्बी नाकाबंदी के बावजूद लगभग ५० प्रतिशत रहा । नेपाल के भन्सार प्रशासन ने विभिन्न भन्सार कार्यालय में भन्सार शुल्क, मूल्य अभिबृद्धि कर, अन्तःशुल्क तथा अन्य कर वसूल होता है । इस से कुल राजस्व का ४४ प्रतिशत तथा कर राजस्व का ५० प्रतिशत प्रतिनिधित्व होता है ।
संसद ने भन्सार कार्यविधि के सरलीकरण तथा सामञ्जस्यीकरण सम्बन्धी, ’संशोधित क्योटो महासंधि’ नाम के अन्तर्राष्ट्रीय महासन्धि को नेपाल पक्ष राष्ट्र बनने सम्बन्धी प्रस्ताव को बहुमत से अनुमोदन कर दिया है । इससे भन्सार प्रशासन में एकरूपता और पारदर्शिता कायम होगा । ये प्रस्ताव अनुमोदन हो जाने के बाद अब नेपाल का भंसार, विश्व भन्सार संगठन के सहयोग से और उत्कृष्ट और प्रभावकारी तरीके से काम कर सकेगा ।
नेपाल का निर्यात एक खर्ब पहुंचाने में मुश्किल है, और आयात ६ खर्ब से ज्यादा है । इस कारण नेपाल और गरीब होता जा रहा है । अगर निर्यात बढ़ाना कठिन है, तो स्वदेशी उत्पादन करके आयात कम किया सकता है । नेपाल १ खर्ब से ज्यादा तो पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है । इसके लिए विद्युतीय और सौर्य ऊर्जा चालित सवारी साधन का प्रयोग और उसमें छूट बेहतर विकल्प हो सकता है । साथ ही कार, जीप जैसे सवारी साधनों के प्रयोग के बजाय सार्वजनिक यातायात को प्रोत्साहन देकर पेट्रोलियम पदार्थ के आयात में कमी की जा सकती है । नेपाल १ खर्ब से ज्यादा कृषिवस्तु का आयात करता है, इन वस्तु का उत्पादन करने का स्रोत साधन होते हुए भी सरकारी उदासीनता के कारण नहीं हो रहा है ।
तरकारी तथा फलफूल के आयात के लिए मात्र बीरगंज नाका से चालू वित्त वर्ष के ६ महीने में एक अर्ब रूपैयां आयात के क्रम में बाहर गया । भारत से बीरगंज नाका होते हुए आयात हुए बेमौसमी हरी तरकारी हेटौंडा, नारायणगढ़, पोखरा और काठमाडौं के बाजार में आपूर्ति करता है । जिला कृषि विकास कार्यालय के अनुसार पर्सा जिला में हरेक वर्ष करीब ६ सौ हेक्टर क्षेत्रफल में फलफूल, आम, केला, लीची, कटहल की खेती होती है । भारत में किसान को फलफूल और तरकारी खेती में प्रोत्सहान करने के लिए सरकार विभिन्न शीर्षक में अनुदान देती है, लेकिन यहां के किसान को कुछ करने की चाह के बावजूद सरकारीस्तर पर कोई अनुदान तथा सहयोग नहीं मिल पाता । इसी कारण आयात बढ़ता जा रहा है, और निर्यात घटता जा रहा है ।

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