आर्थिक राजधानी होना ठीक रहेगा – मनोज उपाध्याय

Manoj Upadhya

मनोज उपाध्याय

आर्थिक दृष्टिकोण से पूरे देश के लिए वीरगंज का जो महत्व और भूमिका है, वह गौरवपूर्ण है । लेकिन इसका सही मूल्यांकन राज्य की ओर से नहीं हो रहा है । यह हमारे लिए दुःख की बात है । आज प्रदेश राजधानी की बात हो रही है । वीरगंज के कुछ लोग भी उसके लिए प्रयास कर रहे हैं । अगर वीरगंज प्रदेश राजधानी प्राप्त करती है तो अन्य जगहों को क्या मिलनेवाला है ? इसकी ओर भी हम लोगों को सोचना चाहिए । मैं चाहता हंूँ की राजधानी के लिए हम लोग आपस में मारा–मारी न करें । और आपसी सहकार्य, सद्भाव और मित्रता के लिए वीरगंज नेतृत्वदायी भूमिका में आनी चाहिए । जनकपुर को प्रदेश राजधानी बनाने की बात हो रही है । मैं तो कहता हूं कि उसमें वीरगंज को भी साथ देना चाहिए । और साथ में जनकपुर को कहना चाहिए– ‘आर्थिक राजधानी तो वीरगंज ही उपर्युक्त है, इसमें आप लोगों को साथ चाहिए ।’ इसीतरह राजविराज में जो उद्योग आज लावारिस बन रही है, उसकी उत्थान के लिए वीरगंज को आवाज उठानी चाहिए और राजविराज को भी कहना चाहिए– आर्थिक राजधानी तो वीरगंज ही रहना उपर्युक्त रहेगा । ऐसा करने से आपसी सद्भाव और संबंध मजबूत बन सकता । वीरगंज का समग्र विकास के लिए यह पहला कदम हो सकता ।
सीमावर्ती शहरों में से वीरगंज सबसे आगे है । वीरगंज भन्सार आज जितने परिमाण में भारत सरकार को राजश्व दे रही है, उस अनुसार वीरगंज को सुविधा मिल रही है या नहीं ? यह हमारी आवाज बननी चाहिए कि नहीं ? इसकी ओर भी ध्यान देना जरुरी है । क्योंकि हमारी समृद्धि यहां क्षयीकरण होती जा रही है । रक्सौल अथवा भारत के अन्य शहरों से नेपाल में जो गाड़ी आती है, उसमें अधिक समय लग जाता है । उसके बदले नेपाली व्यवसायियों को जो राजश्व (जुर्माना) भरना पड़ता है, यह कब तक चलेगा ? हम लोग रक्सौल को प्रमुख भन्सार नाका मानते हैं । प्रमुख भन्सार नाका है तो उस अनुसार गुणस्तरीय भी तो होना चाहिए । इसमें भी वीरगंज की समृद्धि जुड़ी हुई है । इसका मतलब यह नहीं है कि समृद्धि के लिए आन्तरिक पक्ष से कोई लेना–देना नहीं है । वीरगंज के समग्र विकास के लिए राज्य द्वारा जो विभेद हो रहा उसके विरुद्ध तो हम लोगों को लड़ना ही है, यह एक अलग पार्ट है । लेकिन वीरगंज के साथ जुड़ा हुआ रक्सौल भी आज वैसी ही हांलत में हैं, उसकी समृद्धि के लिए कौन बोल रहा है ? जब तक रक्सौल समृद्ध नहीं बनेगा, तब तक वीरगंज भी समृद्ध नहीं हो सकता । इसके लिए भारत सरकार को कहना चाहिए की नहीं ?
समग्र विकास के लिए हम लोग कृषि में औद्योगीकरण की बात करते हैं । हमारे सामने एक तथ्यांक है– देश में २५ प्रतिशत उपयोग्य जमीन खाली पड़ी है और ८ लाख जनता भूमिहीन हैं । ऐसी अवस्था में हम लोग समग्र विकास की बात कर रहे हैं और वीरगंज में प्रदेश राजधानी भी मांग रहे हैं । प्रदेश राजधानी, विश्वविद्यालय और मेडिकल यूनिभर्सिटी सब चीज वीरगंज में ही होनी चाहिए, तत्काल के लए यह सम्भव नहीं है । तसर्थ इतिहास से वर्तमान तक वीरगंज का जो आर्थिक योेगदान है, उस को बरकरार रखने के लिए हम लोग क्या कर सकते हैं ? हमारी योगदान को उचित मूल्यांकन के लिए आगामी प्रदेश सरकार की नीति क्या हो सकती है ? यह महत्वपूर्ण बात है ।

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