CAG ने किया खुलासा, भारतीय सेना के पास सिर्फ 10 दिन का गोला बारूद





नई दिल्ली। भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ओर से संसद से दाखिल की गई रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना में गोला-बारूद की गंभीर कमी है। शुक्रवार को मानसून सत्र के दौरान दाखिल की गई CAG की रिपोर्ट के अनुसार एजी ने ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) के प्रदर्शन में कमी पाया। रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 में इसकी तुलना में इसके कारखानों के कामकाज में कोई सुधार नहीं हुआ।

रिपोर्ट में तोपखाने और टैंक के गोला-बारूद में दो महत्वपूर्ण कमी बताई गई और ओएफबी को 2013 में तय किए गए रोडमैप के अनुसार वितरित करने में विफल रहने का दोषी ठहराया गया है। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘हमने गोला-बारूद की उपलब्धता (सितंबर 2016) में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं देखा है .. 55 प्रतिशत प्रकार के गोला-बारूद की उपलब्धता एमएआरएल से कम थी, यानी न्यूनतम अपरिहार्य आवश्यकता परिचालन तैयार करने के लिए रखी गई थी और 40 प्रतिशत प्रकार के गोला-बारूद गंभीर स्तर पर थे जो 10 दिन से कम के स्टॉक हैं।




फ्यूज की कमी झेल रहे गोला बारूद

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार पूर्व तोपखाने अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) ने बताया कि रिपोर्ट में गोलाबारूद की कमी, विशेष रूप से विस्फोटकों और मिसाइलों के लिए उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज पर प्रकाश डाला गया है। उन्होंने कहा कि इश्यू इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज में गंभीर कमी के साथ ऐसा करने के लिए ज्यादा है। केवल छोटे हथियारों के लिए जरूरी गोला बारूद फ़्यूज़ या चार्जर्स का उपयोग नहीं करते हैं। इस प्रकार आर्टिलरी विस्फोटक, मिसाइल, मोर्टारों में इस्तेमाल होने वाले गोला बारूद इस कमी को झेल रहे हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तरी कमान में तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए सेना कमांडर विशेष वित्तीय शक्तियों के जरिए खरीद की गई 1.26 करोड़ की लागत वाली आउटबोर्ड मोटर्स (ओबीएम) का उपयोग नहीं किया जा सका। 50 ओबीएम में से 46 का इस्तेमाल सात सालों में 10 घंटे से कम के लिए किया गया है।
news source:dainikbhashkar

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