स्व–परिवर्तन आवश्यक : दीपकुमार उपाध्याय

दीपकुमार उपाध्याय, नेता नेपाली कांग्रेस

हिमालिनी, अप्रैल अंक, २०१८ | कल तक हम लोग राजा को गाली देते थे । नेताओं को गाली देते थे और कहते थे– स्थिर सरकार नहीं है, इन लोगों ने कुछ भी नहीं किया । अब स्थिर सरकार की सम्भावना तो है, लेकिन व्यक्ति तों पुराने ही है । इसीलिए परिवर्तन के लिए स्वपरिवर्तन प्रथम शर्त है । अगर नेताओं ने खुद को परिवर्तन नहीं किया तो जनता की अपेक्षा सम्बोधन होने की सम्भावना नहीं है । हमारे नेतृत्वकर्ता दिल से ही काम करना चाहते हैं तो बहुत कुछ कर सकते हैं । नहीं तो प्रतिपक्षी दल, विरोधी पार्टी और कर्मचारीतन्त्र को दोषी करार देकर आराम से बैठ सकते हैं । ऐसी अवस्था रहदम रहेगी । इसीलिए परिवर्तन के लिए अब स्वपरिवर्तन की आवश्यकता है ।
काम करना ही चाहते हैं तो वर्तमान सरकार के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है । हमारे पास जो अनुभव औैर ज्ञान है, उस को सही सदुपयोग किया जा सकता है, जहां से हम लोग आगे बढ़ सकते है । हां, नाकेबन्दी के कारण नेपाल और भारत के बीच कुछ असहज परिस्थितियां आ गई, जो दोनों देशों के लिए अप्रिय रहा । इस घटना से अब सीख लेनी चाहिए । एक ही संस्कृति, धर्म और संस्कार से निर्देशित देश है– नेपाल और भारत । कभी–कभार आपसी मनमुटाव हो सकता है, जो स्वाभाविक भी है । लेकिन अब सम्बन्ध में सुधार होना चाहिए । क्योंकि नेपाल को विकसित करना है । उसके लिए दोनों देशों को अपनी–अपनी जगह से पहल करना है । नए तरीके से सोचना है । विशेषतः राजनीतिक नेतृत्व की मानसिकता और चरित्र में परिवर्तन आना जरुरी है ।
नेपाल में कहीं क्षेत्र हैं, जहां काम किया जा सकता है । उस में से एक पर्यटन का क्षेत्र भी है । पर्यटकीय विकास के लिए जो ‘ब्लाक’ है, वह दक्षिण की ओर है । राजनीतिक और कुटनीतिक पहल के बिना उक्त ‘ब्लाक’ खुलनेवाला नहीं है । कूटनीति ऐसी कला और चातुर्यता है, जो देश को कहीं भी ले जा सकती है । विशेषतः देश और जनता के स्वार्थ के लिए हमारी कला और चातुर्यता प्रयोग में आनी चाहिए । लेकिन इसमें हम कितना कर सकते है, मूल प्रश्न यही है ।
भौगोलिक दृष्टिकोण से नेपाल एक छोटा–सा देश है और भारत विशाल । लेकिन नेपाल के लिए भारत एक विशाल बाजार हैं । लेकिन नेपाल में जो सामान उत्पादन होता है, वह भारतीय बाजार में क्यों नहीं जाता ? क्यों हम लोगों के व्यापार में असमानता है ? इस असमानता को कैसे हल किया जाएगा ? हमारा ध्यान इसकी ओर जाना चाहिए ।
इसीतरह नेपाल में जल विद्युतों की सम्भावना अधिक है । लेकिन आज भारत के लिए विद्युत से ज्यादा पानी की आवश्यकता है । नेपाल पानी के लिए एक प्रमुख स्रोत है । सिर्फ यूपी और बिहार के लिए ही हमारा पानी प्रयोग किया जाता है तो नेपाल इससे काफी फायदा ले सकता है । इसके लिए क्या–क्या करना पड़ेगा, वो करना चाहिए । पानी के बहुउपयोग की नीति में भारत सरकार भी प्रयासरत है । इसके लिए दोनों देशों को लचकता के साथ प्रस्तुत होना चाहिए, दोनों देशों को समान प्रतिफल प्राप्त होना चाहिए ।
नेपाल–भारत बीच सीमा क्षेत्रों में भी विवाद है । नेपाल की सहमति बिना भारत ने विभिन्न बांध निर्माण किया है, जो गलत है । अन्तर्राष्ट्रीय कानुन अनुसार जब तक नेपाल सहमति नहीं देता, तब तक भारत इस तरह का बांध निर्माण नहीं कर सकता । इसीलिए इस तरह की समस्या समाधान के लिए भी दोनों पक्ष स्पष्ट दृष्टिकोण से प्रस्तुत होना चाहिए । राष्ट्रीय हित रक्षा के खातिर हम लोगों को भी सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष में विभाजित होना ठीक नहीं है । विकास के लिए राष्ट्रीय एजेण्डा होना चाहिए, हमारे ज्ञान, शीप और दक्षता का अधिकतम प्रयोग होना चाहिए । इसके लिए वर्तमान सरकार के साथ अवसर ही अवसर है ।
हमारे दो पड़ोसी राष्ट्र हैं– भारत और चीन । दोनों देशों की इच्छा नेपाल में शान्ति और स्थिरता है । दोनों देश चाहते हैं कि नेपाल भी विकास की ओर आगे बढ़े । विकास के लिए विगत में भारत में एक समस्या थी– कोई भी प्रोजेक्ट निर्धारित समय में पूरा नहीं किया जाता था । लेकिन वहां अब इस तरह की समस्या नहीं है । आज प्रायः हर योजनाएं निर्धारित समय में सम्पन्न किया जाता है । जो समय में काम सम्पन्न करता है, उसको पुरस्कृत किया जाता है और जो नहीं करता, उसको दण्डित । अब यहां भी इस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए ।
दूसरी बात हमारी सुरक्षा नीति क्या है ? परराष्ट्र नीति किस तरह संचालित किया जाएगा ? इसमें स्पष्ट होना जरुरी है । ब्रिटिस सरकार के समय से ही भारत में एक सिस्टम विकसित हुई है । लेकिन हमारे यहां अभी तक नहीं है । उदाहरण के लिए अगर नेपाल से कोई उच्चस्तरीय अधिकार और नेता भारत जाते हैं तो उसका रेकर्ड भारत सरकार रखती है । अर्थात् संस्थागत रेकर्ड किया जाता है । लेकिन नेपाल में ऐसी परम्परा नहीं है । व्यक्ति–व्यक्ति में ही बात खत्म हो जाती है । लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता । जिसके चलते भी हमारी असमझदारी बढ़ जाती है । इससे बचने के लिए विगत से पाठ सखने की जरुरत है ।

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