राजपा को राष्ट्रीय पार्टी बनाने की जरुरत : डा. सुरेन्द्र कुमार झा

हिमालिनी, मई अंक, २०१८ | आज हम लोग जहां हैं, उस को देखकर ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है । इसका मतलब अवस्था निराशाजनक है, यह भी नहीं है । सामान्य रूप से ही पार्टी आगे बढ़ रही है, अवस्था सन्तोषजनक है । स्थानीय, प्रदेश तथा केन्द्रीय चुनाव में दो नम्बर प्रदेश से राजपा ने जो मत प्राप्त किया, उससे थोड़ा उत्साहित भी हो सकते हैं । क्योंकि प्रदेश नं. २ में रहनेवाले जनता ने राजपा को विश्वास किया है । मतदाताओं के मत के अनुसार पूरे नेपाल में राजपा चौथी शक्ति है, वोट के अनुसार राजपा राष्ट्रीय पार्टी भी है । लेकिन अवधारणा, कार्यक्रम और कार्यक्षेत्र की दृष्टिकोण से राजपा आज भी क्षेत्रीय पार्टी ही है । और उसका आधार क्षेत्र ‘मधेश’ ही है ।

डा. सुरेन्द्र कुमार झा, युवा नेता

विगत जो भी हो, अब राजपा के सामने अपनी सोच, नीति और कार्यक्रम को सबल बनाने की चुनौती है । राजपा ने गत साल ही कहा था कि एक साल के अन्दर पार्टी का महाधिवेशन कराया जाएगा । लेकिन विभिन्न कारण से नहीं हो सका । अब पार्टी को महाधिवेशनमुखी बनाने की जरूरत है । और राष्ट्रीय पार्टी की परिकल्पना के अनुसार नीति तथा कार्यक्रम लाकर राजपा को रूपान्तरण करना है, इसकी जिम्मेददारी युवाओं के सामने है । यहां एक सच स्वीकार करना ही है– राजपा बाहर से जिस तरह दिखाई देती है, अन्तर से वैसी नहीं है । इसके पीछे ६ पार्टी के अध्यक्ष, उन लोगों का अनुभव, राजनीतिक योगदान और वैचारिक इतिहास है । आज भी उस तरह का मनोविज्ञान काम कर रहा है । इसीलिए पार्टी को इकठ्ठा कर मजबूत बनाना है तो पार्टी में अन्तरघुलन की सख्त जरूरत है । उसके बिना मजबूत संगठन बननेवाला नहीं है । मजबूत संगठन बिना पार्टी को मजबूत नहीं किया जा सकता । इसीलिए कम से कम ६–७ महीना अथवा एक साल के अन्दर पार्टी संगठन निर्माण और महाधिवेशन होना ही चाहिए ।
अभी तो हम लोग अध्यक्ष मण्डल की अवधारणा के अनुसार पार्टी सञ्चालन कर रहे हैं । इसके पीछे ६ राजनीतिक दलों का इतिहास है । नेपाल में राजपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है, जो अध्यक्ष मण्डल से सञ्चालित हो रही है, यह नेपाल के लिए बिल्कुल नया प्रयोग है । बहु–अध्यक्षात्मक प्रणाली से पार्टी को आगे ले जा सकते हैं या नहीं ? यह तो अभी बहस का विषय है । लेकिन अब पार्टी को तय करना है कि किस तरह आगे बढ़ाना है ? अध्यक्ष मण्डल, सामूहिक नेतृत्व अथवा एकल नेतृत्व ? इसके बारे में निर्णय करने की जरूरत है । अध्यक्ष मण्डल बनाकर ही पार्टी सञ्चालन करना है, तो भी बृहत विचार–विमर्श की जरूरत है । अध्यक्षात्मक मण्डल ही स्वीकार करना है तो उस को भी व्यवस्थित बनाने की जरूरत है । नेपाल में जो क्षेत्रीय, जातीय और धार्मिक विविधता है, उसको सम्बोधन कर अध्यक्ष मण्डल बना सकते हैं, ताकि अध्यक्ष मण्डल को देखने से लग जाए कि राजपा पूरे देश को प्रतिनिधित्व कर रही है । मेरे खयाल से अगर ऐसा ही करते हैं तो अभी जो ६ अध्यक्ष हैं, उसकी जरुरत नहीं है । ज्यादा से ज्यादा ३ से ४ व्यक्तियों का अध्यक्ष मण्डल बनाया जा सकता है, साथ में वह सभी निर्वाचित होकर आने की जरुरत है । समान उद्देश्य के लिए सभी भाषा, क्षेत्र और समुदायों की प्रतिनिधि को पार्टी नेतृत्व में लाया जाता है, तो इससे सकारात्मक सन्देश भी दे सकते हैं, जिससे हिमाल, पहाड़ और मधेश को भी जोड़ा जा सकता है । अध्यक्ष मण्डल प्रणाली के लिए यह एक सुखद पक्ष भी हो सकता है । इस प्रणाली को कार्यान्वयन में ले जाने के लिए भी बृहत विचार–विमर्श की जरूरत है, महाधिवेशन से इस अवधारणा को पास कराना होगा ।
लेकिन इस प्रणाली के भीतर भी असंख्य अवगुण हैं । निर्णय प्रक्रिया में सुस्ती तथा विरोधाभास दृष्टिकोण और विवाद के कारण बहु अध्यक्षात्मक प्रणाली भी आलोचित है, राजपा इसकी अनुभव कर रही है । इस कमी–कमजोरी को सुधार किया जाता है तो बहु–अध्यक्षात्मक प्रणाली अपनाया जा सकता है । लेकिन इसके लिए नेता–कार्यकर्ता तैयार नहीं हैं तो सामूहिक नेतृत्व में विभिन्न पदों की सिर्जना कर नेता–कार्यकर्ताओं की व्यवस्थापन जरूरी है । जो भी करें, एक साल के अन्दर पार्टी महाधिवेशन, संगठन निर्माण और नेतृत्व विकास करने की जरूरत है । संक्षेप मे कहा जाए तो राजपा एक विविधता से परिपूर्ण पार्टी है । इस को व्यवस्थित किया जाता है तो यह एक वैकल्पिक लोकतान्त्रिक शक्ति बन सकती है, इसके लिए हम लोगों को लगना ही चाहिए ।

 

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