बाढ़ की विभीषिका

हिमालिनी डेस्क
बाढ की विभीषिका से प्रतिवर्ष हजारों–लाखों लोग हताहत होते हैं । समय–असमय दस्तक देते इस आपदा से बड़े पैमाने पर जान–माल की हानि होती है । बाढ प्रभावित क्षेत्र का दृश्य कुछ पल के लिए मरघट सा हो जाता है । एक तरफ सुरक्षित स्थानों पर जाकर अपने जीवन की सुरक्षा की चुनौती होती है, तो दूसरी ओर भोजन, पेयजल व दवा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग व्याकुल हो उठते हैं । नेपाल हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी इस विभीषिका से जूझ रहा है । फर्क यही है कि इस बार बाढ़ का कहर किसी एक क्षेत्र में नहीं होकर तकरीबन सारे तराई क्षेत्र को प्रभावित किए हुए है । सप्तरी, धनुषा, महोत्तरी, झापा, मोरंग, रोतहट, बारा, पर्सा सारे जिले इससे जूझ रहे हैं । सरकारी आँकड़े्र भले ही कुछ कहें पर मौत की संख्या बढती जा रही है । बाढ की समाप्ति के बाद भी इसका असर कई महीनों तक पड़ने वाला है । अभी बाढ़ है बाद में बीमारी सरकार को अभी से इस ओर पर्याप्त ध्यान देना चाहिए । किसी भी आपदा से बचने के लिए पूर्व तैयारी की जरुरत होती है जिससे जनता सुरक्षित रह सकती है । प्रकृति पर हमारा वश नहीं है पर उसके प्रकोप से तो हम सुरक्षा करने की कोशिश तो कर ही सकते हैं ।
आज कल बरसात अनियमित हो गयी है कहीं बहुत तेज बारिश होती है तो कहीं बारिश होती ही नहीं हैं । इस समस्या के पीछे एक मूल कारण है वह बरसात के पानी का जमीन के द्वारा सोखा नहीं जाना ।
बरसात के पानी को जमीन में सोखने के लिए जमीन को बिना जुताई का होना आवश्यक है इसके साथ उसमे हरियाली का होना भी आवश्यक है । इसलिए हम कह सकते हैं आज कल फसलों के उत्पादन के लिए की जा रही जमीन की जुताई का इस में सबसे बड़ा दोष है ।
अधिकतर लोग सोचते हैं कि बरसात बादलों के माध्यम से आसमान से आती है किन्तु बादलों के निर्माण में भूमिगत जल की अहम भूमिका रहती है जो बादल बन कर बरसता है । बादलों के बरसने के लिए हरयाली का होना अति आवश्यक है । हरियाली की कमी के कारण एक और जहाँ बरसात का समान वितरण नहीं होता है वहीँ बरसात का पानी जमीन में सोखा भी नहीं जाता है । इसलिए यह जरूरी है कि पूरी धरती पर हरियाली सामान रूप से वितरित रहे ।
हम लोगों ने शहरों, जंगलों और खेती के लिए जमीनो को अलग अलग कर दिया है इसलिए बरसात का वितरण नहीं रहता है बहुत तेज बारिश पहाड़ों के ऊपर हो जाती है जिस से एक और हरे भरे पहाड़ अब टूट टूट कर गिर रहे हैं ।
बाढ़ के कारण सामान्यतः बाढ़ तब आती है जब नदी, झील अथवा तालाब का जल तट से ऊपर होकर बहने लगता है । यह अधिक वर्षा अथवा उपयुक्त जल निकास की व्यवस्था के अभाव के कारण होता है । किनारों के ऊपर से नदी जल का बहाव नदी–तल के भर जाने या प्रवाह में बाधा के कारण भी होता है । नदी, सरिता या जलधाराओं के मिलन–स्थल (संगम) पर भी बाढ़ की शंका बनी रहती है । गंगा तथा गोदावरी नदियों के बहाव क्षेत्र में ऐसा भी देखने में आता है कि मुख्य नदी का जलस्तर ऊंचा हो जाता है और सहायक नदियों से होकर आसपास में फैलकर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करता है ।
पर्वतों से उतरकर मैदानी भागों में आने वाली नदियों में बरसात के समय बाढ़ की संभावनाएं अधिक रहती है । पर्वतों पर होने वाली अधिक जलवर्षा के प्रवाह को रुकने के लिए पेड़–पौधे या मिट्टी नहीं है तो वह अबाध गति से ढलानों पर बहती हुई नीचे मैदान में आकर बाढ़ लाती है । पहाड़ी ढालों पर वनों के रहने से पत्तियों के आच्छादन के कारण वर्षा–जल का बहाव तेज नहीं होता है और मिट्टी का कटाव भी कम होता है । किंतु वनों के काटे जाने से जलवर्षा के कारण पहाड़ी ढालों पर प्रवाह की गति तेज होती है मिट्टी का कटाव बढ़ता है, जिसके फलस्वरूप नदियों में बाढ़ आने लगती है ।
नेपाल के बाढ़ वाले मैदानी भागों में भूमि के उचित उपयोग पर नियंत्रण की कमी और असंतुलित निर्माण कार्यों की वजह से जलप्रहाव बाधित होता है और बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है ।
बाढ़ की चेतावनी
संभावित लक्षणों को परख कर यदि बाढ़ के आने की पूर्व सूचना समय रहते दिए जाने की समुचित व्यवस्था हो तो जन–धन के नुकसान से बचाव हो सकता है ।
बाढ़ की चेतावनी देने के लिए विभिन्न नदी बेसिनों में जल प्रवाहमापी यंत्रों को लगाया जाना चाहिए, साथ ही बेतार यंत्रों द्वारा स्थिति की नियमित सूचनाएं क्षेत्रीय तथा केंद्रीय मुख्यालयों तक पहुँचानी चाहिए । इसके अलावा बाढ़ वाले इलाकों के लिए अलग से बाढ़ नियंत्रण आयोग नामक संगठन की स्थापना करनी चाहिए क्योंकि हर वर्ष बाढ का आना लगभग तय ही होता है ।
सरकार के जो काम होते हैं उन्हें करने दें पर स्वयं बाढ संभावित क्षेत्र के लोगों के सतर्क होने की आवश्यकता है । उन्हें कुछ तैयारी हमेशा ऐसे वक्त के आने से पहले कर के रखनी चाहिए
१) अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां बाढ़ की सम्भावना हो तो पहले से आपातकालीन निर्माण वस्तुओ को इक्ठटा करें ।
जैसे–
– प्लाइवुड
– प्लास्टिकरटार्पौलिन
– काठ
– कीला
– हथौड़ा
– आरी
– बेलचा, खुरपा,
– बाली से भरा बोरा, इत्यादि ।
२) आपातकालीन स्थितियों के लिये कुछ सामान अपने पास थैली में रखें
जैसे–
– टार्च और अतिरिक्त बैटरियाँ (सेल)
– बैटरी–चालित रैडियो, ट्रान्सिस्टर और अतिरिक्त बैटरियां (सेल)
– बैन्डेजÞ, गौजÞ, कटने–जलने की दवा
– पेट खराब, बुखार, दर्द इत्यादि की दवा (और जो दवा घर के कोई सदस्य को नियमित लेना पड़ता है)
– पीने की पानी का बोतल (हर आदमी तथा औरत को हर दिन तीन लीटर पानी लगता है)
– खाने का समान
– पैसे
३) अपने जÞरूरी कागजÞात इक्ठटा रखे ।
४) घर के बाढ़ बीमा करवायें और बीमा के कागजÞ भी साथ रखें ।
५) घर के कीमती सामान (फ्रीजÞ, टीवी) की सूची बनाये और उनके तस्वीरे भी खीच के रखें ।
अपने घर को सुरक्षित बनायें
– घर के पहली मंजÞिल के दीवारों में सूजन से बचने के लिये उन्हे जल–रोधक केमिकल से सील करे ।
– घर के गन्दे पानी की ड्रेन में वाल्व लगवाये ताकि बाढ़ का पानी वहां से घर में न घुसे । आपातकालीन स्थिति में आप रबर की गेंद इस्तमाल कर सकते हैं ।
– घर के गीजर, फर्नेस और स्विच, प्लग पायन्ट कमरे के ऊपरी हिस्से में लगवाये ।
अपने परिवारवालों को आपातकालीन स्थिति के लिये तैयार करे आफÞत आने पर यह सम्भव है कि आप और आपके घरवाले दफ्तर, कर्मस्थल, पाठशाला में फंस जायें ।
– इस स्थिति में दूसरे शहर में रहने वाले दोस्त, रिश्तेदार को पहले से सम्पर्क–व्यक्ति निर्णय कर के रखें ।
– आपातकालीन स्थिति में अक्सर दूर की टेलिफोन (एसटीडी) काम करती है, पर स्थानीय (लोकल) फोन नहीं चलते ।
– यह जÞरूर जाँच ले कि घर में सबको इस व्यक्ति का नाम, पता और टेलिफोन नम्बर पता है ।
– बिजली, पानी और गैस के लाइने बन्द करना सीखे और घर में सबको सिखाये । बाढ़ में इन्हे बन्द करना आवश्यक हो सकता है ।
– गाड़ी की टैन्क में पेट्रोल तथा डीजल हमेशा भर के रखने की कोशिश करे । बाढ़ के समय अक्सर पम्प बन्द रहते हैं ।
आपकी थोड़ी सतर्कता आपको सुरक्षा प्रदान कर सकती है । आरोप प्रत्यारोप से पहले जागरुक नागरिक बनें और अपने घर के आस पास पानी का व्यवस्थापन सही करें । बारिश के समय नालियों को जाम ना होने दें क्योंकि सतर्कता गई, दुर्घटना हुई ।

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