हिन्दी का वैश्विक परिदृश्य

मोनिका वर्मा
हिन्दी जो कि हिन्दुस्तान की भाषा के नाम से जानी जाती रही है, वह अब केवल हिन्दुस्तान की भाषा न होकर संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है । चाहे कोई वस्तु हो या व्यक्ति, व्यवसाय हो या कुछ और, यदि वह एक क्षेत्र या राष्ट्रीय स्तर से ऊपर उठकर विश्व स्तर तक फैलते हैं तो निस्संदेह वह असाधारण हैं । एक देश से संपूर्ण विश्व की यात्रा करना कोई आसान कार्य नहीं है । हिन्दी भाषा भी स्वयं एक असाधारण व्यक्तित्व से ओत–प्रोत है, जो अपने गुणों से सभी के दिलो–दिमागÞ में छा चुकी है । वह एक ऐसी भाषा है जो हर एक शब्द को भावनाओं से जोड़ती है । यदि देखा जाए तो संस्कृत के बाद हिन्दी ने ही लोगों को प्रभावित किया और समय के बढ़ने के साथ–साथ उसके बोलने वालों की संख्या भी दिन–दुगनी, रात–चौगुनी बढ़ी है । इसलिए आज विश्व में सबसे अधिक बोलने वाली भाषाओं में हिन्दी का स्थान महत्त्वपूर्ण बन चुका है ।
‘‘हिन्दी है साधन आत्माभिव्यक्ति का
सुरों के नाम का, धुनों की तान का
ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है हिन्दी
भावनाएँ व्यक्त करने का माध्यम हिन्दी’’
हिन्दी भारतवर्ष के लोगों से जितनी जुड़ी है, उतनी ही आज बहुत देशों के लोगों से जुड़ चुकी है । श्रीलंका, माककरीशस, फिजÞी, सुरीनाम, गयाना, नेपाल, म्यांमार आदि ऐसे देश हैं, जिनमें भारत के लोग भी मौजूद हैं और उनके दिलों में हिन्दी भी । उन्हीं लोगों के कारण इन देशों में हिन्दी एक मुख्य भाषा बन चुकी है । इनके अलावा बहुत देशों में जैसे– इंडोनेशिया, मलेशिया, मंगोलिया, जापान, अमेरिका, कनाडा, अफगानिस्तान, मिस्र आदि में भी हिन्दी किसी–न–किसी रूप में उपलब्ध है । इन देशों में लोग हिन्दी को विद्यालयों के माध्यम से लिखना और बोलना भी सिखाते हैं । यह देश न केवल भारत की भाषा बल्कि उसकी संस्कृति से भी बहुत प्रभावित हैं, भारत के त्योहार, रीति–रिवाज आदि को अपनाने की भी कोशिश करते हैं । साथ ही हिन्दी सिनेमा भी लोगों को प्रभावित करता है । विशेष रूप से हिन्दी संगीत को जानने की इच्छा लोग रखते हैं । यदि हिन्दी साहित्य की बात की जाए तो हमारे देश के महान साहित्यकारों ने तो हिन्दी को सँवारा है ही, साथ ही विश्व के कई देशों में भी हिन्दी साहित्यकार मौजूद हैं । वह न केवल हिन्दी में रुचिपूर्वक लिखते हैं बल्कि हिन्दी का सम्मान भी करते हैं । भारत के हिन्दी साहित्यकारों का हिन्दी के विकास में योगदान तो रहा ही है, वर्तमान समय में विभिन्न देशों के हिन्दी साहित्यकार भी हिन्दी साहित्य को विकास की सीढ़ी पर चढ़ा रहे हैं । हिन्दी साहित्य में रुचि रखने वाले देशों में नेपाल एक प्रमुख देश है एवं न सिर्फ भाषा और साहित्य की दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से वह हमारा सबसे पुराना एवं महत्त्वपूर्ण सहयोगी भाई देश रहा है । वहाँ के लोग हिन्दी के प्रति अगाध प्रेम रखते हैं ।
कई देशों में हिन्दी को पढ़ाया जाता है, उसके बावजूद भी पूरी तरह हिन्दी को अपनाने की, साथ ही उसके माहौल में ढलने की इच्छा से परिपूर्ण कई प्रतिशत लोग भारत में हर वर्ष हिन्दी सीखने के लिए आते हैं । वह हिन्दी भाषा के साथ–साथ यहाँ की संस्कृति–सभ्यता से भी प्रभावित होते हैं । हिन्दी गाने और नृत्य को लोग रुचिपूर्वक सीखते हैं एवं संगीत के साथ–साथ कला से भी उनका मोह हो जाता है । यानी कि भारतवर्ष से लोग किसी एक पक्ष के कारण नहीं बल्कि उसके प्रत्येक पक्ष से प्रभावित हैं ।
हिन्दी जहाँ प्रत्येक देश को अपनी ओर खींच रही है, वहीं वह इंटरनेट पर भी अपना अहम् स्थान प्राप्त कर चुकी है । इंटरनेट के माध्यम से भी लाखों लोग हिन्दी की ओर आकर्षित होते हैं और इंटरनेट पर हिन्दी फिल्में, गाने, नृत्य आदि को सीखने का प्रयत्न करते हैं । हिन्दी एक मात्र ऐसी भाषा है, जिसने बहुत कम समय में इंटरनेट पर अपनी जगह तय की है । इंटरनेट पर हिन्दी के प्रचार–प्रसार में भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है ।
अतः कहा जा सकता है कि हिन्दी अब न केवल एक देश बल्कि प्रत्येक देश की भाषा बन चुकी है । उसके चाहने वाले संपूर्ण विश्व में विराजमान हैं । यह एक थोपी हुई भाषा नहीं है, लोगों की भावनाओं और विचारों से जुड़ी भाषा है । जिस तरह हिन्दी ने अब तक अपना क्षेत्र विस्तृत किया है, उसी तरह आगे भी करती रहेगी ।


लेखिका परिचय
हिन्दी शोधार्थी
दयालबागÞ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट
दयालबागÞ, आगरा ।

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