मेरा कर, मेरी सड़क में निवेश करो

सुनने में शायद थोड़ा अलग लगे परंतु सच्चाई यह है कि अगर मधेश के सड़कों का आधुनिकीकरण नहीं किया गया तो मधेशी युवा पीढ़ी का ध्यान अलग थलग होने से कोई नहीं रोक पाएगा ।


समग्र मधेश में कहा जाय तो सड़क की अवस्था नाजुक ही है । महेन्द्र राजमार्ग को अलग रख दिया जाय तो हम आसानी से कह सकते हंै कि मधेशियाें को इस इक्कीसवीं सदी की सड़क की परिभाषा से सरकार रुबरु नहीं करवा पायी है ।


बचपन से अब तक सुनता आ रहा हूँ कि अब हुलाकी राजमार्ग बन जाएगा और मधेश का काया पलट होगा । मधेश मे व्यापार बढेÞगा । लोगो में रोजगार सृजना होगी । लेकिन आज की तारीख में भी हुलाकी राजमार्ग की अवस्था ज्यों की त्यों है । क्योंकी हुलाकी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना में पाँच प्रतिशत के करीब में अगर कार्य प्रगति हो तो भी सालों की मशक्कत के बाद तो उसे प्रगति कहना प्रगति शब्द को अपमान करना ही होगा ।hulaki-rajmarga

रणधीर चौधरी
इन दिनाें सरकार संविधान कार्यान्यवयन के मुद्दों को जोर शोर से उठाने में लगे हैं । उधर एमाले और विपक्ष में रहे दलों द्वारा दिनरात बिगुल फँुका जा रहा है कि इस संविधान मे अब संसोधन की कोई आवश्यकता नही है । खासकर मधेशी मोर्चा के अनुसार तो संसोधन संभव ही नही ।
साथ ही देश में सड़क दुर्घटना में आम नेपालियों की जान जा रही है । २०७३ बैसाख से अब तक ८१६ लोगों की मौत हो चुकी है सड़क दुर्घटना में । उधर संसद में एमाले नेता राधाकृष्ण ज्ञवाली चिल्ला रहे थे कि काठमाण्डु की सड़कों को देख कर उनको शर्म आती है । किसी को कोई मतलव ही नहीं घाटी की सड़कों के प्रति । इससे साफ जाहिर होता है कि न सड़क दुर्घटना रोकने की ओर कोई चिन्तित नहीं है और न ही काठमाण्डु से बाहर अर्थात मोफसल की सड़क की अवस्था को ले कर कोई चिन्तित है, खास कर मधेश के लिए ।
समग्र मधेश में कहा जाय तो सड़क की अवस्था नाजुक ही है । महेन्द्र राजमार्ग को अलग रख दिया जाय तो हम आसानी से कह सकते हंै कि मधेशियाें को इस इक्कीसवीं सदी की सड़क की परिभाषा से सरकार रुबरु नहीं करवा पायी है । हमें चर्चा करनी होगी हुलाकी राजमार्ग की । बचपन से अब तक सुनता आ रहा हूँ कि अब हुलाकी राजमार्ग बन जाएगा और मधेश का काया पलट होगा । मधेश मे व्यापार बढेÞगा । लोगो में रोजगार सृजना होगी । लेकिन आज की तारीख में भी हुलाकी राजमार्ग की अवस्था ज्यों की त्यों है । क्योंकी हुलाकी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना में पाँच प्रतिशत के करीब में अगर कार्य प्रगति हो तो भी सालों की मशक्कत के बाद तो उसे प्रगति कहना प्रगति शब्द को अपमान करना ही होगा ।
ऐसी ही परस्थिति के बीच आजकल जनकपुर–भिठ्ठामोड़ सड़क निर्माण की चर्चा जोर शोर से उठती दिख रही है । काठमाण्डु से नहीं बल्कि स्थानीय लोगाें के द्वारा । युवा अभियन्ता मनोज झा मुक्ति ने तो एक अभियान ही चलाया है, नाम है सुन्दर अभियान । उस अभियान का नारा है– हमें सडक दो न कि किस्तों मे मौत । वैसे ही बृहतर जनकपुर के अध्यक्ष एबं नया शक्ति के नेता रामकुमार शर्मा ने २८ अगस्त को महोत्तरी जिला के सिडिओ को ज्ञापनपत्र देते हुए एक सप्ताह का अल्टिमेटम देते हुए आगाह करबाया और दिए गये समय में अगर सड़क निर्माण का कार्य आगे नही बढ़ा तो सशक्त आन्दोलन करने की चेतावनी भी दी । इतना ही नही, महोत्तरी और धनुषा के हर एक जन के भीतर सब्र का बांध टूट चुका है सड़क की दुर्दशा को ले कर । कैसे अनदेखा हो सकता है कोई इस सच्चाइ से कि अगर बर्दिबास से शुरु हुई चार लेन की सड़क जलेश्वर से भिठ्ठामोड़ तक जोड़ दी जाती है तो मधेशी जनता का जीवनस्तर उपर उठ जाएगा ।
गौरतलब है कि अर्थमंत्री विष्णु पौडेल ने बजट प्रजट प्रस्तुत करते समय कहा था कि तीन–चार साल के भीतर मधेश के १८ जिलों के सदरमुकाम को आधुनिक शहर बनाया जा सकता है । अब यह कार्य प्रचण्ड नेतृत्व के सरकार के कोर्ट में है ।
कहा जाता है कि संविधान वा नियम कानून चाहे जितनी जनमुखी क्यों न हो उसका कार्यान्वयन अगर अच्छे ढंग से नहीं होता है तो वो एक कोरा कागज से अधिक नही हो सकता । जी हाँ मै बात कर रहा हूँ नेपाल के संविधान २०१५ की । जिसके धारा ३० अर्थात मौलिक हक के तहत लिखा गया है कि प्रत्येक जनता को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार होगा । उसी धारा के उपधारा २ और ३ के मुताबिक, वातावरणीय प्रदूषण या ह्रास से होने वाली क्षति बापत पीड़ितो को प्रदूषक से कानुन बमोजिम क्षतिपूर्ती पाने का हक होगा । राष्ट्र के विकास सम्बन्धी कार्यक्रम में वातावरण और विकाश के बीच सन्तुलन के लिये आवश्यक कानुनी व्यवस्था में यह धारा बाधक नही होगी ।
तो ऐसे में सरकार कैसे असंबेदनशील हो सकती है जनता के मौलिक हक की सुरक्षा के प्रति ? अब तक जो देखा गया है काठमाण्डु चरित्र वो अजीब सा है । दशकों से पीछे हुए मधेश और मधेश के विकाश मुद्दों पर कोई आवाज उठाता है तो उनको ये कह कर चुप कराया जाता है कि मधेश की जनता जागरुक नहीं है । वे खुद मधेश का विकास करने के लिए जागरुक नहीं हैं । यही कह कर वहाँ की समस्या को छोड़ दिया जाता है । परंतु आज के दिन में मधेश की जनता जाग चुकी है । हरेक मधेशी युवा सरकार से अपने एक एक कर का हिसाब माँगने से पीछे नहीं दिखाई दे रही ।
सुनने में शायद थोड़ा अलग लगे परंतु सच्चाई यह है कि अगर मधेश के सड़कों का आधुनिकीकरण नहीं किया गया तो मधेशी युवा पीढ़ी का ध्यान अलग थलग होने से कोई नहीं रोक पाएगा । वर्तमान समय में जिसतरह जनकपुर भिठ्ठामोड़ सड़क को लेकर जनता मे आक्रोश है यही आक्रोश कहीं समग्र मधेश मे बिष्फोट का अहम बिंदु ना बन जाय और तब विरोध की एक चिंगारी इस विस्फोट में सहायक सिद्ध हो सकती है । व्

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