व्यवस्थापन सही होनी चाहिए – मनोज कुमार दास

वीरगंज देश का प्रमुख ट्रान्जिट प्वाइन्ट है । काठमांडू से सबसे नजदीक का ट्रान्जिट प्वाइट होने के कारण इस का महत्व भी सबसे ज्यादा ही है, इस को बनाए रखना ही आज हम लोगों के लिए चुनौती है । उसके लिए यहां से प्राप्त होनेवाली सेवा–सुविधा सहज होनी चाहिए, भौतिक संरचना अच्छी होनी चाहिए । विशेषतः यहां जो औद्योगिक माहौल है, वह अच्छा बना रहे, यह हम चाहते हैं । इसके लिए यहां के लोग शिक्षित होने चाहिए, दक्ष म्यानपावर मिलना चाहिए । इस क्षेत्र में गरीबों की संख्या भी अधिक है, उसको कम करना चाहिए ।

Manoj Kumar Das

मनोज कुमार दास

वीरगंज को प्रमुख ट्रान्जिट प्वाइंट तो मानते हैं, लेकिन इसकी सुरक्षा और सहज व्यवस्थापन नहीं हो रहा है । जैसे कि ०७२ साल में ६ महीने तक बंदी हुआ । उस वक्त वीरगंज दो महीना बंद हो गया, क्यों ? उससे हम लोगों को क्या मिला ? हमारे लिए कुछ मिले या नहीं, यह महत्वपूर्ण नहीं है । लेकिन क्यों वह बन्दी हुई ? उस बन्दी के कारण ही आज यहां का व्यापार–व्यवसाय दूसरी जगह में सिफ्ट हो रहा है । इसका जिम्मेदार कौन ? इसमें भी बहस होनी चाहिए ।
आज क्लिंकर समस्या सबसे बड़ी समस्या के रूप में दिखाई दे रही है । रक्सौलवाले बोलते हैं कि यहां उतरने नहीं देंगे । ड्राइपोर्ट और आईसीपी के बीच में जो जगह है, वहां के लोग भी बोलते हैं कि यहां भी उतरने नहीं देंगे । तब तो यहां से जो कारोबार हो रहा है, स्वाभाविक है वह भैरहवा चला जाएगा । निजगढ़ में द्रुतमार्ग बन रहा है, उधर से भी सीमा खुल सकती है । अर्थात् वहाँ से समस्तीपुर तक नाका खुल सकता है । उसके बाद बीरगंज की क्या स्थिति होगी इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है । मधेश आन्दोलन में सबसे अधिक आन्दोलित और नाकाबंदी से पीडि़त वीरगंज को आज राजधानी बनने के काबिल भी नहीं समझा जा रहा है इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है ?

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