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September , 2010
Wednesday
मल्लिका बोल रही हिस्स.
काठमांडू बसन्तपुर क्षेत्र, डाक्टर, इन्जीनियर वकील, व्यवसायी, कलाकार, स्कूल-कालेज के विद्यार्थियों तथा विभिन्न पेशाकर्मियों ...
सर्र्खियों में है दलाई लामा । चीन की वजह से ही हो रहा है ...
मान्यवर, युगों से सुप्रसिद्ध इस आध्यात्मिक प्रागैतिहासिक नगरी जनकपुरधाम में सम्पर्ण् मधेशवादी, मधेश प्रेमी नेपाली ...
देश की राजनीति दिशाहीन होती जा रही है । संविधान निर्माण प्रक्रिया दिशाहीन राजनीति ...
नेपाल और भारत के बीच प्रत्यक्ष सम्बन्ध त्रेता युग के मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और ...
भारत विरोध कब तक खों लोगों के बीच मंच सजा हुआ और उस पर आसीन ...
सिर्फआसन प्रणायाम करनेवाले योगी नहीं, वे सिर्फकथावाचक नहीं, वे सिर्फआचार्य नहीं, वे एक उपदेशक नहीं बल्कि वे ...
काठमाडौ, चैत्र ७ - काँग्रेस सभापति गिरिजाप्रसाद कोइरालाको शनिबार दिउँसो देहवासन भएको छ । ...
वहुत लम्बे समय के बाद नेपाल में संविधान सभा का चुनाव कराया गया है । ...
मानव समुदाय दो प्रकार का होता है- प्रथम सभ्य समाज, दूसरा असभ्य मानव समााज । ...
तपती धरती बदला मौसम और चिन्तित सारा विश्व । वातावरण के बदलते इस स्वरुप में ...
नेपाली राजनीति के तथाकथित तीन बडे स्तम्भ के द्वारार्ई दिनों तक पाँच सितारा होटलों में ...
एक दशक से ज्यादा समय से भारत में 'महिला आरक्षण बिल पास करने के अथक ...
अमेरिका की तरफ से की गयी पहल और मंर्बई हमले के करीब १४ महीने बाद ...
नेपाल में सफेद कारोबार की आड में काला धंधा करने वाले बदनाम लोगों की जान ...
नेपाल में नया“ संविधान जारी होने का निर्धारित तिथि जितनी नजदीक आती जा रही है, ...
पाल की भावी शासकीय संरचना कैसी और किस प्रकार की हो - सभी भाषा-भाषी, जात-जाति ...
कषि तथा सहकारी राज्यमंत्री करीना बेगम ने पर्सर् प्रमुख जिला अधिकारी -सिडिओ) के गाल पर ...
गोरखालैण्ड आन्दोलन पश्चिम बंगाल में लगातार तेज होता जा रहा है । गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ...
भारत सरकार के सहयोग से पर्वांचल के मोरंग स्थित नेमूवा में नवनिर्मित मनमोहन स्मृति पोलिटेक्निक का ...
जंगली जीवन से निकल कर मनुष्य ने अपनी अविवेकपर्ण् स्वच्छन्दता और स्वतन्त्रता पर प्राकृतिक रूप ...
नेपालके अग्रणी औद्यागिक घराना गोल्छार् अर्गनाइजेशन देश के उद्योग व्यवसाय के साथ-साथ समाजसेवा का विविध कार्यक्रम में ...
काठमांडू- राजधानी के त्रिपुरेश्वर स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर हाँल में २४ दिसंबर को 'प्रस्तावित वीरगंज ...
अफ़ग़ानिस्तान में जिरगा ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई के तालेबान से शांति समझौते के प्रयासों का ...
मना का संपादकीय लिखा जा चुका है । मराठी में लिखा गया बाल ठाकरे का ...
नेपाली राजनीति के महानायक गिरिजाप्रसाद कोईराला की मृत्यु के परिणाम स्वरूप राष्ट्र ने एक अनुभवी ...
वह हौवा है या भगवान जो भी है अब उसके सामने चुनौती वह खुद ही ...
मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतांत्रिक की ओर से पर्यटन एवं उड्डयन राज्य मंत्री शत्रुघ्न प्रसाद ...
कनाडा का वेन्क्युवर टोरेन्टो एवं मोनट्रेल के बाद तीसरा सबसे बडा शहर है । वेन्क्युवर ...
वास्तविकता आर्श्चर्य पैदा करती है कि 'संयुक्त राष्ट्रसंघ' जिसे प्रारम्भिक दौर में संयुक्त राष्ट्र या लीग ...
किसी भी राज्य में रहनेवाले व्यक्ति की हैसियत तथा उसके राज्य के साथ का सम्बन्ध ...
तुलसीदास जी एवं उनके द्वारा रचित महान ग्रन्थ रामचरित मानस से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं पर ...
इतिहास में राजनैतिक उद्देश्य की परिपर्र्ति के लिए युद्ध को प्रथम अथवा अंतिम विकल्प के ...

Archive for the ‘रंगतरंग’ Category

रेखा थापा का मजदूर प्रेम

Posted by Himalini On June - 4 - 2010 ADD COMMENTS

rekha thapaमजदूर दिवस के अवसर पर नेपाली फिल्म के मशहूर अभिनेत्री रेखा थापा विराटनगर में मजदूरों के विशाल सभा में उपस्थित होकर माहौल को ग्लैमरस तथा रंगीन बना दिया । काला चश्मा तथा काले परिधान में सजी रेखा मजदूरों की भीड देखकर आर्श्चर्य चकित हो गई । अब तक फिल्मों में दूसरे का स्त्रिmप्ट पढÞकर लम्बें लम्बें डायलाँग बोलने वाली रेखा थापा से जब आयोजकों ने कुछ बोलने का आग्रह किया तो वे मात्र यही बोल सकी कि ‘फिल्मी क्षेत्र में मजदूरी करने के कारण मैं भी आपही की तरह एक मजदूर हूँ और हैप्पी मजदूर दिवस के नारे से साथ मजदूरों में उत्साह भर दिया । रेखा ने मजदूरों से कहा कि मालिक तथा मजदूर दोनों एक ही घर-परिवार के सदस्य हैं अतः दोनों की समस्याओं को भी दोनों को समझना होगा । रेखा थापा के मजदूर प्रेम देखकर जनसभा में उपस्थित मजदूर आह्लादित हो उठे ।

सवसे सेक्सी जीनत

Posted by Himalini On June - 4 - 2010 ADD COMMENTS

zeenat-amanसेक्सी स्लिम तथा ग्लैमरस दिखने के लिए बलिउड के हिरोइनों में होड लगी रहती है । यही कारण हैं कि करीना कपूर ने अपने बाडी को ‘साइज जीरो’ के रूप में ढाला । अपने को सेक्सी के रूप में पहचान बनाने के लिए मल्लिका शेरावत ने मर्डर फिल्म में सेक्सी बनने में कोई कसर नहीं छोडी । इस वर्षएशिया की सेक्सी वुमैन बनी कैट्रीना कैट ने ‘बुम’ फिल्म के माध्यम से बलिउड में सेक्सी इमेज बनाया । लेकिन इन सभी को मात देते हुए ७० दशक के प्रथम सेक्स बम जीनत अमान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उससे बढकर कोई सेक्सी हिरोइन न तो पहले थी न आज है । सत्यं शिवं सुन्दरम की नायिका जीनत ने इर्स्र्टन आई द्वारा फिक्टी सेक्सियल बलिउड स्टार आफ आल टाइम’ के अध्ययन में पुरुष सेल्रि्रेटी सहित ५० सेक्सी के सूची में २९ महिला सेल्रि्रेटी को पछाडकर प्रथम स्थान प्राप्त किया । सेक्सी पुरुष में धर्मेन्द्र तीसरे स्थान पर रहें । जबकि ऋतिक रोशन सातवाँ, विपाशा वशु बारहवाँ, सलमान खान तेरहवाँ शाहरुख खान तीसवाँ और कैट्रीना कैट उन्चालीसवाँ स्थान प्राप्त की ।
पर्ूव मिस इण्डिया जीनत भारत में पश्चिमी फैशन आइकन थी, जिस ने सिनेमा में बिकनी पहनने की शुरूआत की ।
पाकिस्तानी क्रिकेटर के साथ विवाह के पश्चात् जीनत अमान ने फिल्म से संयास ले लिया । दो बेटों की माँ जीनत इस प्रतियोगिता में सेक्स और फैशन का आकर्ष संयोग प्रस्तुत किया ।

ग्लैमरस विक्टोरिया

Posted by Himalini On June - 4 - 2010 ADD COMMENTS

victoriyaपर्ूव पाँप स्टार विक्टोरिया बेकहम इस वर्षकी वर्ल्ड मोस्ट ग्लर्ैमर्स सेलिब्रिटी बनी है । मेकअप ब्रान्ड म्याक्स फैयाक्ट द्वारा किये गये अध्ययन में तीन हजार सहभागी महिलाओं ने विक्टोरिया को चुना है । प्रत्येक दृष्टि से प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण ३६ वषर्य विक्टोरिया सबसे ग्लैमरस बनी है । विक्टोरिया दशकों से दुनिया पर राज करती आ रही है ।
अत्यन्त दुबली-पतली होने पर विश्लेषक आलोचना भी करते रहे हैं उनकी । विक्टोरिया ड्रेस के साथ-साथ अपने मेकअप पर भी विशेष ध्यान देती है । विक्टोरिया ने ड्यानी मिनोग और नायिका एन्जेलिना जोली को पछाडÞ कर यह उपाधि प्राप्त की है ।

मनीषा की घर वापसी

Posted by Himalini On April - 26 - 2010 ADD COMMENTS

Manisha_Koiralaमुर्म्बईया हिन्दी फिल्मी जगत में फिल्म सौदागर से एक नयी प्रतिभावान अभिनेत्री का प्रवेश हुआ, वह थी नेपाल के प्रमुख राजनीतिक परिवार की बेटी मनीषा कोईराला । नेपाल मे लोकतंत्र के प्रणेता वी.पी. कोईराला की नातिन । मनीषा कोईराला को बचपन से ही नृत्य संगीत से लगाव रहा है । आगे चलकर कर वे स्टेज प्रोग्राम मं भी सहभागी होने लगी । उनकी अभिनय प्रतिभा को देखकर उनकी माँ ने उन्हें हिन्दी फिल्मों में कार्य करने हेतु प्रेरित किया । १८ वर्षके उम्र में मनीषा मुर्म्बई पहुँची हिन्दी फिल्मों में अभिनय करने हेतु । उस समय तक वे एकमात्र नेपाली फिल्म में कार्य की थी । वैसे मुर्म्बई में मनीषा को विशेष संर्घष्ा नहीं करना पडा । मुर्म्बई में शेखर कपूर, बोनी कपूर तथा ऋषि कपूर से मिली, सभी ने उन्हें प्रोत्साहित किया । अतः सुभाष र्घइ ने उन्हें अपनी फिल्म सौदागर में भूमिका दिया तब से मनीषा ने पीछे मुडकर नहीं देखा । अपने २० वर्षके हिन्दी फिल्मी कैरियर में उन्होंने अनेक फिल्मों में उत्कृष्ट अभिनय किया जिसमें अग्नि साक्षी बाम्बे, १९४२ लव स्टोरी आदि प्रमुख है । मनीषा को विवाह की भी चर्चा हो रही हैं । सूत्रों के अनुसार, मनीषा का विवाह सिन्धुली निवासी वर्तमान में महाराजगंज में रह रहें जुता व्यवसायी सुरेन्द्र दाहाल के पुत्र सम्राट दाहाल के साथ निश्चित हुआ है । सम्राट वैकल्पिक ऊर्जा संबंधी व्यवसाय में सक्रिय
हैं । विवाह की तिथि असार ५ गते निश्चित की गई है ।
मनीषा कोईराला नेपाली फिल्म धर्मा में अभिनय के सिलसिले में काठमांडू आयी हर्ुइ थी उस दौरान उन्होंने महाकवि देवकोटा जन्म शताब्दी महोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘प्रथम अंतर्रर्ाा्रीय नेपाली भाषा-साहित्य सम्मेलन २०६६’ में सहभागी हर्ुइ तथा तीन लाख रुपयाँ देवकोटा जन्मशताब्दी समारोह के कोष को भी प्रदान किया । उस मौके पर उपस्थित हिमालिनी प्रतिनिधि मनीषा कोईराला से उसके पारिवारिक एवं फिल्मी जीवन पर अंतरंग बातचीत की, जिसका प्रमुख अंश निम्न हैं ।
० नेपाल आने का उद्देश्य –
मातृभूमि से पे्रेम के कारण आती रहती हूँ वैसे मेरे माता-पिता यही रहते हैं अतः उनसे मिलने आती हूँ । अभी मैं नेपाली फिल्म धर्मा में अभिनय करने के उद्देश्य से शुटिंग के दौरान आयी हूँ ।
० नेपाली फिल्म धर्मा मं आपकी भूमिका क्या है –
उसमें मेरा रोल एक हाउस वाइफ का है ।
० अभी आप किन किन हिन्दी फिल्मों में कार्य कर रही है -
अभी मैं दीप्ति नवल के ‘दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश’ और पार्थो घोष के एक सेकेन्ड, जो जिन्दगी की’ शुटिंग करके आयी हूँ ।
० आगे कैसी फिल्मों में कार्य करना चाहती हैं -
चैलेंज वाला नये-नये क्षेत्रों में अभिनय करना चाहती हूँ । विशेषकर मैलीन-मुनरों की तरह भूमिका करना चाहती हूँ ।
देवकोटा जन्मशताब्दी समारोह में सहभागी होकर कैसा महसूस कररही हैं -
काफी अच्छा लग रहा हैं । गम्भीर विषयों पर देश के विद्वानों के वार्ता सुनकर काफी ज्ञान में वृद्धि हर्ुइ ।
० साहित्यिक विषयों पर फिल्मों अधिक क्यों बनती –
फिल्में अधिकतर मनोरंजन की दृष्टि से बनायी जाती है उसी लिए साहित्यिक बौद्धिक सिनेमा अधिक नहीं बन पाती हैं । वैसे बढिया साहित्यिक मौलिक कृतियों पर फिल्में बनें तो अच्छा रहेगा ।
० देश की वर्तमान स्थिति के सम्बंध में आप का विचार –
देश की वर्तमान स्थिति बिल्कूल ठीक नही हैं मैं क्या यहाँकोई भी जनता खुशी नही हैं ।
० कांग्रेस सम्बंन्ध में आपका विचार –
बहुत दुःख होता हैं यह देखकर कि आज कांग्रेस जसे बी.पी. कोईराला ने अपने आदर्शां एवं सिद्धांतां से पाला-पोसा आज उनके पथ पर से हट गई है ।
० आजकल कम फिल्में करनेका कारण -
अब मैं ज्यादा समय आध्यात्म में बिताती हूँ । उपासना करती हूँ । उससे आन्तरिक शांति मिलती हैं ।
० आपका प्रिय नायक नायिका –
राजेश हमाल -नेपाली फिल्म), नसरुद्दीन शाह, ओमपुरी, कमल हासन और रानी मुखर्जी काजोल -हिन्दी फिल्म) ।
० पसंदीदा व्यक्ति –
वी.पी. कोइराला, प्रकाश कोइराला, उन लोगों ने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देश हित के लिए राजनीति की ।
० विशेष इच्छा –
हर वर्षकिसी विशेष साहित्यिक कृति को धनराशि प्रदान करने की इच्छा है । खखख

कामकाजी महिलाओं की दास्तान अपार्टमेंट

Posted by Himalini On April - 26 - 2010 ADD COMMENTS

apartmentमुंबई की पृष्ठभूमि पर बनी अपार्टमेंट शहरों की कामकाजी लड़कियों की दिक्कतों, मुश्किलों, दुविधाओं और आकांक्षाओं की फिल्म है। इस फिल्म में नीतू चंद्रा और तनुश्री दत्ता मुख्य भूमिकाओं में हैं। बवंडर के मशहूर निर्देशक जगमोहन मूंदड़ा ने इसे निर्देशित किया है। प्रेम, विश्वास और छल की यह कहानी छोटे शहरों से सपने लेकर शहर पहुंची लड़की की भी झलक देती है।

मोटी मां बनीं शबाना

Posted by Himalini On April - 26 - 2010 ADD COMMENTS

i00850-1_1272261613गुरिंदर चढ्डा की अंग्रेजी फिल्म इट्स ए वंडरफुल ऑफ्टरलाइफ में शबाना आजमी ने मां का चैलेंजिंग रोल किया है। हिंदी में यह फिल्म हाय मैं मर जावां टाइटिल से रिलीज हो रही है। बातचीत शबाना आजमी से..

इट्स ए वंडरफुल ऑफ्टरलाइफ किस तरह की फिल्म है?

ब्रिटेन में एक वेल नोन जॉनर है इलिंग कॉमेडी। इलिंग कॉमेडी में बेसिकली कॉमेडी होती है, लेकिन उसमें हॉरर का एलीमेंट भी होता है। इस तरह की फिल्म हिंदुस्तान में नहीं देखी गई है। यहां के दर्शक के लिए यह नया जॉनर है, इसीलिए लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि इसे किस तरह की फिल्म कहें? अगर आप अपने दिमाग में डाल लें कि यह फिल्म ब्रांड गुरिदंर चढ्डा है, तो सब कुछ साफ हो जाता है। उन्होंने अपने शौहर के साथ यह फिल्म लिखी है। यह एक ऐसी मोटी मां की कहानी है, जिसकी बहुत मोटी बेटी है। मेरे कैरेक्टर का नाम मिसेज सेठी है। तीस साल की होने वाली बेटी की वह शादी करना चाहती है। रूबी के मोटे होने के कारण जब उसे बार-बार रिजेक्ट किया जाता है, तो मिसेज सेठी सख्त कदम उठाती हैं। मां बेटी के लिए किस हद तक जा सकती है? यही इसकी कहानी है।

फिल्म को स्वीकारने की वजह?

मिसेज सेठी जैसा कैरेक्टर मैंने कभी प्ले नहीं किया था। मुझे समझ में नहीं आया कि यह रोल कैसे करूं? मैंने गुरिंदर से कहा कि आपकी उंगली पकड़ लूंगी। आप जहां ले जाएंगी, मैं चली जाऊंगी, क्योंकि मैं इस जॉनर से वाकिफ नहीं हूं। उन्होंने कहा कि आप चिंता मत करो। मैंने स्क्रिप्ट में पढ़ा था कि मिसेज सेठी के तीन पेट हैं। सबसे पहले मैंने इस कैरेक्टर के लिए अपना पच्चीस पौंड वजन बढ़ाया। मिसेज सेठी को लगता नहीं कि उनकी बेटी मोटी है। वह कहती है कि खाते-पीते घर की है। इस तरह की मां है। इसमें मजाक होने के बावजूद एक रोमांटिक एंगल भी है। इसमें मां और बेटी का बहुत खूबसूरत और रियल रिश्ता है। कह सकते हैं कि यह फिल्म मां-बेटी की प्रेम कहानी है। फिल्म अंग्रेजी में है।

अभी और कौन सी फिल्में आप कर रही हैं? इधर आपकी उम्र के कलाकारों के लिए काम आ रहा है। कुछ साल पहले ऐसा नहीं था?

हिंदुस्तानी सिनेमा का यह बेहतरीन दौर है। यहां हर तरह की फिल्में बन रही हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि हर उम्र के लोगों के लिए फिल्में बन रही हैं। अगर लोग देखें, तो पिछले पांच साल में मुझे जो रोल मिले हैं, वे बेहतरीन रोल हैं।

मॉर्निग रागा, गॉडमदर, तहजीब, दस कहानियां, लॉयन ऑफ पंजाब, सॉरी भाई सब अलग किस्म की फिल्में हैं। लोगों को लगता था कि मैं बहुत गंभीर किस्म की फिल्में करती हूं, लेकिन पिछले कुछ सालों में मैंने हल्की-फुल्की फिल्में भी की हैं।

इंडस्ट्री आप लोगों की जरूरत समझ रही है या ऐसा मार्केट बन गया है?

मुझे लग रहा है कि मार्केट बन गया है। बहुत ज्यादा युवा डायरेक्टर आए हैं, जिनका सोचने का ढंग अलग है। वे जिस जिंदगी को जानते हैं, उस जिंदगी की बात करते हैं। मैं यह नहीं कह रही कि मेन स्ट्रीम में बहुत चेंज आ गया, लेकिन जो आया है, उसका हम खुशी से स्वागत करते हैं।

गुरिंदर के साथ काम करने का अनुभव?

मैंने कई महिला फिल्मकारों के साथ काम किया है। दीपा मेहता, सई परांजपे, अपर्णा सेन, कल्पना लाजमी, विजया मेहता, गुरिंदर चढ्डा आदि। मैंने महसूस किया है कि महिला निर्देशकों का ध्यान डिटेल पर ज्यादा होता है। औरत बाई नेचर डिटेल पर जाती है। मेरे खयाल से कामयाब डायरेक्टर वह है, जिसके अंदर आधा मर्द और आधी औरत हो। मैं अ‌र्द्धनारीश्वर के कॉन्सेप्ट में यकीन करती हूं। महिला होने के नाते औरत डायरेक्टर के साथ कंफर्ट ज्यादा रहता है। गुरिंदर सेट पर हल्का-फुल्का माहौल रखती थीं।

माय नेम इज खान -अजय ब्रहा्रात्मज

Posted by Himalini On March - 25 - 2010 ADD COMMENTS


साधारण किरदारों की विशेष कहानी

करण जौहर ने अपने संरक्षित और सफल घेरे से बाहर निकलने की कोशिश में “माय नेम इज खान” जैसी फिल्म के बारे में सोचा और शाहरुख ने हर कदम पर उनका साथ दिया । इस फिल्म में काजोल का महत्वपर्ण् योगदन है । तीनों के सहयोग से फिल्म मुकम्मल हर्इ है । यह फिल्म हादसों से तबाह हो रही मासूम परिवारों की जिंदगी की मुश्किलों को उजागर करने के साथ मार्मिक सहिष्णुता और मानवता के गुणों को स्थापति करती है । इसके किरदार साधारण हैं, लेकिन फिल्म का अंतर्निहित संदेश बडा और विशेष है ।My_Name_is_Khan
“माय नेम इज खान” मुख्य रूप से रिजवान की यात्रा है । इस यात्रा के विभिन्न मोडों पर उसे मां, भाई, भाभी, मंदिरा, समीर, मामा जेनी और दूसरे किरदार मिलते हैं, जिनके सर्ंर्सग में आने से रिजवान खान के मानवीय गुणों से हम परिचित होते हैं । खुद रिजवान खान धार्मिक प्रदूषण और पर्वाग्रहों से बचा हुआ है । मां ने उसे बचपन में सबक दिया था कि लोग या तो अच्छे होते हैं या बुरे होते है । वह पूरी दुनिया को इसी नजरिए से देखता है । रिजवान की यह सीमा भी है कि वह अच्र्छाई और बुर्राई के कारणों पर गौर नहीं करता । उन्हें समझने की कोशिश नहीं करता । फिल्म के निर्देशक करण जौहर की वैचारिक और राजनीतिक सीमाओं की हद में रहने से रिजवान खान आतंकवाद की ग्लोबल समस्या और मुसलमानों के प्रति बनी धारणा को सिर्फछूता हुआ निकल जाता है । हम इस धारणा के प्रभाव को महसूस करते हैं, लेकिन उत्तेजित और प्रेरित नही होते ।
वैचारिक सीमा और राजनीतिक अपरिपक्वता के बावजूद ‘माय नेम इज खान’ की भावना छूती है । करण जौहर अपने विषय के प्रतिर् इमानदार हैं । सृजन के क्षेत्र में एहसास और विचार हायर नहीं किए जा सकते । लेखक और निर्देशक का आंतरिक जुडाव ही विषय को प्रभावशाली बना पाता है । करण जौहर के पास कलाकारों और तकनीशियानों की सिद्धहस्त टीम है, इसलिए कथा-पटकथा के ढीलेपन के बावजूद फिल्म टच करती है । इस फिल्म में के रविचंद्रन के छायांकन का महत्वपर्ूण्ा योगदान है ।
‘माय नेम इज खान’ के सर्ंदर्भ में शाहरुख खान और काजोल के परफार्मेस की परस्पर समझदारी उल्लेखनीय है । दोनों नाटकीय दृश्यों में एक-दूसरे के पूरक के रूप परफार्म करते हैं और अंतिम प्रभाव बढÞा देते हैं । काजोल का प्रवाहपर्ूण्ा अभिनय किरदार को जटिल नहीं रहने देता । उनके भाव और प्रतिक्रियाओं में आकर्ष सरलता औरु आवेग है । निश्चित ही उनकी आंखें बोलती हैं । शाहरुख खान ने इस फिल्म में अपनी परिचित भंगिमाओं को छोडा है और रिजवान खान की चारित्रीक विशेषताओं को आवाज और अभिनय में उतारा है । कुछ दृश्यों में वे अपनी लोकप्रिय छवि से जूझते दिखाई पडÞते हैं । अभिनय की ऐसी चुनौतियां ही एक्टर के दायरे का विस्तार करती हैं । स्वदेश, चक दे इंडिया के बाद माय नेम इज खान में शाहरुख खान ने कुछ अलग अभिनय किया है । फिल्म का गीत-संगीत कमजोर है । निरंजन आयंगार भावों को शब्दों में नहीं उतार पाए हैं । उनके संवादों में भी यह कमी है ।
हालांकि करण जौहर की माय नेम इज खान भी उनकी अन्य फिल्मों की तरह मुख्य रूप से अमेरिका में शूट हर्ुइ है, लेकिन फिल्म का मर्म हम महसूस कर पाते हैं । अच्छी बात है कि यह फिल्म सिर्फआप्रवासी भारतीयों के द्वंद्व और दंश तक सीमित नहीं रहती । यह अमेरिका में रह रहे विदेशी मूल के नागरिकों की पहचान के संकट से जुडÞती है और मुसलमान के प्रति बनी ग्लोबल धारणा को तोडÞती है । ‘माय नेम इज खान’ और ‘आई एम नाट अ टेररिस्ट’ का संदेश समझ में आती है ।

फिल्म दशगजा

Posted by Himalini On March - 25 - 2010 ADD COMMENTS

film

गोल्डेन आई फिल्म प्रा.लि. द्वारा निर्मित नवल खडका की प्रस्तुति दशगजा फिल्म का लक्ष्य नेपाल-भारत के बीच विद्यमान सीमा समस्या का समाधान कूटनैतिक स्तर पर होना चाहिए, है । इसी सोच के साथ फिल्म निर्माता नवल खडÞका ने दोनों देशां की जनता के बीच में जो स्वाभाविक एकता, सामीप्यता है या दोनों देशों के बीच भाषिक समीपता है, इन सब विषयों पर किसी भी प्रकार से बाधा-व्यवधान तथा अडचन न आ पाए, इसी मूल लक्ष्य के आधार पर दशगजा सिनेमा का फिल्मांकन किया है । नेपाल के विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में संलग्न छोटं-बडंे नेताओं में चेतना बोध कराने का प्रयास इस फिल्म के माध्यम से किया गया है । इस फिल्म में, नेपाल के राजनीतिक वृत्त में जो भी पार्टर्त्तासीन होती है, तब वह नेपाल-भारत के बीच विद्यमान सीमा समस्या सुलझाने का प्रयास नही करती है पर वही पार्टर्ब सत्ताच्युत हो जाती है तो सीमा की समस्या को सिंहिका राक्षासी की तरह विकराल मँुह बाये खड कर देती है अथवा पुनः सीमा सम्बन्धी समस्याओं को उठाकर भोली-भाली नेपाली जनता को भुलाने या अपनी पार्टर् प्रति सस्ती लोकप्रियता प्राप्ति के लिए कडे नारेबाजी करने वाले राजनेताओं के दोहरे चरित्र को विशेष रुप से निशाना बनाया गया है । दोनों देशों को इस फिल्म के माध्यम से यह संकेत भी कराया गया है कि यदि नेपाल-भारत के बीच कोई भी गलत सीमा विवाद, संधि, समझौता है तो उन्हें कूटनैतिक स्तर पर मिलजुल का समाधान करने का प्रयास करना चाहिए । इस फिल्म का उद्देश्य अच्छा है । सभी पात्रों का अभिनय भी अच्छा है, खलनायक राज कुमार साह की भूमिका सराहनीय है ।

दीपिका ने उड़ाई रणबीर की नींद

Posted by Himalini On March - 22 - 2010 ADD COMMENTS

deepikaदीपिका पादुकोण और विजय माल्या के बेटे सिद्धार्थ के बीच लिंक अप की अफवाहों ने दीपिका के एक्सबॉय फ्रेंड रणबीर कपूरHot Looking Pictures of Ranbir की नींद उड़ा दी है। गौरतलब है कि रणबीर इन दिनों वापस दीपिका का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं।

दीपिका और रणबीर में जब से ब्रेकअप हुआ है दीपिका का नाम फरहान अख्तर और शाहिद कपूरThe chocolate guy Shahid Kapoor’s Pics के साथ जोड़ा गया। हाल ही में आईपीएल मैचेस के दौरान दीपिका रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का समर्थन करते हुए देखी गईं।

आरसीबी टीम के मालिक विजय माल्या हैं। उनके बेटे सिद्धार्थ भी इन मैचों को देखने के लिए दीपिका के साथ मौजूद थे। उन्होंने अपनी टीम की सफलता का श्रेय दीपिका को दिया और ये कहा कि वे उनकी टीम के लिए लकी हैं। इसके बाद से ही दीपिका के साथ सिद्धार्थ का नाम जोड़ा जाने लगा।

इस तरह की खबरों ने लगता है कि रणबीर को परेशान कर दिया। पिछले दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने दीपिका का पक्ष लेते हुए कहा कि दीपिका एक अच्‍छी लड़की हैं और उनका नाम हर किसी से जोड़ा जाना गलत है।

रणबीर इन दिनों दीपिका को मनाने में जुटे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने पिछले दिनों दीपिका को कई एसएमएस किए।

भारतीय फिल्म निर्माता प्रकाश झा

Posted by Himalini On January - 9 - 2010 ADD COMMENTS

Prakash_Jha_Rajneetiभारतीय फिल्म निर्माता प्रकाश झा की कहानी किसी भी फिल्म से कम नहीं है । भारतीय राज्य बिहार के चम्पारण में जन्मे प्रकाश झा वर्त्तमान समय में एक सफल फिल्म निर्मात्ता के रुप में भारतीय फिल्म जगत में अपनी सफलता का परचम लहरा रहे हैं ।
पेंटर बनने का सपना देखने वाले प्रकाश झा को ‘धर्मा’ की शूटिंग ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया । इसके लिए उन्होने एफ. टी. आई. आई -पूणा) की राह ली । फिल्म ‘हिप हिप हर्र्रर्से बतौर निर्देशक के तौर पर करियर की शुरुआत करने वाले प्रकाश झा ने ‘दामुल’, ‘मृत्यु दण्ड’, ‘गंगाजल’ एवं ‘अपहरण’ जैसी फिल्में बनाकर दर्शकों की ही नहीं बल्कि समीक्षकों एवं आलोचकों की भी प्रशंसा बटोरी । इन दिनो अपनी भव्य मल्टी स्टार महत्वाकांक्षी फिल्म ‘राजनीति’ को लेकर प्रकाश झा चर्चा में हैं ।

एक सवाल के जबाव में वे कहते हैं मैं एक सामाजिक प्राणी हूँ, राजनीति से प्रेम करता हूँ । मुझे लगता है भारत के अलावा दुनिया में जितने भी देश हैं और वहाँ लोकतन्त्र है, राजनीति आम इंसान से लेकर खास तक सभी को प्रभावित करती आयी है । इसलिए मुझे लगा कि इसे समझना और इस पर बात करना जरुरी है । यही वजह है कि मैं ‘राजनीति’ जैसे विषय पर फिल्म बनाने को प्रेरित हुआ । लोग समझते हैं कि मैं सक्रिय राजनीति में हूँ और दो बार लोकसभा का चुनाव भी लड चुका हूँ तो इसलिए मैने ‘राजनीति’ फिल्म बनाने की बात सोची है, मगर ऐसी बात नहीं है । राजनीति में आने से पहले मै राजनीति के विभिन्न पहलुओं को समझता-देखता आया हूँ और यह बता दूँ कि मैं पहले फिल्मकार हूँ । राजनीति अलग पहलू है ।
फिल्म ‘राजनीति’ के विभिन्न किरदारों में आपको अनगिनत शेड्स देखने को मिलेंगे । साथ ही इस फिल्म का किसी भी जीवित या मृत राजनेता से कोई संबंध नहीं है । कई लोग कैटरिना कैफ के रोल की तुलना सोनिया गाँधी से कर रहे है पर यह सच नहीं है । हाँ, आपको कुछ घटनाएँ, चरित्र व रंग जरुर मिलते-जुलते नजर आयेंगे ।

प्रकाश झा फिल्म निर्माण में आनेवाली चुनौतियों पर कहते हैं यों तो मेरे लिए हर फिल्म बनाना चुनौती होती है मगर ‘राजनीति’ भी काफी चुनौतीपर्ूण्ा रही । यदि इसकी शूटिंग मैं निर्धारित -१०६ दिन) से एक दिन पहले अर्थात १०५ दिनों में कर पाया तो इसका श्रेय मैं अपने तमाम कलाकारों व तकनीशियनों को देना चाहूँगा । साथ ही सहयोग के लिए भोपाल के लोगों की दाद देना चाहंूँगा । मेरे तमाम कलाकारों यथा अजय, रणबीर, मनोज, नसीर जी, अर्जुन रामपाल का मैं शुक्रगुजार हूँ । सभी ने कडी मेहनत की है । अजय ने तो कमाल का काम किया है । जहाँ तक कैटरीना के रोल की बात है तो राजनेता के रोल के लिए शारीरिक हाव-भाव के अलावा सवांद अदायगी को परफैक्ट बनाने में उसने जी जान लगा दी है ।

हाँ, नाना पाटेकर के साथ गलत फहमियों व मिस कम्युनिकेशन के चलते थोडी सी अनबन हो गयी थी । मगर अब सब ठीक है । आप जब एक प्रोजेक्ट पर काम करते हैं तो छोटी-मोटी बातें हो जाना आम बात है । मगर नाना पाटेकर ने अपनी शूटिंग पुरी कर ली और अब किसी तरह की समस्या नहीं है ।

अपनी फिल्म ‘राजनीति’ के बारे में प्रकाश झा कहते हैं इस फिल्म को लेकर मैं काफी उत्साहित हूँ । क्योंकि अपने एनजीओ व युटीवी के कोलावरेसन के तहत हम मई में इसका प्रिमियर विश्व के १०-१२ देशों में करेंगे और उससे प्राप्त फंड से बिहार में एक बडÞा अस्पताल बनायेंगे । इसकी स्टार कास्ट में १०-१२ दिग्गज हैं । मई तक उन सभी ने प्रण लिया है कि वे इसके तमाम प्रिमियरों में भाग लेंगे ।
अपनी नयी फिल्म ‘राजनीति’ को लेकर निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा खासे उत्साहित हैं । चम्पारण के इस लाल ने दुनिया के पैमाने पर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक नयाँ कर्ीर्तिमान स्थापित किया है । चम्पारण समेत सूबे बिहार व फिल्म उद्योग के विकास को लेकर समर्पित प्रकाश झा युवाओं को सीख देते हैं कि उन्हे सफलता प्राप्त करने के लिए पूरे उत्साह के साथ अपने कार्य को अजांम देना चाहिए । प्रत्येक युवा को चाहिए कि वे अपने लक्ष्य को निर्धारित कर काम करें सफलता तो उन्हे अवश्य मिलेगी । बिहार की धरती पर फिल्म उद्योग को स्थापित करने की मंशा पाल रहे श्री झा कहते हैं मेरी यह इच्छा है कि बिहार में फिल्मसिटी बने और उसमें बिहार तथा पडोसी देश नेपाल के नये-प्रतिभावान कलाकारों को काम मिले ।
-फिल्म निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा से वार्ता पर आधारित)

फिल्म अवार्ड समारोह सम्पन्न

Posted by Himalini On January - 9 - 2010 ADD COMMENTS

चलचित्र प्राविधिक संघ द्वारा आयोजित ‘फिल्म अवार्ड’ कार्यक्रम में ‘म तिमी बिना मरिहाल्छु’ फिल्म ने उत्कृष्ट फिल्म सहित विविध क्षेत्रों में नौ अवार्ड जीता । इस फिल्म में र्सवश्रेष्ठ अभिनय के लिए भुवन केसी को उत्कृष्ट अभिनेता तथा झरना थापा को र्सवश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवार्ड दिया गया ।
Rajesh-hamal__r1_c1म तिमी बिना मरिहाल्छु’ फिल्म में पटकथा के लिए विकास आचार्य और ब्रजेश खनाल को, द्वन्द्व निर्देशन के लिए राजेन्द्र खड्गी को, छायांकन के लिए शम्भू सापकोटा को, सम्पादन के लिए बनिश शाह को और गायन के लिए आनन्द कार्की को अवार्ड प्राप्त हुआ है ।

फिल्म ‘मिस्टर मंगल’ को जुरी अवार्ड मिला । र्सवश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड ‘मिस्टर मंगल’ फिल्म के लिए ही किशोर राणा को दिया गया । इसी फिल्म के लिए युगेश रायमाझी को संवाद, दिवस उप्रेती को सह-अभिनेता, शक्ति पाण्डेय को हास्य कलाकार का महाराज थापा को पार्श्व संगीत तथा राकेश लामा को बाल-कलाकार का अवार्ड प्राप्त हुआ । ‘नशिव आप\mनो’ फिल्म के लिए फिल्म लेखक विकास आचार्य को नवनिर्देशक का अवार्ड दिया गया जबकि जीवन लर्ुइंटेल को नव-अभिनेता और फिल्म सन्देश के लिए रेजिना को सह-अभिनेत्री का अवार्ड मिला । सन्देश फिल्म के लिए ही शोभित सिम्खडाल को नव-अभिनेत्री का, सिलसिला फिल्म के लिए वसन्त सापकोटा को संगीत निर्देशक एवं अन्जु पन्त को गायिका का र्सवश्रेष्ठ अवार्ड मिला ।
नृत्य निर्देशन में गोविन्द र्राई को गिरफ्तार फिल्म के लिए तथा सुशील क्षेत्री को ‘विष’ फिल्म में खलनायक का र्सवश्रेष्ठ अवार्ड मिला ।
चरित्र अभिनेत्री का अवार्ड मिथिला शर्मा को फिल्म जय शिव शंकर के लिए दिया गया । कार्यक्रम में महानायक के रूप में सम्मानित हुए राजेश हमाल । राजेश हमाल बाबुराम दाहाल के रचना पर तैयार जीवनी झलकी में प्रस्तुत हुए ।

नेपाली फिल्म और सेन्सर बोर्ड::आर.सी. यादव

Posted by Himalini On January - 9 - 2010 ADD COMMENTS

सिनेमा को एक कमाउ उद्योग के रूप में लिया जाता है । सिनेमा की कमाई से ही आज कई देश सम्पन्न हैं । सिनेमा के विकास के लिए वे देश सिनेमा उद्योग को महत्वपर्ण् योगदान करते आ रहे है । लेकिन नेपाली सिनेमा उद्योग के विकास से नेपाली सेन्सर बोर्ड भी बेखबर लगता है ।

आज नेपाल में एक तरह से देखा जाए तो सिनेमा बनाने बाले और इससे जुडे हुए लोग सन्तुष्ट नहीं लगते हैं । कारण एक ही है कि उनको कोई सहयोग नहीं करता । यदि नेपाली सिनेमा को जाँच-पास करने वाली संस्था सेन्सर बोर्ड की बात करते है तो उसे मालुम होना चाहिए कि सिनेमा की Category क्या होनी चाहिए – आज जो सिनेमा बन रही हैं वे किस वर्ग, कौन से बनभ गु्रप और किस मकसद से बनायी जा रही हैं ।

विश्व बजार में जो सिनेमा बनती है उन सबकी एक ऋबतभनयचथ होती है । जिसे सिनेमा बनाने वाले उन्हें पहले ही सूचित करते हैं । सिनेमा बन जाने के बाद ऋबतभनयचथ के तहत उन्हें र्सर्टिफिकेट भी वे प्रदान करते हैं और जो उपयुक्त दर्शक होते हैं, उन्ही को वह सिनेमा दिखाई जाती है । सेन्सर बोर्ड के झमेलों में उन्हें कभी नहीं खींचा जाता है । लेकिन नेपाली सेन्सर बोर्ड को इस से कोई मतलब ही नहीं है । वे जिसको जैसा चाहे वैसा ही र्सर्टिफिकेट थमा देते है । इससे दोनों को घाटा होता है । दर्शक ऋबतभनयचथ देखते हैं तो सिनेमा बनानेवाले इस से होने वाली कमाई ।
सिनेमा बनाने वाले खास करके सिनेमा के माध्यम से निर्माता लोग दर्शकों को दो तरीकों से सिनेमा के प्रति आकषिर्त करना चाहते हैं । एक विशुद्ध मनोरंजन और दूसरा प्यार और सेक्स के जरिए । लेकिन कभी-कभी दोनों को मिश्रति कर के भी सिनेमा बनाई जाती हंै । जैसे भारतीय सिनेमा उद्योग में सिनेमा को A, B, C Category के तहत र्सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है । लेकिन नेपाली फिल्म में सेन्सर ऐसा कुछ नहीं करता । हालांकि कुछ महिने से सेन्सर बोर्ड ने सिनेमा को ९ब्मगति० ब्। ऋबतभनयचथ का र्सर्टिफिकेट देने का काम किया है । जबकि उसे सिनेमा में ब्मगति टाइप का कोई सीन ही नहीं है । १८ साल से कम उम्रवालों को वर्जित कर के ही कोई सेन्सर वोर्ड Adult का र्सर्टिफिकेट देता है । जिस में देखा जाए तो सेक्स को प्राथमिकता दी जाती है । एक तरीके से देखा जाए तो सेक्स को प्राकृतिक स्वभाविक शारीरिक आवश्यकता भी माना जाता है ।

हम बात कर रहे हैं नेपाली फिल्म की, इनमें से कुछ फिल्मों का नाम भी लिखना चाहूंगा, फैसला, युग देखी युग सम्म और ‘पल पल मा’ इनको Adult का र्सर्टिफिकेट दिया गया है । लेकिन इनमें सेक्स से सम्बन्धित कोई भी खुला दृश्य नहीं है । सिर्फदर्शकों को भ्रम में रखने की कोशिश की गई है । इसमें किसी को ड्रेस के कारण, किसी को उत्तेजक गीत के कारण, तथा किसी को चुम्बन दृश्य को लेकर ऐसा र्सर्टिफिकेट दिया गया है । लेकिन फिल्म कुसुमे रूमाल को कोई छाप नहीं लगाया गया जबकि इस सिनेमा में सेन्सर करनेवाली बहुत से संवाद और दृश्य थे ।

आज चोरी छिपे नेपाल में बहुत सी ब्लू फिल्में बन रही है । इस से समाज और युवा वर्ग दोनों पर नकारात्मक असर पड रहा है । एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों का शिकार भी लोगों को होना पड रहा है । अगर ब्मगति सिनेमा का छाप लग ही रहा है तो हम चाहेंगे कि नेपाली सिनेमा उद्योग में भी ब्मगति सिनेमा बने जो सीमित वर्ग और ब्नभ गु्रप के लिए हो और सकारात्मक संदेश देकर सोंच का विकास करं । मुझे लगता है कि ब्मगति सिनेमा आज के युवा और नेपाली समाज दोनों की आवश्यकता है । अगर ये नहीं है तो अन्य देशों के ब्मगति सिनेमा का नेपाली बजार में कारोबार बन्द करें । साथ हीं नेपाली फिल्म को Adult र्सर्टिर्फिकेट देने पर भी रोक लगे ।
अन्त में हम नेपाली फिल्म को सेन्सर कर रहे सेन्सर बोर्ड और सिनेमा बनाने वाले दोनो से कहना चाहेंगे कि आप आम दर्शकों को भ्रम में न रखे । ब्मगति सिनेमा बनाना ही है तो उस सिनेमा में खुलम खुला दृश्य दें और सेन्सर करना ही है तो अबतभनयचथ देकर निःस्वार्थ मन से सेन्सर बोर्ड सेन्सर करें । जिससे आम दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन हो सके । आनेवाले दिनों में नेपाली फिल्म की categoryअन्य देशों के सिनेमा की तरह ही हो । हम इसकी आशा रखते हैं । जिससे नेपाली फिल्म भी विश्व फिल्म उद्योग में अपनी खास पहचान बना सकें ।

इस बारे में सेन्सर, बोर्ड निर्माता-निर्देशकों के साथ-साथ सिने उद्योग से जुडे सभी संघ-संस्थाओं एवं व्यक्ति द्वारा सामूहिक तथा र्सार्थक प्रयास किया जाना जरूरी है ।

कैटरीना और सोनिया में कोई समानता नहीं

Posted by Himalini On November - 29 - 2009 ADD COMMENTS

img1091129027_1_1राजनीति’ में राजनीतिज्ञ बनी हैं। उनका ‍जो लुक है, उसे देखकर कहा जा रहा है कि उनकी भूमिका सोनिया गाँधी से प्रेरित है। इस तरह की कुछ खबरें भी प्रकाशित हुई हैं।

इस बारे में फिल्म के निर्देशक प्रकाश झा ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस तरह की खबरें आधार‍हीन हैं और कैटरीना तो क्या उनकी फिल्म के किसी भी किरदार का कोई भी नेता से कोई लेना-देना नहीं है।

इस फिल्म में कैटरीना के अलावा रणबीर कपूर, अजय देवगनऋजभअपऔर नाना पाटेकर ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई हैं। कैटरीना की भूमिका ग्लैमर डॉल से हटकर है और वे अपने करियर में पहली बार सशक्त भूमिका निभा रही हैं।

मल्लिका बोल रही हिस्स…

Posted by admin On September - 14 - 2009 ADD COMMENTS

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