विद्यापति त्यौहार के नाम पर::डी.जे. मैथिल
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र्तिक धवल त्रयोदसी से ही मिथिला विभूति महाकवि विद्यापति ठाकुर के संस्मरण में ‘विद्यापति त्यौहार’ पर नेपाल-भारत समेत अन्य राष्ट्रों में भी समारोह आयोजित होती है । हालांकि उनके जन्मतिथि पर विद्वानों में मतभेद है, शायद इसीलिए उनकी देहावसान तिथि ही मनाने की परम्परा रही है । हर साल यह त्यौहार बडे धूमधाम से मनाया जाता है । इस साल भी 31 अक्टुबर और 12नवम्बर अर्थात् कार्तिक 15,16 और 17 गते विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन हुआ । इसमें जनकपुर, दरभंगा और पटना के आयोजनों को देखने का अवसर भी मिला । इसी त्यौहार पर गणतंत्र नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति परमानन्द झा ने भी अपनी मनोभावना और कथा व्यथा जनता के सामने खुलकर व्यक्त किया । नेपाल के सर्वोच्च अदालत के पर्वाग्रही निर्ण्र्को उन्होंने चुनौती भी दिया है । उन्होंने यह भी कहा कि सरकार में इतना दम है तो महाभियोग लगाकर देखें । निर्वाचित उपराष्ट्रपति ‘हिन्दी भाषा में शपथ ग्रहण’ को दलीय स्वार्थ के जाल में फँसकर सर्वोच्च न्यायालय के विश्वसनीयता पर कीचड फेंकने का आरोप भी उन्होंने लगाया ।
विद्यापति राधाकृष्ण युवा समिति जनकपुरधाम द्वारा आयोजित विद्यापति त्यौहार के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने खुलकर अपनी बात जनता के सामने रखा । इसी अवसर पर उनका युवा समिति विद्यापति चौक, जनकपुर बौद्धिक वर्ग समाज द्वारा अभिनन्दन भी किया गया । जनकपुर में उपराष्ट्रपति के स्वागत और अभिनन्दन समारोह में जनमानस को भारी सख्या में उपस्थिति देखकर नेपाल सरकार को घबराहट हो गयी । उपराष्ट्रपति नेपाल राष्ट्र बैंक के गेष्ट हाउस में ठहरे हुये थे । वे पत्रकार सम्मेलन करना चाहते थे पर दर्ुभाग्य पत्रकार सम्मेलन को भी सरकार ने प्रतिबन्ध लगाकर अपनी निरंकुश प्रवृत्ति का उजागर कर दिया । स्मरणीय है, विद्यापति सिर्फकवि ही नही वे र्सवगुण सम्पन्न देवरुपी महामानव थे । गीत संगीत, नाट्य, राजनीति, कूटनीति, धर्म-संस्कृति के प्रकाण्ड विद्वान थे । इनके भक्तिभाव से प्रभावित होकर भगवान महादेव ने भी ‘ऊगना’ नाम के मानव वेश में इनके घर में नौकर बनकर काम किया था । इनके भक्तिभाव से प्रभावित होकर गंगा नदी भी इनके घर के समीप से ही बहने लगी ।
संस्कृत, मैथिली, भोजपुरी, हिन्दी, अंग्रेजी, बंगाली समेत दर्जनों भाषा में इनकी दर्जनों कृतियाँ प्रकाशित और अप्रकाशित है । इन्ही की ‘पुरुष परीक्षा’ नामक पुस्तक पढÞकर राजा शिवासिंह अपना राज्य चलाते थे । एक बार राजा शिवासिंह किसी दूसरे राज्य के शासक द्वारा बन्धक बनाये गये थे तो विद्यापति ने ही अपनी कवित्व शक्ति से उन्हें मुक्त कराया था । महाकवि विद्यापति की अद्भुत प्रतिभा और कृति पर अभी भी अन्तर्रर्ाा्रीय जगत में खोज जारी है । काठमांडू के अभिलेखालय तथा अमेरिका के एक पुस्तकालय में अभी भी उनकी महत्वपर्ूण्ा कृतियाँ विद्यमान है । विद्यापति त्यौहार के पावन अवसर पर विद्यापति सेवा संस्थान दरभंगा और चेतना समिति पटना ने भी समारोह का आयोजन किया था । उक्त दोनों संस्थानों द्वारा दरभंगा स्थित लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय परिसर में त्रिदिवसीय समारोह आयोजन हुआ था । संस्थान के अध्यक्ष पं. चन्द्रनाथ मिश्र अमर की अध्यक्षता तथा महासचिव डाँ. वैद्यनाथ चौधरी ‘वैजू’ के विशेष व्यवस्थापन में कवि गोष्ठी, विचार गोष्ठी और रंगारंग कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । विद्यानाथ झा विनीत की अध्यक्षता में सम्पन्न कवि गोष्ठी में भारत से आर.के. रमण, रामलोचन ठाकुर, डाँ. भीमनाथ झा, चन्दे्रश, प्रा. चन्द्रमोहन झा, जयप्रकाश जनक, अर्जुन कविराज, शैलेन्द्र आनन्द, फूलचन्द्र झा प्रवीण, वुचरु पासवान और नेपाल से डाँ. रेवतीरमण लाल, डी.जे. मैथिल ने कविता वाचन किया ।
इसी तरह चेतना समिति पटना द्वारा भी त्रिदिवसीय समारोह आयोजित किया गया जिसका उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया । कविगोष्ठी और विचारगोष्ठी में नेपाल से आए डाँ. पशुपति नाथ झा और साहित्यकार रामभरोस कापडिÞ भ्रमर की विशेष सहभागिता रही ।

