चेर्न्नई ::दिलों का धडकन बढाने वाला शहर
Print This News
कृतिक संपदा से भरपूर भारत का तमिलनाडु राज्य अपने जादर्इ सौर्न्दर्य से सैलानियों को मुग्ध करने वाला है । यहाँ आकर सैलानियों को सब कुछ देखने को मिलता है यानि दिलों की धडÞकनों को बढाने वाले समुद्र तट, बादलों से मिलने को आतुर पहाडियाँ और उन पहाडियों से गिरते झरने । वन्यजीवों का रोमांच क्या कम है – इसी तमिलनाडु की राजधानी है चेर्न्नई । जिसे दक्षिण का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है । केवल घछण् सालों में ही चेर्न्नई भारत के द्ध प्रमुख महानगरों में से एक के रुप में स्थापित हो गया है ।1693 इस्ट इंडिया कम्पनी के एजेंट डे और एन्ड्रयू ने विजयनगर के राजा से समुद्र के किनारे की कुछ जमीन लेकर कम्पनी के कार्य के लिए एक महल बनाया था । तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनके सपनों का शहर शोहरत के बुलंदियों को छु पायेगा ।
द्दण्ण् वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह शहर बंगाल की खाडी के दक्षिणी तट पर स्थित है और अन्य महानगरों से बिल्कुल अलग प्रतीत होता है । पहले इसे मद्रास के नाम से पुकारा जाता था पर ज्ञढढट में इसका नाम बदलकर चेर्न्नई कर दिया गया । यहाँ दक्षिण भारतीय कला संस्कृति, प्राचीन रीति रिवाजों एवं परम्पराओं के सहज दर्शन होते हैं क्योंकि यहाँ के लोगों का अपनी भाषा और संस्कृति से बहुत गहरा लगाव है । 
कैसे पहुँचे नेपाल से सबसे सुगम मार्ग है गोरखपुर से चेर्न्नई जाने वाली सुपरफास्ट ट्रेन । जिससे घट घंटा में आराम से चेर्न्नई पहुँचा जा सकता है । वैसे सडक मार्ग से भी चेर्न्नई भारत के सभी प्रमुख नगरों से जुडा है । वायुमार्ग से भी जाया जा सकता है ।
चेर्न्नई में खाने-पीने रहने की अच्छी व्यवस्था है । खाने-पीने की सामग्रियों में इडली-डोसा की प्रमुखता रहती है । साथ ही प्रत्येक खाने की थाली में केले का पत्ता बिछाना और नारियल की चटनी परोसना आम प्रचलन है । चेर्न्नई में अनेक दर्शनीय स्थल है जिसका दीदार किया जा सकता है ।
सेंट जार्ज किला सागर तट पर ज्ञटघढ-द्धण् में बना यह किला शहर के जन्म के रुप में भी माना जाता है । यह भव्य किला अंग्रेजों का दक्षिण भारत का मुख्यालय था । इसका नाम इंग्लैण्ड के महशूर संत सेंट जार्ज के नाम पर रखा गया है । यह किला औरंगजेब, मराठों और हैदरअली के अनेकों आक्रमणों को झेलते हुए आज भी शान से खडा है । इस किले में औजार, शस्त्र, सिक्के, कथई बौडल आदि संग्रहीत है । यहाँ सेंट मेरी चर्च भी है जो कि में बनाया गया था ।
मरीना बीच विश्व के दूसरे सबसे लम्बा समुद्र तट मरीना बीच है । बीच के रेतीले तट पर्यटकों को अपनी ओर खींचते है । बीच के साथ बनी पर्व मुख्यमंत्री एम.जी. आर और अन्नादुर्राई की समाधियाँ भी पर्यटकों के लिए आकर्षा का केन्द्र है । यहाँ स्वीमिंग के अलावा घुडसवारी, एक्वेरियम का आनंद लिया जा सकता है ।
इलियट बीजः चेर्न्नई के इस दूसरे खूबसूरत पर्यटन स्थल पर पर्यटक सुकून के कुछ पल गुजार सकते हैं । इसके एक ओर बेलकनी चर्च है और दूसरी ओर आस्थालक्ष्मी मंदिर, जिस की शिल्पकला अनूठी है । यहाँ दक्षिण भारतीय व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है ।
एमजी एम डिजी वर्ल्ड यहाँ कई तरह के राइड्स बडों तथा बच्चों सभी के लिए उपलब्ध रहता है । मैरी लैण्ड में बच्चे अपने पसंदीदा कार्टर्चरित्रों से मिलते हैं ।
एमजी आर फिल्मसिटी तमिलनाडू सरकार द्वारा बनवाई गई फिल्मसिटी थोडÞे ही समय में चेर्न्नई आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षा का केन्द्र बन गई है । यहाँ पर फिल्मों की शुटिंग के अलावा कई स्थायी सेट और खूबसूरत लोकेशन है ।
वल्लुवर कोटरम यह प्रसिद्ध तमिल कवि और संत तिरुवल्लूवर की याद में बना यह स्मारक एक रथ की तरह बनाया गया है जिस का आकार मंदिर की तरह है । घघ मीटर लंबे रथ में संत तिरुवल्लुबर की प्रतिमा स्थापित है । कवि द्वारा रचित ग्रन्थ के ज्ञघघ अध्यायों का चित्रण भी प्रतिमा के नीचे देखने को मिलता है ।
क्रोकोडायल बैंक चेर्न्नई से महाबलीपुरम जाते हुए कोवलांग बीच भी पर्यटकों को भाता है । यहाँ से कुछ आगे क्रोकोडाइल बैंक भी घुमा जा सकता है । यहाँ द्ध हजार क्रोकोडायल को सुरक्षित रखा गया है ।
कपालीश्वर मंदिर यह मंदिर ड वीं शताब्दी में पल्लव वंश के राजाओं द्वारा बनवाया गया था । यह मन्दिर गोपुरम द्रविडÞ वास्तुकला का नायाब नमूना है । इस मन्दिर में कई सुन्दर कलाकृतियाँ है जिसमें टघ न्यानमार संतो की कास्य प्रतिमाएँ देखने योग्य है ।
पैथियोन कांप्लेक्स इस कांप्लेक्स में गवर्नमेंट म्यूजियम, नेशनल आर्ट गैलरी और कनेमारा पुस्तकालय है । यहाँ के संग्रहालय में दक्षिण भारतीय शैली में बनी कास्य प्रतिमाओं का दर्ुलभ संग्रह है । नेशनल आर्ट गैलरी में ज्ञट वीं और ज्ञड वीं शताब्दी की राजस्थानी और मुगल शैली के चित्र आदि देखा जा सकता है ।
बिडला तारामंडल कोटटपुरम स्थित यह तारामंडल देश का सबसे आधुनिक तारामंडल है । यहाँ पर पर्ूण्ातः कंप्यूटरीकृत एक प्रोजेक्ट है जिसके द्वारा एक गोलार्द्ध में बने गुंबद में आकाश का नजारा देखा जा सकता है ।

