8
September , 2010
Wednesday
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किसी भी राज्य में रहनेवाले व्यक्ति की हैसियत तथा उसके राज्य के साथ का सम्बन्ध नागरिकता के अधिकार के आधार पर निर्धारित होता हैं । नागरिकता व्यक्ति की राष्ट्रीय पहचान का माध्यम हैं । किसी भी देश के नागरिक का यह मौलिक अधिकार है, जिसे पाकर ही व्यक्ति कानूनी तौर पर उस देश का नागरिक कहला सकता हैं । नेपाल में नागरिकता का इतिहास देखने से यह स्पष्ट होता है, कि यहाँ नागरिकता का मुद्दा वर्षों से विभेदपर्ण् होने के कारण विवादित रहा है । आने वाले दिनों में यह मुद्दा फिर से विवाद का विषय न बनं, संविधान सभा से आम नेपाली जनता की यही अपेक्षा है । परंतु, संविधानसभा मौलिक हक तथा राज्य निदेशक सिद्धान्त समिति ने गत माह जो नागरिकता सम्बन्धी प्रतिवेदन पेश किया है वह और भी जटिल और विभेदपर्ण् दिखता हैं । मसौदा के ४ -१) की धारा में, उल्लेखित है कि कोई भी नेपाली नागरिक विदेशी से शादी करने पर उस विदेशी पुरुष या महिला को नेपाली नागरिकता प्राप्त करने के लिए कानूनी तौर पर १५ वर्षतक नेपाल का निवासी बनकर रहना होगा । इस प्रावधान को पढकर यह स्पष्ट हो गया है कि आनेवाले दिनों में कोई भी नेपाली नागरिक यदि विदेशी के साथ शादी करं तो, उस विदेशी नागरिक को नेपाली राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए १५ वषां तक की लंबी प्रतीक्षा करनी होगी । इस दरमियान, उस विदेशी महिला या पुरुष को अपने देश की नागरिकता त्यागना होगा । उसके बाद ही वे नेपाल के अंगीकृत नागरिकता प्राप्त करने के अधिकारी हो सकते हैं । नागरिकता सम्बन्धी इस जटिल मसौदा ने आनवाले दिनों में वैवाहिक स्वतंत्रता पर ही पाबंदी लगा दी है । जो मानवीय मौलिक अधिकार के विरुद्ध हैं । जाहिर है कि इस प्रावधान से आने वाले दिनों में आम नेपालियों को विदेशियों से शादी करने के लिए सोचना होगा साथ ही इस से वैवाहिक रिश्तों पर भी प्रभाव पडेगा । एक ओर तो संविधान में वैवाहिक स्वतन्त्रता का उल्लेख होना चाहिए इस बात की वकालत हमारी महिला अधिकारकर्मी, कानूनविद महिलाएँ कर रही हं, परन्तु दूसरी ओर नागरिकता सम्बन्धी इस जटिल प्रावधान को लाने का बहस भी चल रहा है, इससे सबसे ज्यादा मार में महिला हीं रहेगी । अन्तरिम संविधान २०६३ की धारा ८ -६) में उल्लेखित नागरिकता सम्बन्धी प्रावधान में इस बात की जिक्र की गई है कि कोई भी नेपाली महिला विदेशी पुरुष के साथ शादी करे तो वैवाहिक सम्बन्ध के आधार पर विदेशी पुरुष को नेपाली नागरिकता प्राप्त नहीं हो सकती । किन्तु, नेपाली पुरुष अगर विदेशी महिला से शादी करे,rama_sita तो विदेशी महिला को अंगीकृत नागरिकता प्राप्त हो सकती हैं । महिला के सम्बन्ध में उल्लेखित इस विभेदकारी प्रावधान को लेकर महिला अधिकारकर्मी, कानूनविद महिलाएँ तीव्र विरोध करते हुए इस कानूनी व्यवस्था को तत्काल खारिज करने की माँग करती आ रही हैं । नये संविधान में वैवाहिक सम्बन्ध के आधार पर विदेशी पुरुष को भी नेपाली नागरिकता मिलनी चाहिए यही उनकी माँग है । परंतु, अधिकार खोजने की इस भाग दौड में स्वयं महिलाओं का ही अधिकार फिर से खो न जाए । इस के लिए महिलाओं को सजग रहने की आवश्यकता है । संख्यात्मक दृष्टि से देखा जाए तो विदेशी पुरुषों से शादी करने वाली नेपाली महिलाओं की तुलना में कई गुणा ज्यादा पुरुष हैं और कोई महिला जब नेपाल में बहू बनकर आएगी तो कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टि से उसका अपना घर नेपाल होगा किन्तु अपने ही घरों में वह १५ सालों तक राष्ट्रीय पहचान के वगैर रहे यह कैसा कानून – इस मसले पर अगर गौर से विचार किया जाए तो यह प्रावधान पहले की तुलना में और भी अधिक विभेदपर्ण् और संकरीण् दिखता है । इसके साथ ही विवाहित विदेशी महिला के नाम पर न जमीन खरीदी जा सकती है और न तो वह पति की सम्पति पर अधिकार जता सकती हैं । इस तरह तो वह महिला आर्थिक रूप से वर्षों तक कमजोर ही रहेगी । नागरिकता वगैर वह सरकारी नौकरी भी नहीं कर सकती । १५ सालों के बाद जब उसकी सरकारी नौकरी की उम्र ही गुजर जाएगी तो वह नागरिकता उसके लिए कितने मायने रख सकती है – विचारणीय हैंै ।

बहरहाल, यह मसौदा अभी बहस का विषय बना हुआ है । इस मसौदे को लेकर मधेशी सभासद के साथ ही अधिकारकर्मी, कानूनविद महिलाएँ प्रतिवेदन के विरुद्ध में आवाज उठा रहीं हैं । जाहिर है कि इस प्रावधान से आनेवाले दिनों में सबसे ज्यादा मधेशी जनता ही प्रभावित होगी । क्योंकि भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में रहनेवाले तर्राई मधेश की जनता और भारतीयों के बीच सदियों से जो बेटी-रोटी का रिश्ता रहा है, उसपर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पडेÞगा । नेपाल और भारत के बीच कुटनीतिक और राजनीतिक सम्बन्धों की बुनियाद को मजबूत बनाने में वैवाहिक रिश्ता सेतु का काम कर रही है । इस बात को जानकर भी कुछ लोग इस नागरिकता सम्बन्धी प्रावधान का खुलकर र्समर्थन कर रहे हैं । उनका मानना है कि नागरिकता में दी गई ढिलाई के कारण ही २०६३ साल में २५ लाख लोंगो ने इसका नजायज फायदा उठाया । गृह मंत्रालय के अभिलेख के अनुसार करीब पाँच लाख भारतीयों ने इस दरमियान नागरिकता प्राप्त की है । ‘नव नागरिकों’ के आगमन से अभी तर्राई मधेश की जमीन का भाव दुगुणा हो जाना, भारतीय नम्बर प्लेट की गाडियाँ खुलेआम सीमावर्ती क्षेत्रों में दिखाई देना इसका सांकेतिक उदाहरण है । सीमावर्ती भारतीय क्षेत्र से अधिक नेपाल में अवसर सहज होने के कारण नेपाली नागरिकता के प्रति भारतीयों का विशेष आकर्षा रहा है । अतः आने वाले दिनों में नागरिकता प्रमाण पत्र लेने के लिए आधार प्रमाणपत्र जुटाने की अनिवार्य व्यवस्था होनी चाहिए । इसके लिए मधेशवादी दलों के साथ ही मधेश के पुराने निवासियों को भी चिन्तन करना होगा । जाहिर है, सीमा पार से आने वाले अथाह जनसागर का पहला दबाव मधेशियों पर ही पडेगा । यह एक अलग बहस का विषय है, जिस पर आम मधेशियों को विचार करना ही होगा । किन्तु इस वजह से वैवाहिक रिश्तों पर जो कुठराघात किया जा रहा है, वह र्सवथा अनुचित हैं ।

इतिहास साक्षी है नेपाल और भारत के बीच का वैवाहिक रिश्ता सदियों से चला आ रहा हैं । त्रेतायुग में मिथिला नरेश राजषिर् जनक की सुपुत्री जानकी का विवाह अयोध्या नरेश राम से होना इसका ज्वलंत उदाहरण है । इसी तरह नेपाल के लिच्छवीकालीन राजा नरेन्द्र देव के सुपुत्र शिवदेव द्वितीय का विवाह मौखरी राजा भोग वर्मा की सुपुत्री वत्सदेवी के साथ हुआ था । जयदेव द्वितीय के पशुपति अभिलेख इं. सं. ७३३ में जयदेव द्वितीय का विवाह कलिंग आसाम और कौशल के राजा हर्षेव की सुपुत्री के साथ होने की बात का उल्लेख हैं । भारत के सम्राट अशोक ने अपनी सुपुत्री चारुमति का विवाह नेपाल के क्षत्रीय देवपाल के साथ करवा कर दो मुल्कों के बीच वैवाहिक सम्बन्धों को और भी प्रगाढ बनाया था । नेपाल के तर्राई-मधेश में रहनेवाले मधेशी ही नहीं आसाम, दार्जिलिंग, सिक्किम तथा भूटान से भारी संख्या में आए नेपाली भाषियों का वैवाहिक सम्बन्ध भी भारत के साथ रहा है । साथ ही नेपाल के राणा और राज घराना परिवार का वैवाहिक सम्बन्ध भी चलता आ रहा है । किन्तु, संविधान सभा के मौलिक हक तथा राज्यनिदेशक सिद्धान्त समिति में नागरिकता के सम्बन्ध में धारा ४ -१) में जोे प्रावधान रखा गया है, उससे आने वाले दिनों में नेपाल और भारत के बीच वैवाहिक रिश्तों में आँच पहुँचने की पूरी सम्भावना दिखती है । साथ ही इससे भारत और नेपाल के बीच परम्परा से चलती आ रही वैवाहिक रिश्ते की बुनियाद डगमगा न जाए । इस के लिए सचेत रहना होगा ।

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2 Responses

  1. DS MATHUR delhi Says:

    to break relation is very easy but to maintain relation is very tough.nepalease politician should seriously think on this issue.it wl harm nepalease people in future.anyway both writers deserve apreciations.thanks

    Posted on January 18th, 2010 at 4:33 am

  2. MANOHAR JHA Dharan Says:

    manchala jha aur sriman narayan dono ko badhai hai.aapne samay par hi achchha issue uthaya hai.kisi bhi halat me yah pass nahi hona chahie.

    Posted on January 18th, 2010 at 4:36 am

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