कडवा सच
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भारत विरोध कब तक
खों लोगों के बीच मंच सजा हुआ और उस पर आसीन है मधेश के मुक्तिदाता नेतागण । अचानक सभा स्थल के पीछे से एक जूता मंच की ओर फेंका जाता है । उसके साथ ही, आमसभा में आये लोगों के बीच भागदौड मच जाती है । मंच पर बैठे नेता गण भौच्चक है- यह क्या – यह वही मधेश है – क्या यह वही मधेशी जनता है – जिनकी मुक्ति के लिए वे लम्बे-लम्बे भाषण करते नहीं थक रहे हैं । आज यह स्थिति कैसे उत्पन्न हो गयी कि जिस उपेन्द्र यादव को इसी मधेश की जनता अपना सिरमौर बनाये हर्इ थी उसी उपेन्द्र यादव पर जूता फेंका जा रहा है । इस बदली हर्इ परिदृश्य के पीछे मुड कर देखा जाये तो कारण स्पष्ट झलकने लगता है । मधेश की जनता को उपेन्द्र यादव मं यदुवंशी कृष्ण का अवतार की झलक दीख रही थी जिसने मथुरा से द्वारिका जा कर कंस से उत्पीडित जनता को मुक्ति दिलाई थी । उसी प्रकार उपेन्द्र यादव मधेश से काठमांडू जा कर मधेश के असहाय, उत्पीडित-शोषित जनता को उनके दर्भाग्यों से मुक्ति दिलायेंगे । लेकिन उन्हे क्या पता था कि उपेन्द्र यादव भी सिंहदरबार पहुँच कर मधेश की आम जनता के आशाओं एवं विश्वासों पर कुठाराघात कर खस शासकों के उत्तराधिकारी शासकों के दरवार के एक दरबारी मात्र बन कर अपना दिन सँवारने में लग जायेंगे । विदेश भ्रमण के शुभ अवसर को छोडकर मधेश दर्शन भला वे क्यों करे – सत्ता के नशे मं वे ऐसे चूर हो गये कि अपनों को भूल गये । लेकिन उसका नशा तब टूटा जबकि पार्टी टुटकर दो भागों मं बँट गयी । अधिकांश सभासद एवं केन्द्रीय सदस्य जो कि उपेन्द्र यादव में एक बडी सभावनायें देखते थे छोड कर चले गए । तब जाकर उपेन्द्र यादव को होश आयी । तब आयी उन्हें अपने घर -मधेश) की याद । इस दौरान उपेन्द्र यादव ने भारत जो कि नेपाल का सबसे निकट चाहे वह आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक या व्यापारिक क्षेत्रों के साथ सम्बधों को प्रगाढ करने के बजाय उस पर कभी अपने वक्तव्यों तो कभी अपने कृत्यों से
चोट पहुँचानें का भरसक प्रयास किया यह सभी को पता है कि भारत के साथ नेपाल का एक पडोसी का ही नहीं एक बडे भाई, संरक्षक, हितैषी तथा बेटी-रोटी का संबन्ध सदियों से चला आ रहा है और आज भी भारत हर मुसीबत में नेपाल को हर संभव सहायता करने हेतु तत्पर है । उसके बावजूद अपने कम्युनिस्ट माइंड के कारण उपेन्द्र यादव इस हकीकत को भूल कर चीनी नीति ‘फूट डालो राज करो’ की भूल-भुलैया में अटके रहे । उन्होंने जान बूझ कर इस यथार्थ को नकारने की कोशिश की और आज भी उनके वक्तव्यों से भारत के प्रति द्वेष की भावना स्पष्ट उजागर होती है ।
आज फिर उपेन्द्र यादव मधेश की जनता के बीच अपनी मौजूदगी का एहसास कराने के उनके दुःखर्-दर्द तथा समस्याओं से मुक्ति के वायदे कर रहे हैं । इसके लिए अपनी पार्टी तीसरे मधेश जन आन्दोलन का आह्वान भी कर रहें हैं लेकिन इसके साथ-ही-साथ उन्हें यह भी समझना होगा कि वे चीनी नीति को लेकर मधेश में टिक नहीं सकते । उन्हें भारत के साथ मधेशी जनता की भावनाओं का कद्र करना ही होगा । अगर उपेन्द्र यादव को मधेश में एक सही अर्थों में मधेशी जनता के संरक्षक, पालनहार बनना है तो उन्हें अपने कर्म वचन को ऐसा बनना होगा जिससे मधेशी जनता को टूटे विश्वास पुनः जुड सकें । उन्हें जनता अपने आप में आत्मसात कर सके इसके लिए भारत को कोसने या पहाडी शासकों को खरी खोटी सुनाने से नहीं होगा बल्कि उन्हें देखना होगा कि मधेश की जनता का सबसे बडा शुभचिन्तक कौन है – भारत के साथ सम्बध बिगाड कर मधेश का हित नहीं हो सकता । यह बात पूरा देश जानता हैं और उपेन्द्र यादव का भी इस कडवे सच को स्वीकार कर अमल करना होगा । आज इस बात को समझने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है कि मधेश का शुभचितंक कौन है- मीलों दूर चीन या कोसों दूर भारत -


Rakesh Says:
The writer is an agent of Indian Embassy and is trying to defame Madhesi leaders. Indian Embassy and their staffres have always been adverse to Madhesi rights. I hope that Himalini which is a popular magazine of Madhesh does not succumb to undue pressure of Indian Embassy and publish such rubbish..
Upendra Yadav has done too many bad things but one good thing he has done in last 2 yrs is that he has been able to stand up as a swabhimani Madhesi before this inefficient and corrupt Ambassador, Rakesh Sood. Madhesh has changed a lot in last 2 yrs…Na Bharat ki Gulami …na Nepal ki Gulami……Samgra Madhesh, Ek Pradesh
Jay Madhesh
Posted on January 12th, 2010 at 6:58 am
Ramkr Verma Says:
bechara upendra
ab to hos me ajao
Posted on January 15th, 2010 at 7:12 am
pranay kumar Says:
is this article is sponsered by southblock ?
Posted on January 18th, 2010 at 4:18 am
P.C.Yadav Says:
Himalin band karo nahi to ham band karana jante hain. Rakesh sood ab kitana din kam aaega.jald hi hamari sarkar banane jarahi hai.
Posted on January 18th, 2010 at 4:22 am