8
September , 2010
Wednesday
Print This News Print This News

sanjayभौतिक एवं योजना तथा निर्माण राज्य मन्त्री संजय साह आज मधेश के एक कर्मठ एवं उत्साही युवा नेता के रूप मे उभर रहे हैं अदम्य साहस एवं निडरता के कारण अपने क्षेत्र में खास स्थान बनाये हुए हैं । उनकी यह छवि उसी समय से बनने लगी थी जब वे अपने छात्र जीवन मं अपने आस-पास लोगों पर अन्याय अत्याचार होते देखते थे ।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से संजय साह काफी प्रभावित हैं । इस के अध्ययन से उनमें सामाजिक चेतना जागृत हर्इ और उन्हें अहसास होने लगा कि शासक वर्ग की ओर से मधेशियों एवं पहाडियों के बीच काफी विभेद किया जाता है । जो अवसर एवं सुविधा पहाडियों को प्राप्त है या होता है वह मधेशियों को क्यों नहीं, इस जातीय क्षेत्रीय विभेद के विरूद्ध संर्घष् करने की भावना उनमें हिलारे- लेने लगा ।

अपने राजनीति में आने एवं वर्तमान तथा भविष्य में अपने राजनीति क्रियाकलापों को सम्बंध मे संजय साह ने हिमालिनी प्रतिनिधि से बातचीत की । उसी बातचीत का प्रमुख अंश-

प्र.सक्रिय राजनीति में आपका प्रवेश कैसे हुआ -
उ. परिवार के सदस्यों का सद्भावन पार्टर् प्रति झुकाव था, उस कारण से मै भी राजनीति में दिलचस्पी लेने लगा परिणामस्वरूप शाही काल में मधेशी मुक्ति मोर्चा में संलग्नता का आरोप लगा कर पुलिस ने सात दिनों तक मुझे हिरासत में रखकर यातना दी, इस दौरान मेरी पत्नी का प्रथम गर्भपात हो गया इस घटना ने मुझे काफी मार्माहत किया । मै ने राजनीति में सक्रिय होकर कार्य करने का निश्चय कर लिया ।
प्र.मधेशी जनाअिधकार फोरम मे झुकाव कैसे हुआ -
उ.मै किसी पार्टर्वशेष से जुडना नहीं चाहता था लेकिन मधश आन्दोलन के पश्चात फोरम नेताओं के विशेष आग्रह पर संविधान सभा का टिकट मुझे दिया गया और जनता के विश्वास एवं सहयोग के बल पर मैं चुनाव जीत भी गया ।
प्र. देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में मधेश का भविष्य कितना सुरक्षित है -
उ.देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति से मैं पर्ण्तः निराश हूँ । आज जो स्थिति बन रही है उसमंे मधेश का भविष्य कहीं भी उज्ज्वल नहीं दिख रहा है ।
प्र.मधेशवादी दल सत्ता में सहभागी हैं उनके सम्बन्ध में आपका क्या कहना है -
उ.सत्ता में सहभागी दल, विशेष कर मधेश के हित में कार्य करने वाले दलों को सत्ता में सहभागी नहीं होना चाहिए । अधिकार के लिए लडÞने वालों की इससे आवाज एवं माँग दोनों कमजोर पडÞ जाती हैं और यही स्थिति आज मधेशवादी दलों की हो गयी है ।
प्र.मधेशी दलों के भीतर असंतोष का क्या कारण है -
उ.मधेशी दलों के अध्यक्षों का रूप, कार्यप्रणाली राजाओं जैसा है । उनके खिलाफ पार्टर् भीतर तथा बाहर दोनों जगहों पर संर्घष् एवं विरोध करना युवा नेताओं को जरूरी हैं ।
प्र. खस शासकों के विभेद नीति के सम्बंध मंे आपका क्या कहना हैं ।
उ. खस शासकों की विभेद नीति विशेष कर मधेश के प्रति में अभी भी कोई अन्तर नहीं आया हैं । पहाडी मूल के हवलदार भी मधेशी नेताओं को नहीं टेरतं ।
प्र. निर्माणाधीन संविधान के माध्यम से मधेश भी समस्या का समाधान हो सकेगा -
उ. नहीं, बिल्कुल नहीं यह तो मधेशी जनता के आँखो में फिर एक बार धूल झोंकने का प्रयास हैं । मधेशी युवाआं को मधेश मुक्ति के अंतिम लर्डाई के लिए संर्घष् एवं बलिदान करने हेतु पुनः तैयार रहना होगा । यह संविधान धोखा एवं षडयंत्र का पुलिंदा मात्र है ।

You can leave a response, or trackback from your own site.

Leave a Reply




CAPTCHA image

Featured Video

lATEST iSSUE

Copyright © 2008 Himalini.Com All Right Rederved.

Developed by: Web Design Nepal ~ Himalayan Web Information Pvt. Ltd.