8
September , 2010
Wednesday
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नवर्निमाण में छात्र-युवाओं की भूमिका महत्वपर्ण् होती है । इतिहास गवाह है कि युवाओं ने समय-समय पर आंदोलन करके देश व समाज की दशा-दिशा को बदलने का काम किया है ।
भारत में स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद कई छात्र-युवा संगठनों का निर्माण हुआ । लेकिन स्वतन्त्र भारत के अधिकतर छात्र-युवा संगठन या तो किसी राजनीतिक दल के सहयोगी संगठन के रुप में कार्यरत रह कर दल की नीतियों पर चलने लगे या स्थापना के कुछेक वर्षवाद उनका पतन हो गया । लेकिन स्वाधीनता के पश्चात भारत की हजारों वर्षो की गौरवशाली परम्प्राओं को ध्यान में रखकर उसे पुनः आधुनिक, विकसित एवं परिस्थितिजन्य दोषों से मुक्त करने का सपना जब सारा देश देख रहा था उस समय कुछ भारतीय युवाओं ने इन सपनों को साकार करने के लिए देश के महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय परिसरों में गतिविधियाँ प्रारम्भ की । इन्ही गतिविधियों का देशव्यापी खुला मंच ९ जुलाई १९४९ को विधिवत स्थापित हुआ । जिसका नाम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् है ।abvp_rally
छात्रों द्वारा छात्र-युवाओं, देश व समाज के लिए हित के लिए कुछ कर गुजरने हेतु गठित इस छात्र संगठन ने वर्ष२००९ में ६० वर्षपूरे कर लिये हैं । छात्रों द्वारा प्रारम्भ यह सुधारवादी प्रक्रिया रुकी नहीं बल्कि निरतंर जारी रही । हाँ, अनंत बाधाएँ जरुर आयी, समय बदली परन्तु संगठन का कार्य जारी रहा । अभाविप भारत का ऐसा छात्र-युवा संगठन है जिसने ‘वन्दे मातरम’ एवं ‘भारत माता की जय’ के नारे को प्रत्यक्ष सक्रियता में बदल दिया है । जम्मू-कश्मीर से केरल तक तथा पूर्वोत्तर के मणिपुर, अरुणाचल से लेकर गुजरात तक परिषद् अपना पैर जमा चुकी है । देश का ऐसा कोई भी छोटा-बडÞा शहर नहीं है जहाँ अभाविप सक्रिय नहीं है ।
भारत में विभिन्न प्रकार के विचारों से प्रेरित छात्र संगठन काम करते हैं लेकिन अभाविप ही एक मात्र ऐसा छात्र-संगठन है जो सत्ता एवं दलगत राजनीति से अलग रहकर छात्र व समाज के हित में राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर रचनात्मक-संगठनात्मक एवं आंदोलनात्मक काम करता है ।
भारत के पर्ुनर्निमाण के लिए युवकों का आंदोलन हो या शिक्षा में सुधार के लिए आंदोलन परिषद ने सब में बढ चढ कर अपनी भूमिका निभायी
है । आतंकवाद- नक्सलवाद के विरूद्ध आंदोलन, राष्ट्रविरोधी शक्तियों से संर्घष्, पर्यावरण बचाओं आंदोलन, परिसर बचाओ आंदोलन, पश्चिम के अंधानुकरण का विरोध, श्रीनगर में तिरंगे के अपमान के विरोध में हुआ आंदोलन बंगला देशी घूसपैठ के विरुद्ध चलो चिकन नेक आंदोलन एवं समय-समय पर आनेवाली राष्ट्रव्यापी समस्यांओं के समाधान को लेकर संर्घष्ा कर व उन संर्घष् में सफलता प्राप्त कर परिषद् ने यह साबित कर दिया है कि वह राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए सदैव प्रयासरत रहने वाला छात्र संगठन है । इतना ही नही विद्यार्थी परिषद देश के महापुरुषों की जयन्ती पर रक्तदान, स्वच्छता एवं सामाजिक समरसता से जुडÞे कार्यक्रम भी आयोजित करती रही है । परिषद् के छात्रों ने बाढÞ, महामारी एवं भूकम्प के समय भी अपना महत्वपर्ण् सहयोग देकर देशवासियों को अपने राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से अवगत कराया है ।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के ६० वर्षपूरे होने पर संगठन के राष्ट्रीय मंत्री रमाशंकर सिन्हा कहते है कि एक
विकसित भारत के निर्माण का सपना परिषद् ने देखा है जिसे पूरा करने का संकल्प लेकर हम सक्रिय है । संगठन के बिहार प्रान्त के संगठन मंत्री गोपाल शर्मा के अनुसार संगठन का कार्य आज पूरे देश में फैल गया है इसका सबसे बडा कारण समस्याओं के त्वरित सामाधान हेतु परिषद् के छात्रों द्वारा किया जाने वाला सशक्त आंदोलन ही है । वहीं परिषद् के पर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डा. रामनरेश सिंह के शब्दों में ६० वर्षो में विद्यार्थी परिषद् ने जो सफर तय किया है उस साकारात्मक सफर ने आज परिषद् को देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बडा छात्र-संगठन बना दिया है । आज यह संगठन दुनिया भर में विश्व विद्यार्थी युवा संघ ९ध्इक्थ्० के नाम से काम कर रहा है । बिहार प्रान्त के पर्ूव प्रदेश सहमंत्री बसन्तकुमार मिश्रा का मानना है कि अ.भा.वि.प. के ६० साल में सबसे बडी उपलब्धि यह है कि अपनी कार्यशैली से तो परिषद् राष्ट्रव्यापी बन हीं गया, साथ ही भारत का यह पहला छात्र संगठन है जिसमें कभी विभाजन नहीं हुआ । जो परिषद् के लिए गौरव की बात है । इसी संगठन से जुडे शिक्षक नेता प्रो. प्रियारंजन चौबे उर्फगुड्डू चौवे का कहना है कि प्राचीन काल में भारत में जो गुरु-शिष्य परम्प्रा थी उसे विद्यार्थी परिषद् ने वर्तमान समय में जीवंत रखा है । इसी कारण देश के हजारों शिक्षक आज परिषद् से जुडे हैं ।
कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि भारत की आजादी के बाद देश में गौरवशाली सभ्यता-संस्कृति की स्थापना और उस में छात्र-युवा शक्ति की सहभागिता अगर कोई छात्र-युवा संगठन सुनिश्चित करा रहा है तो वह अभाविप हीं हैं इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । तभी तो सन् १९७४ के भारतीय छात्र आंदोलन के महान योद्धा लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने छात्रों का आह्वान करते हुए कहा था कि- ‘सच कहना अगर बगावत है तो समझो हम भी बागी हैं ।’
सन् १९७४ के भारतीय छात्र आंदोलन में अ.भा.वि.प. द्वारा दिया गया नारा ‘जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है, तलवारों की धारों पर इतिहास हमारा बनता है’ आज भी छात्रों-युवाओं में जोश भरने का काम कर रहा है ।
-लेखक विगत कई वर्षों से भारतीय छात्र राजनीति का अध्ययन कर रहे हैं)

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