9
September , 2010
Thursday
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काठमांडू में ४ से ६ दिसम्बर २००९ तक भारतीय राजदूतावास और बी.पी. कोइराला भारत-नेपाल प्रतिष्ठान द्वारा तीन दिवसीय कबीर महोत्सव का आयोजन किया गया । इस कबीर महोत्सव का उद्घाटन भारतीय राजदूत महामहिम राकेश सूद के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ । अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने निर्गुण साधक महान् संत कबीर के जीवनी पर प्रकाश डाला ।

१५ वीं शताब्दी के निर्गुण निराकार मतानुयायी, रहस्यवादी एवं फकीर कवि कबीर के बिचारों में तादात्म्य स्थापित करने का महान अवसर नेपालवासियों को मिला । तादात्म्य स्थापित करने के कुछ दृश्य और श्रव्य साधन थे, श्रृंखलाबद्ध कबीर से संबन्धित फिल्म पर््रदर्शनी, भारत से आये लोक गीत गायकों द्वारा उदात्त एवं जीवंत सांगीतिक प्रस्तुति और विभिन्न विद्वानों द्वारा समूहगत परिचर्चा गोष्ठी प्रमुख रहे । कबीर के साखियों एवं बीजकों पर आधारित फिल्मों की पर््रदर्शनी, भारत से पधारे अतिथि लोक गीत गायकों की जीवन्त प्रस्तुति तथा समूहगत परिचर्चा के माध्यम से दर्शक, श्रोता, वक्ता, टिप्पणीकर्ता और ज्ञानी जिज्ञासु सभी के द्वारा युग परिवर्तनकारी कवि कबीर के उदात्त विचारों में समीक्षात्मक डुबकी लगाने की कोशिश की गई ।
कबीर के बीजक साखी जैसी कविताओं में छिपी वैचारिक क्रांति लाने की शक्ति के
साथ-साथ भारतीय गायक मण्डली द्वारा गाये गये गीतों में दर्शकों एवं श्रोताओं को आनन्दानुभव करने का मौका प्राप्त हुआ । महेश राय और कालूराम बमनिया के दो सांस्कृतिक दलों ने अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए । महेश राम रातभर चलने वाले जागरणों तथा सत्संगों की मौखिक एवं पारम्परिक माध्यमों से कबीर के लोकगीत शैली के प्रतिनिधि गायक हैं तो कालूराम बमनिया देवास, गोरखनाथ, कबीर, मीरा जैसे संत कवियों की कविताएँ सुनाकर लोगों का मन मन्त्रमुग्ध करते हैं । उक्त दोनों सांस्कृतिक दलों की गायन प्रस्तुति को देखने-सुनने वाले दर्शक और श्रोतागण कुछ क्षण के लिए कबीर के निर्गुण निराकार में विलीन हो गए थे ।

फिल्म पर््रदर्शन और सांगीतिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त इस अवसर पर दो समूहगत परिचर्चाएँ भी आयाजित की गई थी ।
परिचर्चा गोष्ठी वाले सत्र में विभिन्न विद्वानों ने अपने-अपने कार्यपत्र
प्रस्तुत किये । कार्यपत्र प्रस्तुत करने वालों में प्रो. अभि सुदेवी, डा. विष्णुराज आत्रेय, डा. अरुण गुप्तो और डा. गंगाप्रसाद अकेला सामिल थे । परिचर्चा गोष्ठी सत्र के अन्त में कबीर शब्द की व्युत्पत्ति, अर्थ, जाति आदि विषय पर टीका टिप्पणी भी की गई । प्रो. अभि सुवेदी ने कबीर और नेपाल के जोसमनी फकीर लोगों के बारे में चर्चा की । अन्त में सुश्री शबनम विरमानी के साथ अर्न्तक्रिया कार्यक्रम सत्र आयोजित किया गया था ।

कबीर महोत्सव के शुभ अवसर पर चार फिल्म दिखाई गई थी । इनमें- हद अनहद ः राम और कबीर के साथ यात्रा, कबीरा खडा बजार में ः पवित्र और धर्म निरपेक्ष कबीर के साथ यात्रा, कोई सुनता है ः कुमार और कबीर के समथ यात्रा एवं चलो हमारा देश ः कबीर और साथियों के साथ । इस दौरान कबीर परियोजना की संयोजक तथा यात्रा के निर्देशक सुश्री शबनम विरमानी भी उपस्थित थीं । कबीर महोत्सव के अवसर पर देशी-विदेशी विद्वानों तथा प्रबुद्धजनों की उपस्थिति उत्साहजनक रही ।

उक्त त्रिदिवसीय कबीर महोत्सव समारोह के सफलतम आयोजन के लिए रात-दिन परिश्रम करनेवाली भारतीय राजदूतावास की प्रथम
सचिव अपर्ूवा श्रीवास्तव का प्रयास काफी सराहनीय रहा । प्रथम सचिव के सहयोगियों के रुप में भारतीय राजदूतावास के अत्तासे डा. शंकर कुमार एवं धीरज बर्मा का योगदान समारोह को सफल बनाने में महत्वपर्ूण्ा रहा ।
इस महोत्सव को लोगों ने खूब सराहा है तथा संचार माध्यमों नें इस महोत्सव को विशेष महत्व देने के साथ ही वृहत्तर स्थान प्रदान किया है ।

कबीर के साथ यात्रा, कबीरा खडा बजार में ः पवित्र और धर्म निरपेक्ष कबीर के साथ यात्रा, कोई सुनता है ः कुमार और कबीर के समथ यात्रा एवं चलो हमारा देश ः कबीर और साथियों के साथ । इस दौरान कबीर परियोजना की संयोजक तथा यात्रा के निर्देशक सुश्री शबनम विरमानी भी उपस्थित थीं । कबीर महोत्सव के अवसर पर देशी-विदेशी विद्वानों तथा प्रबुद्धजनों की उपस्थिति उत्साहजनक रही ।

उक्त त्रिदिवसीय कबीर महोत्सव समारोह के सफलतम आयोजन के लिए रात-दिन परिश्रम करनेवाली भारतीय राजदूतावास की प्रथम सचिव अपर्ूवा श्रीवास्तव का प्रयास काफी सराहनीय रहा । प्रथम सचिव के सहयोगियों के रुप में भारतीय राजदूतावास के अत्तासे डा. शंकर कुमार एवं धीरज बर्मा का योगदान समारोह को सफल बनाने में महत्वपर्ूण्ा रहा ।

इस महोत्सव को लोगों ने खूब सराहा है तथा संचार माध्यमों नें इस महोत्सव को विशेष महत्व देने के साथ ही वृहत्तर स्थान प्रदान किया है ।

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