नेपाली फिल्म और सेन्सर बोर्ड::आर.सी. यादव
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सिनेमा को एक कमाउ उद्योग के रूप में लिया जाता है । सिनेमा की कमाई से ही आज कई देश सम्पन्न हैं । सिनेमा के विकास के लिए वे देश सिनेमा उद्योग को महत्वपर्ण् योगदान करते आ रहे है । लेकिन नेपाली सिनेमा उद्योग के विकास से नेपाली सेन्सर बोर्ड भी बेखबर लगता है ।
आज नेपाल में एक तरह से देखा जाए तो सिनेमा बनाने बाले और इससे जुडे हुए लोग सन्तुष्ट नहीं लगते हैं । कारण एक ही है कि उनको कोई सहयोग नहीं करता । यदि नेपाली सिनेमा को जाँच-पास करने वाली संस्था सेन्सर बोर्ड की बात करते है तो उसे मालुम होना चाहिए कि सिनेमा की Category क्या होनी चाहिए – आज जो सिनेमा बन रही हैं वे किस वर्ग, कौन से बनभ गु्रप और किस मकसद से बनायी जा रही हैं ।
विश्व बजार में जो सिनेमा बनती है उन सबकी एक ऋबतभनयचथ होती है । जिसे सिनेमा बनाने वाले उन्हें पहले ही सूचित करते हैं । सिनेमा बन जाने के बाद ऋबतभनयचथ के तहत उन्हें र्सर्टिफिकेट भी वे प्रदान करते हैं और जो उपयुक्त दर्शक होते हैं, उन्ही को वह सिनेमा दिखाई जाती है । सेन्सर बोर्ड के झमेलों में उन्हें कभी नहीं खींचा जाता है । लेकिन नेपाली सेन्सर बोर्ड को इस से कोई मतलब ही नहीं है । वे जिसको जैसा चाहे वैसा ही र्सर्टिफिकेट थमा देते है । इससे दोनों को घाटा होता है । दर्शक ऋबतभनयचथ देखते हैं तो सिनेमा बनानेवाले इस से होने वाली कमाई ।
सिनेमा बनाने वाले खास करके सिनेमा के माध्यम से निर्माता लोग दर्शकों को दो तरीकों से सिनेमा के प्रति आकषिर्त करना चाहते हैं । एक विशुद्ध मनोरंजन और दूसरा प्यार और सेक्स के जरिए । लेकिन कभी-कभी दोनों को मिश्रति कर के भी सिनेमा बनाई जाती हंै । जैसे भारतीय सिनेमा उद्योग में सिनेमा को A, B, C Category के तहत र्सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है । लेकिन नेपाली फिल्म में सेन्सर ऐसा कुछ नहीं करता । हालांकि कुछ महिने से सेन्सर बोर्ड ने सिनेमा को ९ब्मगति० ब्। ऋबतभनयचथ का र्सर्टिफिकेट देने का काम किया है । जबकि उसे सिनेमा में ब्मगति टाइप का कोई सीन ही नहीं है । १८ साल से कम उम्रवालों को वर्जित कर के ही कोई सेन्सर वोर्ड Adult का र्सर्टिफिकेट देता है । जिस में देखा जाए तो सेक्स को प्राथमिकता दी जाती है । एक तरीके से देखा जाए तो सेक्स को प्राकृतिक स्वभाविक शारीरिक आवश्यकता भी माना जाता है ।
हम बात कर रहे हैं नेपाली फिल्म की, इनमें से कुछ फिल्मों का नाम भी लिखना चाहूंगा, फैसला, युग देखी युग सम्म और ‘पल पल मा’ इनको Adult का र्सर्टिफिकेट दिया गया है । लेकिन इनमें सेक्स से सम्बन्धित कोई भी खुला दृश्य नहीं है । सिर्फदर्शकों को भ्रम में रखने की कोशिश की गई है । इसमें किसी को ड्रेस के कारण, किसी को उत्तेजक गीत के कारण, तथा किसी को चुम्बन दृश्य को लेकर ऐसा र्सर्टिफिकेट दिया गया है । लेकिन फिल्म कुसुमे रूमाल को कोई छाप नहीं लगाया गया जबकि इस सिनेमा में सेन्सर करनेवाली बहुत से संवाद और दृश्य थे ।
आज चोरी छिपे नेपाल में बहुत सी ब्लू फिल्में बन रही है । इस से समाज और युवा वर्ग दोनों पर नकारात्मक असर पड रहा है । एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों का शिकार भी लोगों को होना पड रहा है । अगर ब्मगति सिनेमा का छाप लग ही रहा है तो हम चाहेंगे कि नेपाली सिनेमा उद्योग में भी ब्मगति सिनेमा बने जो सीमित वर्ग और ब्नभ गु्रप के लिए हो और सकारात्मक संदेश देकर सोंच का विकास करं । मुझे लगता है कि ब्मगति सिनेमा आज के युवा और नेपाली समाज दोनों की आवश्यकता है । अगर ये नहीं है तो अन्य देशों के ब्मगति सिनेमा का नेपाली बजार में कारोबार बन्द करें । साथ हीं नेपाली फिल्म को Adult र्सर्टिर्फिकेट देने पर भी रोक लगे ।
अन्त में हम नेपाली फिल्म को सेन्सर कर रहे सेन्सर बोर्ड और सिनेमा बनाने वाले दोनो से कहना चाहेंगे कि आप आम दर्शकों को भ्रम में न रखे । ब्मगति सिनेमा बनाना ही है तो उस सिनेमा में खुलम खुला दृश्य दें और सेन्सर करना ही है तो अबतभनयचथ देकर निःस्वार्थ मन से सेन्सर बोर्ड सेन्सर करें । जिससे आम दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन हो सके । आनेवाले दिनों में नेपाली फिल्म की categoryअन्य देशों के सिनेमा की तरह ही हो । हम इसकी आशा रखते हैं । जिससे नेपाली फिल्म भी विश्व फिल्म उद्योग में अपनी खास पहचान बना सकें ।
इस बारे में सेन्सर, बोर्ड निर्माता-निर्देशकों के साथ-साथ सिने उद्योग से जुडे सभी संघ-संस्थाओं एवं व्यक्ति द्वारा सामूहिक तथा र्सार्थक प्रयास किया जाना जरूरी है ।

