8
September , 2010
Wednesday
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janaki-mandirजनकपुर- धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी के रूप में पूरे संसार में प्रसिद्ध प्राचीन मिथिला की राजधानी जनकपुर को अब तक विश्वस्तरीय पहचान नहीं मिल सकी है । यहाँ का जानकी मन्दिर आकर्ष और विश्व-प्रसिद्ध होते हुए भी विश्व सम्पदा सूची में शामिल नहीं हो सका है जो हैरत की बात है । जबकि काठमांडू उपत्यिका का भक्तपुर दरबार विश्व-संपदा सूची में है । जनकपुर के राजनेता और बुद्धिजीवी अपने भाषण-सम्बोधन में जानकी मन्दिर की चर्चा करते नहीं थकते । वे इसे मिथिला की शान के रूप में प्रस्तुत करते हैं लेकिन जानकी मन्दिर को विश्व सम्पदा सूची में शामिल कराने में अब तक ये राजनेता एवं बुद्धिजीवी असफल ही रहे हैं । अत्यधिक राजस्व देने वाली यह पौराणिक नगरी आज भी उपेक्षित है । जनकपुरधाम ५२ तालाब सहित विभिन्न ऐतिहासिक-धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है । यहाँ का धनुष सागर, गंगा-सागर, विषहरा पोखर, गोड धोई पोखर, दशरथ तालाब, इन्द्र सरोवर, सीता कुण्ड, राम तालाब एवं जनक कुण्ड आदि अतिक्रमण के चपेट में हं । इन सभी तालाबों का नामों-निशान मिटता जा रहा है । लेकिन इन सभी धरोहरों पर किसी की ध्यान नहीं है । जनकपुर के राममन्दिर की हालत भी दिन-प्रतिदिन बिगडती जा रही है । राममन्दिर की छत कभी भी धराशायी हो सकती है । राममन्दिर के महंथ राम गिरि मन्दिर की स्थिति को लेकर काफी चिन्तित हैं । यहा के कर्मचारी सरकार से पैसा तो लेते हैं लेकिन अपने कर्त्तव्यों के प्रति जागरूक नहीं हैं । यहा पचासों वर्षपुरानी नियमावली आज भी लागू है जो अनुचित है । वृहत्तर जनकपुर क्षेत्र परिषद् की तरफ से राममन्दिर को पाँच लाख रूपये कुछ दिन पहले प्राप्त हुआ था लेकिन अब उसका कोई अता-पता नहीं है पूछे जाने पर महंथ राम गिरि कहते है कि मुझे तो कुछ भी मालूम नहीं हैं ।

जनकपुर में रेलवे की भी स्थिति खराब है । हमेशा यहाँ रेल का डिब्बा पटरी से उतर जाता है जिससे यात्रियों में भय बना रहता है । नेपाल सरकार ने जनकपुर रेलवे का नाम तो बदलकर नेपाल रेलवे कम्पनी लिमिटेड कर दिया लेकिन रेलवे में विकास एवं सुधार की चिन्ता सरकार को नहीं है । रेलवे के अध्यक्ष तथा यातायात व्यवस्था कार्यालय जनकपुर के प्रमुख जमुना पंजियार आजकल सिर्फकर्र्सर्ंभालने में व्यस्त हैं । रेलवे की व्यवस्था व विकास के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि हम अकेले क्या-क्या करें – जनकपुर की सडÞक व्यवस्था भी जर्जर है । सडÞकों पर कूडेर्-कर्कट के ढेर लगे हैं । इन सडÞकों पर सवारियों की कौन कहें पैदल चलना मुश्किल है । नगरपालिकाकर्मियों को साफ-सफाई की चिन्ता नहीं है । विकास के नाम पर मौन, जिला विकास समिति भी सरकारी धन के बन्दरबाट में लगी है ।

कुल मिला कर जगत जननी माता सीता की पवित्र जन्मस्थली पौराणिक मिथिला राज्य की राजधानी जनकपुरधाम समस्याओं के मकड जाल में उलझकर रह गयी है । जनकपुर की स्थिति को देखकर यह लगता है कि राम-जानकी स्वयंवर का प्रत्यक्ष गवाह बना यह पौराणिक शहर अब किसी सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं बल्कि भगवान श्रीराम एवं माता जानकी की प्रतिक्षा में है कि कभी न कभी श्रीराम यहाँ पहुँच कर इस पौराणिक नगरी का उद्धार जरूर करेंगे ।

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