खतरनाक रोग:: सिंदीप तिवारी
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और इसके आका भारत से कितने मोर्चों पर एक साथ युद्ध कर सकते हैं इस बात की गंभीरता का अंदाजा उन्हें हो या नहीं हो लेकिन भारत को इसका अंदाजा अवश्य हो जाना चाहिए । भारत को जिन मोर्चों पर पाकिस्तानी हमलों का सामना करना पडÞ रहा है वे थोडÞे बहुत नहीं है बल्कि इनके अधिक है कि इन्हें रोकने में सरकार और इसकी सभी एजेंसियाँ भी असहाय नजर आती हैं ।
इतना ही नहीं, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की करतूतों से कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर असम तक आम भारतवासी प्रभावित है, वह केवल सीधा या छद्म हमला नहीं वरन ऐसी लडर्Þाई है जिनमें से कुछ ने तो आम भारतवासियों की जान ही सांसत में डाल रखी है । देश में जाली नोटों का प्रचलन एक ऐसी ही लडर्Þाई है जिससे हरेक भारतवासी को दो-चार होना पडÞ रहा है ।
इसलिए अगर आम नागरिक के सामने सौ, पाँच सौ या एक हजार रुपए मूल्य का नोट सामने आ जाता है तो उसके माथे पर पसीने के बूँदें नजर आने लग जाती है । उसकी समझ में नहीं आता कि उसके पास जो नोट है, वह असली है भी या नही । स्थिति यहाँ तक पहुँच गई हे कि अब एटीएम और बैंकों से भी जाली नोट निकल रहे हैं ।
देश में जाली नोटों का प्रचलन इतना अधिक हो गया है कि अधिकारी भी मानने लगे हैं कि रिजर्व बैंक, भारत के गृह मन्त्रालय और खुफिया एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद देश में करीब एक लाख टढ हजार करोडÞ की जाली मुद्रा प्रचलन में हैं हालाँकि रिजर्व बैंक ऐसा नही मानता है । फिर भी समस्या का चिंताजनक पहलू यह है कि यह लगातार बढÞती जा रही है । जाली मुद्रा पर गठित नाईक समिति का कहना है कि देश में बडÞी मात्रा में जाली मुद्रा हैं और हम केवल करीब टघ करोडÞ की जाली मुद्रा ही पकडÞ पाते हैं । आम लोगों की हात यह है कि जब वे बैंक कर्मियों, दुकानदारों, व्यापारियों तथा पेट्रोल पम्प पर खडÞे होते हैं तो उन्हें डर सताता रहता है कि कहं िउनके नोट जाली न निकलें । इस डर के मारे लेन-देन में भी परेशानी होने लगी है ।
जाली नोट भी कितने असली दिख सकते हैं इस बात का अंदाजा इसी जानकारी से लगाया जा सकता है कि कुछ महीनें पहले महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच और आतंकवाद रोधी दल के जासूसों ने ढ लाख से अधिक के नकली नोट बरामद किए । वे खुद यह तय नहीं कर पाए कि उन नोटों में से कितने असली और कितने नकली है ।
असली और नकली नोटों में ढछ फीसदी तक समानताएँ होती हैं और जो बहुत कम अंतर होते हैं, उन्हें बैंक कर्मी और अधिकारी तक नहीं भाँप पाते हैं । विभिन्न स्तरों पर जाली नोटों की पहचान करने की कोशिश की जाती रही है लेकिन इनका कागज और छपाई इतनी अच्छी होती है कि खुफिया अधिकारियों के लिए भी इनकी पहचान करना दुष्कर काम हो गया है । जाँच एजेंसियाँ मानती हैं कि इन जाली नोटों की छपाई कराची के मलीर छावनी स्थित सिक्यूरिटी प्रेस, क्वेटा के सरकारी प्रिंटिंग प्रेस और अन्य स्थानों पर होता है । यह भी पता है कि जाली मुद्रा का रैकेट चलाने वाले पाकिस्तान और बांग्लादेश में बैठकर अपने काम को अंजाम देते हैं । वर्षद्दण्ण्ट में बांग्लादेश में भारतीय करंसी मिटिंग मशीन जब्त की गई थी । अब तो सीबीआई भी मानने लगी है कि भारत में करंसी नोट छापने के जो गोपनीय टेम्पलेट इस्तेमाल किए जाते हैं उनकी नकलें भारत के जरिये पाक या बांग्लादेश पहुँच गई हैं । सीबीआई के निदेशक अश्विनी कुमार का कहना है कि वर्षद्दण्ण्छ में नोटों की छपाई के लिए प्रयुक्त टेम्पलेट दुश्मन देशों में पहुँच चुका है और इस बात की संभावना से इनकार नही किया जा सकता है कि हम आज भी उसी टेम्पलेट से नोट छापे जा रहे हैं । यह कहना गलत न होगा कि नोटों के उत्पादन में जो स्याही, कागज और अनिवार्य वस्तुएँ लगती हैं, उनकी नकल या हूबहू काँपी उनके पास मौजूद है । नोट छापने का कागज और स्याही भारत विदेशों से मँगाता है और आईएसआई के आका भी इन चीजों का उन्हीं बिक्रेताओं से खरीदते होंगे ।
आरबीआई, आईबी, डीआरआईर्,र् इडी, सीबीआई, कस्टम्स और अर्धसैनिक बलों के बडÞे अधिकारियों ने ब्रिटेन और यूरोपीय देशों के सामने यह मामला उठाया है । पर इसके साथ ही चिंता की बात यह भी है कि नोटों की छपाई से संबंधित जो सुरक्षा उपाय किए जाते हैं जैसे नोटों का सिरीज कोड, वह भी जाली नोट छापने वालों तक पहुँच जाता है । इसमें संदेह होता हे कि जाली नोट छापने वालों के एजेंट बैंकों के भीतर तक पहुँच गए हैं ।
सीबीआई नकली नोटों का नेशनल डाटा बैंक भी बना रही है ताकि इससे कुछ मदद मिल सके कि नकली नोटों का स्रोत कहाँ है और इन्हें किन क्षेत्रों में प्रसारित किया जाता है । देश में सबसे ज्यादा छण्ण् रुपए मूल्य के नोट नकली पाए गए हैं और इसे देखते हुए सरकार ने इन्हें छापने में लगने वाले विशेष कागज का देश में भी उत्पादन करने का फैसला किया है । मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में स्थित सिक्यूरिटी पेपर मिल को इस तरह का कागज उत्पादित करने की मंजूरी मिल चुकी है ।
समस्या केवल पाँच सौ और एक हजार मूल्य के नोटों की ही नहीं है । द्दण्ण्ट से पर््रवर्तन एजेंसियों ने पाँच सौ के नोटों की तुलना में सौ रुपए मूल्य के जाली नोट ज्यादा पकडÞे हैं । राज्यसभा में प्रश्नोत्तर के दौरान जानकारी दी गई थी कि देश में घज्ञ मई, द्दण्ण्ढ तक पाँच सौ और हजार रुपए मूल्य के इतने नोट पकडÞे गए कि जिनकी कीमत क्रमशः छ।ठट लाख और ज्ञ।ण्ढ लाख रुपए है । इसका एक अर्थ यह भी है कि इनकी तुलना में सौ रुपए मूल्य के कितने नकली नोट चल रहे हैं इसका पता ही नहीं है । आम तौर पर पाँच सौ और हजार के नोटों पर लोगों का ध्यान जाता है जबकि सौ रुपए को लेकर ज्यादा जाँच परख नहीं की जाती है । सरकार ने भी राज्यसभा में माना था कि द्दण्ण्ट से लेकर ण्ढ तक ठ।घद्ध लाख रुपए मूल्य से अधिक के सौ रुपए के नकली नोट कपडÞे गए हैं । वही पर््रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि बैंकिंग चैनलों के जरिये वर्षद्दण्ण्ठ, ण्ड और ण्ढ में क्रमशः ज्ञण्।छद्ध करोडÞ, द्दज्ञ।द्धछ करोडÞ और द्ध।ण्ढ करोडÞ की जाली मुद्रा पकडÞी जा चुकी है । एजेंसियों ने इस मामलों में बडÞी संख्या में लोगों को पकडÞा लेकिन ये सभी नोटों को फैलाने वाले एजेंट ही साबित हुए । इनमें से कोई भी ऐसा नही था जो कि जाली नोटों के इस नेर्टवर्क के बारे में गोपनीय जानकारी दे सके ।
हालाँकि खुफिया अधिकारियों का मानना है कि जाली भारतीय मुद्रा का आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने में भी इस्तेमाल होता है । अभी तक जो जाँच से सामने आया है उसके अनुसार नेपाल में आरिफ बटकी नामक एक आईर्एर्सइ एजेंट है जो कि रक्सौल की सीमा के जरिए बिहार और उप्र में जाली नोटों की सप्लाई कराता है ।
बटकी सीधे आईएसआई के सर्म्पर्क में है और बिहार में पकडÞे गए उसके कुछ एजेंटों का कहना है कि बटकी पचास फीसदी कमीशन पर नकली नोट नेपाल में आईएसआई से हासिल करता है और चालीस फीसदी कमीशन पर अपने नेर्टवर्क से जुडÞे लोगों को बेच देता है । जाँच में यह बात भी सामने आई है कि आम लोगों के लिए कमीशन की दर बीस फीसदी तक हो सकती है । कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के एक बैंक में जाली नोट पाए गए थे जिससे यह बात भी साबित हर्ुइ थी कि इस तरह से जाली नोटों को फैलाने में एक बैंक कर्मी का भी हाथ था जो कि खुद कमीशन के लालच में यह काम करता था । देश में मुख्य रुप से तीन मार्गों से जाली नोटों और ड्रग्स्ा की तस्करी की जाती है । राजस्थान और पंजाब की सीमा से, बंगाल में बांग्लादेश की सीमा से और उप्र और बिहार में नेपाल की सीमा से इनकी तस्करी की जाती है । इस हमारी सुरक्षा व्यवस्था का आलम यह है कि हाल ही में बाघा सीमा से पाकिस्तान से एक गुड्स वैगन भारत आ गया था जिसमें से डायरेक्ट्रेट आँफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस के लोगों ने आठ करोडÞ की हेरोइन बरामद की थी ।
राजस्थान से तस्कर सीमा पार कर पास्कितान चले जाते हैं और वहाँ से करोडÞों रुपए की हेरोइन लेकर भारत आ जाते हैं । बाद में इन्हें पकडÞा भी जाता है लेकिन ज्यादातर मौकों पर ये सुरक्षा बलों, अर्धसैनिक बलों या अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से सीमा पार कर जाते हैं । इसी तरह से जाली नोट भी देश में प्रवेश कर जाते हैं । जाली नोटों को चलाने में स्थानीय लोग भी लालच में शामिल होते हें उन्हें भी नोटों के चलाने पर कमीशन मिलता है । साथ ही इन लोगों को घर बैठे ही नकली नोटों की खेप मिलती है सो पकडÞे जाने का भी डर नहीं ।

