कोइराला बोले तो काङ्रेस::विनय लाल दास कर्ण्र्ाा
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महाभारत में वैसे तो कई पात्र हैलेकिन उसमें एक पात्र ऐसा था जिसने पुत्र मोह के कारण सब कुछ बर्बाद कर दिया । नीति-नियम सिद्धांतों की अवहेलना कर धृतराष्ट्र ने जिस प्रकार अपने पुत्र दुर्योधन को बढÞाया उससे कुरु कुल का नाश हो गया । इतिहास में धृतराष्ट्र को पुत्र मोह का पर्यायवाची शब्द मान लिया गया । उसके सलाहकारों ने उसे इससे बचने के लिए काफी समझाया पर अंधा धृतराष्ट्र नही माना । संयोगवश नेपाली राजनीति के वयोवृद्ध पुरोधा गिरिजा प्रसाद कोईराला अभी अपनी पार्टर्ीीें धृतराष्ट्र की भूमिका में आ चुके हैं । महाभारत की कथा और नेपाली कांग्रेस की कथा में थोडÞा सा र्फक है । वहां पुत्र मोह था तो यहां पुत्री मोह । धृतराष्ट्र पाखंड करते थे वही गिरिजा प्रसाद कोईराला खुलेआम पुत्री के लिए प्रयास करते हैं । उनके कुल -नेपाली कांग्रेस) में इसको लेकर भारी मतभेद है परंतु कोईराला के विशाल वटवृक्ष जैसे व्यक्तित्व के सामने सभी नतमस्तक नजर आते है । नेपाली कांग्रेस वस्तुतः कोईराला परिवार के ही कब्जे में रहा है । एकाध अपवाद हुये परंतु ज्यादा दिन तक इस परिवार के नियंत्रण से पार्टर्ीीूर नही रही । ताजा विवाद की शुरुआत सुजाता कोईराला के भारत भ्रमण में नही जाने से उत्पन्न हुआ । बीमारी की वजह से सुजाता ने प्रधानमंत्री के साथ भारत भ्रमण कार्यक्रम को रद्द कर दिया, पर पर्दे के पीछे की कहानी अलग थी । सुजाता को गिरिजा प्रसाद कोईराला उपप्रधानमंत्री के रुप में भारत भेजना चाह रहे थे । इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री माधव नेपाल पर दबाब बनाया था । माधव नेपाल ने ऐसा करने से इंकार कर दिया और कहा कि जल्दीबाजी में ऐसा करने से लोगों के बीच गलत संदेश जायेगा । इसके बाद ही सुजाता ने बीमारी के बहाने भारत दौरा रद्द कर दिया । सुजाता के इस कदम के बाद नेपाली कांग्रेस पार्टर्ीीें काफी तीव्र प्रतिक्रिया हर्ुइ । सभी वरिष्ठ नेताओं ने सुजाता को सरकार से वापस बुलाने के लिए कह दिया । अर्जुननरसिंह केसी, नरहरि आचार्य, गगन थापा जैसे वरिष्ठ नेता सुजाता को तुरंत सरकार से वापस बुलाने की मांग करने लगे । पार्टर्ीीें सुजाता को लेकर भीषण अर्ंतद्वंद्व शुरु हो गया । सुजाता से उपस्थित होकर सफाई देने के लिए कहा गया तो उन्होंने लिखा-लिखाया जबाव भेज दिया । इसके बाद कांग्रेसी और भडÞक गये । इधर सारे घटनाक्रमों से अविचलित कांग्रेस सभापति गिरिजा प्रसाद कोईराला ने अपने निवास में चाय-पान कार्यक्रम पार्टर्ीीधिकारियों और सभासदों के लिए रखा । चाय-पान कार्यक्रम में लगभग डांटने के अंदाज में सुजाता के बारे में किसी तरह की चर्चा न करने की हिदायत गिरिजा प्रसाद कोईराला ने दी । सभापति की फटकार सुनकर सभी भीगी बिल्ली बन गये । कुछ दिनों के बाद संसदीय दल में उपस्थित होकर सुजाता ने सफाई दी जिसके बाद मामला रफा-दफा हो गया ।
पुत्री को बचाने के लिए स्वयं कोईराला खुलकर सामने आये यह कोई पहला मामला नहीं है । इससे पहले भी कई बार कोईराला सुजाता के लिए सामने आकर लडÞ चुके हैं । संविधान सभा चुनाव में भयंकर पराजय का सामना कर चुकी सुजाता को मंत्री बनाने के लिए गिरिजा प्रसाद कोईराला खुलकर सामने आये थे । सुजाता के नेतृत्व में सरकार में जाने का फैसला भी कोईराला ने ही सुनाया था । उस समय सभापति के इस फैसले का भयंकर विरोध सुशील कोईराला, रामचन्द्र पौडेल आदि ने किया था । सुशील कोईराला ने तो अपने पद से इस्तीफे की भी धमकी दी थी पर सभापति की घुडÞकी पडÞते ही सुशील कोईराला ही नही पार्टर्ीीे सभी असंतुष्ट शांत हो गये । इससे पहले अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री काल में गिरिजा प्रसाद कोईराला ने सुजाता को बिना विभाग का मंत्री बना दिया था । अभी हाल ही में उच्च स्तरीय राजनीतिक संयन्त्र का संयोजक सुजाता को बनाने की बात कहकर राजनीतिक वृत्त में अपने पुत्री मोह को र्सार्वजनिक कर दिया । उच्च स्तरीय राजनीतिक संयन्त्र तीन बडÞे दलों का बनना है । कायदे से इसके संयोजक का पद कोईराला को सबसे बडÞे दल माओवादियों को आँफर करना चाहिए था परंतु उन्होंने ऐसा नही किया । नतीजा कोईराला की मंशा भांप कर सभी प्रमुख दल उच्चस्तरीय संयन्त्र से कन्नी काट रहे हैं ।
दरअसल में कोईराला के नेतृत्व की चुनौती देने वाले व्यक्तित्व का नेपाली कांग्रेस में नितांत अभाव है । उम्र के अंतिम पडÞाव पर पहुंच चुके कोईराला हर हाल में मरने से पहले सुजाता को पार्टर्ीीें स्थापित करना चाहते है । इसके लिए वे किसी नीति-नियम, सिद्धांत आदि का सहारा नही ले रहे है । पार्टर्ीीें उनके विरुद्ध आवाजे तो उठती है परंतु कोईराला के सामने में बोलने का साहस तक किसी में नही है । बाहर गगनचुंबी बयान देने वाले लोग कोईराला के सामने आज्ञापालक की तर्ज पर खडÞे रहते है । नेपाली कांग्रेस के एक नेता के अनुसार उनके सम्मान की वजह उनकी उम्र और व्यक्तित्व भी है । उम्र के इस पडÞाव में पहुंच चुके कोईराला को कोई दुख न हो इसके लिए भी वे लोग चुप रहते है । इसका मतलब यह है कि कोईराला के बाद नेपाली कांग्रेस में भयानक शक्ति संर्घष्ा शुरु होगा । दूसरी पंक्ति में महत्वाकांक्षी नेताओं की भारी फौज है जो अपने-अपने स्वाथोर्ं की पर्ूर्ति के लिए आपस में महाभारत करेंगे । ऐसी स्थिति में पार्टर्ीीा बेडÞा गर्क होना तय है । महाभारत काल में धृतराष्ट्र ने अपने कुल का विनाश अपनी ही जिन्दगी में देखा था परंतु कोईराला शायद खुशनसीब है । पार्टर्ीीें जो भी विवाद या टूट-फूट होगी कम से कम उनके जीवन में नही होगी ।

