कठिन समय का साथी:: भिूपाल सिंह र्राई
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हिमालय की चोटियों से लेकर हिन्द महासागर के विशाल तटों तक सम्पर्ूण्ा भूखण्ड की जीवन धाराएँ एक है भले ही समय की बहती धाराओं से, राजनीतिक उतार-चढÞाव के कारण इन जीवों का राजनीतिक परिचय बदल जायें लेकिन अन्य समानताएँ नहीं बदल सकती । सत्ता के खेल में किसी भी देश की राजनीतिक परिचय बनते-बिगडÞते हैं लेकिन इससे वहाँ निवास करने वाले व्यक्तियों का परिचय बदल नहीं सकता । इस सच की भूमि के आधार पर पनपा है, नेपाल भारत की मैत्री एवं सद्भाव । दोनों ही देशों के जनस्तर पर अपनी गहरी पैठ बनाये हुए मैत्री संबंध किसी राजनीतिक सत्ता का गुलाम नहीं हो सकता । राजनीतिक सत्तायें तो बदलती रहती है लेकिन इसका असर दोनों देशों की जनता के संबंधों पर न पडÞे, दोनों देशों की दोस्ती हमेशा बनी रहे, आगे बढÞती रहे, यही संदेश देते हुए भारत ने हमेशा कठिन समय में नेपाल का हाथ दृढता से थामें रहा है । रामायण-महाभारत काल से चली आ रही यह दोस्ती की नीव भारत के विकास के आधारभूत संरचनाओं के लिए राजमार्ग निर्माण करने की थी । अपने परायों का पहचान संकट के क्षणों में होता है । जिस वक्त नेपाल को समुद्र तक का सफर तय करना कठिन था उस वक्त भारत ने राजमार्ग बनाकर घाटी से निकलने का रास्ता बनाने में सहयोग किया था । आज नेपाल के भौगोलिक निकटता ही नही भाषिक, सांस्कृतिक विविधताएं भी भारत में आसानी से देखी जा सकती है । हिमालय की चोटियों से निकलने वाली जलधारा का समुद्र तक पहुँचते-पहुँचते अनेक नामक बन जाता है उसी प्रकार इन नदियों के किनारे बसने वाली जीवों जनसमुदाय अनेक नामों में विभाजित होते गये है । आज अपने पडÞोसी देशों में जाने के लिए उनके सुख-दुःख में शामिल होने के लिए भीषा-पासपोर्ट का मोहताज होना पडÞता है पर नेपाल-भारत के बीच जो सदियों से मैत्रीपर्ूण्ा संबंध हैं उसमें ऐसी नौबत अभी तक नही आई है ।
जहाँ तक नेपाल को भारत द्वारा किये गये सहयोग की बात है उससे तथ्यांकों में अंकित करना सूरज को दिया दिखाने जैसी बात होगी । मोटे तौर पर कहा जायें तो नेपाल को आधुनिक युग में लाने और अधिक स्वावलम्बी बनाने हेतु भारत ने नेपाल को जो सहयोग एवं सहायता पहुँचायी है या पहुँचा रहा है उसकी कोई सीमा नही है । त्रिभुवन राजपथ, महेन्द्र राजमार्ग, जगह-जगह पुलें, स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, अस्पताल, औद्योगिक क्षेत्रों में प्रचुर सहयोग इतना ही नहीं विद्युत, दूर संचार, कृषि, पशु विज्ञान, मानव विज्ञान आदि क्षेत्रों में भारत का सहयोग नेपाल के लिए ‘मील का पत्थर’ साबित हो रहा है । जिसे विस्मरण करना असंभव है । भारत के राजकुमार श्री रामचन्द्र ने नेपाल की राजकुमारी सीता के साथ वैवाहिक संबंध और भगवान बुद्ध जो कि नेपाल के थे । भारत में बोधिसत्व प्राप्त कर शांति अभियान संचालन से कायम नेपाल-भारत मैत्री के अतिरिक्त हजारों की तादाद में नेपाली जवानों का, आज के विश्वव्यापी बेरोजगारी की समस्या झेलती युवाओं को गोरखा भर्ती के नाम पर भारतीय सशस्त्र सेना में भर्ती कर उन्हें रोजगार मुहैया कराकर उन्हें जो इज्जत एवं सम्मान दिया, साथ ही उससे नेपाल के अर्थतन्त्र के विकास को एक मजबूत आधार प्रदान किया उसका कोई मूल्यांकन नहीं किया जा सकता ।
गोरखा भर्ती का इतिहास दो सौ पचास वर्षपुराना है । बाद में ज्ञढद्धठ को भारत, ब्रिटेन और नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री पद्म शमशेर राणा के बीच हुए त्रिपक्षीय संधि ने इस भर्ती को कानूनी वैधता मिला है । ब्रिटिश साम्राज्य के क्रम में सन् ज्ञडछड से ज्ञढटछ के बीच युद्धों में लडÞने वाले गोरखा सैनिकों में से ज्ञघ सैनिकों ने युद्ध के सर्वोच्च पदक विक्टोरिया क्रास जीत चुके हैं । गोरखा सैनिकों ने बहादुरी की जो मिसाल कायम की है वह काबिले तारीफ है । उन्होंने विश्व रंगमंच में अपने बहादुरी और साहस का पर््रदर्शन कर नेपाल और नेपाली की जो पहचान बनायी, इज्जत बढÞायी है । सन् ज्ञढद्धठ में अंग्रेजों ने भारत छोडÞते समय घ हजार ठ सौ गोरखा लडÞाकू सेना को साथ लेकर ब्रिटेन गये थे, जो अभी घ हजार द्ध सौ में सीमित है । भारत में गांधी जी द्वारा किये जा रहे स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में सहभागी सैकडÞों आम नेपाली ने अपने प्राण की आहुति देकर अपना नाम अमर लोगों में शामिल करवाया । देश के आन्तरिक और बाहरी सुरक्षा में गोरखा सैनिकों का उल्लेखनीय योगदान रहा है । इन्ही योगदानों और उनके साहस पराक्रम और्रर् इमानदारियों का उच्च कदर करते हुए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के पदाधिकारियों ने विभिन्न कल्याणकारी योजना संचालित करके नेपाल के विभिन्न क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा, एम्बुलेन्स और बसें उपहार स्वरुप, शिक्षा सहायता, विद्यालय निर्माण, पीने का पानी और ग्रामीण, सौर्य ऊर्जा विद्युतीकरण आदि सहयोग करते आया है ।
इसी क्रम में सुपेअ कप्तान भूपाल सिंह र्राई की सक्रियता और संरक्षण में नाखोल्याण्ड गाविस ताप्लेजुंग में एक करोडÞ द्दछ लाख के लागत से सौर्य विद्युतीकरण सम्पन्न हुआ है । जहाँ विद्यालय में कम्प्यूटर के लिए पावर की व्यवस्था, स्वास्थ्य चौकी में रेबिज के विरुद्ध वैक्सिन रख रखाव के लिए रेप|mीजेरेटर संचालन जैसी व्यवस्था किया गया है । स्वचालित छ सडÞक, सौर्य बत्ती और द्दद्धढ घरों में ठछ वाट के सौर्य बत्ती की व्यवस्था भारतीय दूतावास के सहयोग से किया गया है । इस तरह नेपाल भारत के मैत्री संबंधों को सशक्त और मजबूत बनाने का काम निरन्तर चलते रहे आज आम नेपाली का हार्दिक इच्छा है ।
लेखक, सु.मे.उ. कप्तान -रिटायर्ड) हैं ।

