मजफो का प्रशिक्षण कार्यक्रम
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कालैया का एवरेस्ट होटल का ‘सभा कक्ष’ लोगों से खचाखच भरा हुआ । लोग उमस भरी गर्मी में भी बडÞी तन्मयता से बैठे हुए आनन्द का अनुभव कर रहे थे – यहाँ किसी योगी बाबा का प्रवचन नहीं चल रहा था । यहाँ चल रहा था मधेशी जनाधिकार फोरम का स्रि्रौणगढ प्रशिक्षण कार्यक्रम और लोगों को पार्टर्ीीे वैचारिक एवं सैद्धान्तिक तथा व्यवहारिक स्तर उठाने हेतु पार्टर्ीीे नीति तथा कार्यक्रम, पार्टर्ीीे कार्यपद्धति, पार्टर्ीीे राष्ट्रीय एवं अन्तर्रर्ाा्रीय दृष्टिकोण के सम्बन्ध में पार्टर्ीीे वरिष्ठ नेतागण तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र यादव जानकारियां दे रहे थे । इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सम्पर्ूण्ा देश को छह भागों में बाँट कर प्रत्येक क्षेत्र में घ दिवसीय कार्यक्रम का आयोजना किया गया था ।
मधेशी जनाधिकार फोरम के दो टुकडÞे में विघटन के पश्चात् अध्यक्ष उपेन्द्र यादव का काठमांडू से मोह भंग हो गया है । अब वे अपना अधिकांश समय तर्राई-मधेश दौरा में ही बिता रहे हैं । देर से ही सही इतनी तो उन्हें समझ आ ही गई है कि जनता ही जनार्दन है अतः उसके शरण में ही रहना बुद्धिमानी है । यही कारण है कि अपनी पार्टर्ीीो टूट-फुट के पश्चात् वे पुनः एक कुशल कारीगर की तरह उसके मरम्मत में जुट गये है । इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पार्टर्ीीो पर्ुनजीवित करने का प्रयास किया जा रहा है । अपने विचारों एवं तर्कों के माध्यम से जनता को विश्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा है कि मधेश की मुक्ति मधेशी जनाधिकार फोरम नेपाल ही दिला सकती है । इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का एक उद्देश्य अपने कार्यकर्ताओं को आगामी आन्दोलन हेतु संगठित एवं आन्दोलन हेतु तैयार करना भी है । फोरम नेताओं द्वारा इन कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टर्ीीे टूटने के कारणों पर प्रकाश डालकर पार्टर्ीीूटने के दर्द को जनता के बीच बाँटकर उसे हल्का करने का प्रयास भी किया जा रहा है । इन कार्यक्रमों में भारी भीडÞ देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि उपेन्द्र यादव के प्रति लोगों में आस्था बरकरार है और जनता बडÞी धर्ैय एवं गंभीरता से उनकी बातों को सुन रही है एवं र्समर्थन कर रही है । इन कार्यक्रमों में पार्टर्ीीे वरिष्ठ नेताओं ने यह स्वीकार किया कि विगत में उनसे कई गलतियाँ हर्ुइ हैं उसी को सुधारने-परिमार्जित करने में लगे हुए हैं वे लोग । साथ ही उन लोगों ने प्रतिबद्धता जाहिर की कि जब तक मधेश को उसका हक एवं अधिकार नही दिलवायेंगे तब तक सत्ता के कर्ुर्सर्ीीौडÞ में शामिल नही होंगे । लेकिन मधेश की जनता उनपर कितना भरोसा करती है यह तो समय ही बतलायेगा वैसे हिन्दी र्समर्थन के प्रश्न पर मधेशी जनता उपेन्द्र यादव के र्समर्थन में आज भी उनके साथ खडÞी दिखी ।


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Posted on September 27th, 2009 at 5:48 pm