Sun. Sep 23rd, 2018

प्रदेश राजधानी बनाया जाए – प्रदीप कुमार केडिया

वीरगंज का समग्र विकास और चुनौती संबंधी विषय में हम लोग बार–बार बहस करते आ रहे हैं । लेकिन अभी तक उसका समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं । फिलहाल राजनीति में विकास की नहीं प्रदेश राजधानी की बात हो रही है । दो नम्बर प्रदेश की राजधानी कहान् बनेगी, इसकी चर्चा हो रही है, हर जिला अपने क्षेत्र में राजधानी मांग रहा है । दो नम्बर में सबसे ज्यादा चर्चा जनकपुर और वीरगंज की हो रही है । इसमें राजनीतिक स्तर में विवाद भी हो रहा है । मुझे तो लगता है कि सरकार के कारण ही यह सब हो रहा है । जनकपुर क्यों होना चाहिए और वीरगंज क्यों नहीं ? अथवा वीरगंज क्यों होना चाहिए और जनकपुर क्यों नहीं ? इसका कोई भी मापदंड नहीं है । दो नम्बर प्रदेश के नेतागण अगर वीरगंज को अनदेखा करके प्रदेश राजधानी तय करते हैं तो इसका परिणाम भयावह भी हो सकता है ।

प्रदीप कुमार केडिया
ऐसी अवस्था में वीरगंज के नेतागण क्यों नहीं बोलते कि हम लोगों को २ नम्बर प्रदेश में नहीं रहना है अर्थात् किसी अन्य प्रदेश से हम लोग रहना चाहते हैं । क्योंकि समग्र दो नम्बर प्रदेश आर्थिक स्रोत–साधन से कमजोर है । लेकिन वीरगंज ही ऐसा शहर है, जहां आर्थिक स्रोत–साधन पर्याप्त है । ऐसी अवस्था में हम लोग क्यों जनकपुर जाए ? यह प्रश्न भी उठ रहा है । आज इस सवाल को हम लोग नहीं उठाएंगे तो वीरंगज के समग्र विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती । मेरे खयाल से हमारे नेता लोग दो नम्बर प्रदेश की राजधानी जनकपुर में ही तय कर चुके है । अगर जनकपुर राजधानी बनती है तो वीरगंज को क्या मिलनेवाला है ? यह बहुत बड़ा प्रश्न है ।
यहां चीनी मिल के पास ८ सौ बीघा जमीन है । उसमें से दो–ढ़ाई सौ बीघा को गार्मेन्टजोन बनाने की बात हो रही है । उसके बाद भी यहां ५ सो बीघा से अधिक जमीन बांकी है । क्यों हम लोग यहां प्रदेश राजधानी के लिए भौतिक संरचना खड़ा नहीं कर सकते हैं ? जनकपुर में जो चुरोट कारखाना है, उसमें प्रदेश सरकार के लिए आवश्यक भौतिक संरचना निर्माण करने की बात हो रही है, अगर वहां बनाते हैं तो पुराने सभी भौतिक संरचना को ध्वस्त करना पड़ेगा । अगर ऐसा ही करना है क्यों हम लोग नयी जगह और नयी भौतिक संरचना के बारे में नहीं सोच सकते हैं ? यह तो आज ही सोचना जरुरी है ।
इसीतरह सूदुर पश्चिम जहां मानव बस्ती कम है, जनघनत्व नहीं है, वहां राज्य यूनिवर्सिटी बनाती है । लेकिन वीरगंज जैसे शहर में नहीं है । उद्योग में काम करने के लिए शिक्षित मजदूर यहां नहीं मिलते हैं । क्यों ? क्योंकि जो शिक्षित हैं, वह विदेश पलायन हो चुके हैं । जो विदेश नहीं गए हैं, वह भी काठमांडू में रहना चाहते हैं । उद्योग संचालन तथा ऑफिस चलाने के लिए यहां दक्ष, योग्य और शिक्षित व्यक्ति नहीं मिलते हैं, लेकिन काठमांडू में ढूँढते हैं तो एक के बदल पाँच मिल जाते हैं । ऐसी अवस्था क्यों हो रही है ? यह सब राज्य की पॉलिसी के कारण हो रही है । इसीलिए वीरगंज को विकसित करना चाहते हैं तो राज्य की पॉलिस भी सही होनी चाहिए ।
विकास के लिए हम लोग कृषि की बात करते हैं, कृषकों के लिए इंडिया में ७५ प्रतिशत ‘सबसिटी’ प्राप्त होती है, लेकिन हमारे यहां १ प्रतिशत भी नहीं । अगर यहां के किसान अपना सम्पूर्ण लागत–कष्ट को जोरकर खेती करते हैं तो वह पूरे घाटा में रहते हैं । जल, मल और बीऊ–विजन किसान को नहीं मिल रहा है । ऐसी अवस्था में हम लोग कैसे व्यवसायिक खेती कर सकते हैं ? मुझे तों लगता है कि खेती करने के बजाय जमीन को खाली ही छोड़ दिया जाए । यही कारण है कि किसान निर्वाहमुखी खेती करने के लिए बाध्य है ।
आज के दिन में किसी भी व्यवसाय के लिए हम लोग बैंक से सौ करोड़ मांगते हैं तो तरलता अभाव को दर्शाते हुए बैंक असमर्थ दिखाई देता है । हमारी हांलत ऐसी है । राष्ट्र बैंक के गवर्नर में राजनीतिक नियुक्त होती है । राष्ट्र बैंक ही नहीं हर जगह महत्वपूर्ण स्थान में योग्य और दक्ष व्यक्तियों की जगह राजनीतिक नियुक्ति दिखाई देती है । जिसके चलते भ्रष्टाचार बढ़ जाता है । जहां भ्रष्टाचार अधिक होता है, वहां विकास सम्भव नहीं । इसीतरह अगर हम लोग कोई उद्योग स्थापना करते हैं तो उद्योग शुरु होने से पहले वहां विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का झण्डा दिखाई देता है, मजदूरों के नाम पर । ऐसी अवस्था में हम लोग उद्योग संचालन करें कि मजदूरों से लड़े ? यह सिर्फ वीरगंज की समस्या नहीं है, पूरे देश की समस्या है ।
इसीतरह जहां नेपाल और भारत की सीमा है, वहां भारत की ओर भी विकास नहीं हो रहा है । सीमा क्षेत्र में हर जगह ऐसी ही हांलत है । जब पड़ोसी देशों में भी वैसी ही हांलत है तो नेपाल में क्या कहें ? हम भारत जा कर नहीं कह सकते हैं, नेपाल सरकार को कहते हैं, लेकिन सरकार सुनती ही नहीं । कुछ दिन पहले माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने कहा कि पर्सा जिला स्थित ठोरी को ३ नम्बर प्रदेश में मिलाया जाएगा । लेकिन मैं तो कहता हूं, सिर्फ ठोरी को नहीं, पूरे पर्सा जिला को ३ नम्बर प्रदेश में मिला दो । जब नीति ही बेइमान हो तो ऐसी अवस्था में हम लोग क्यों २ नम्बर प्रदेश में रहें ? सच तो यह है कि बीरगंज सरकार के सौतेले व्यवहार का शिकार होता आया था और आज भी हो रहा है ।

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