जनकपुर विकास में पीछे होने का क्या कारण हो सकता है?

जनकपुर में प्रत्येक शाम हो रही गंगा आरती एवं सेभ द हिस्टोरीकल के संयोजक रामअशिष यादव जी से किया गया तीन प्रश्न ः—
सामाजिक अभियन्ता से मात्र जनकपुर का विकास सम्भव
जनकपुर विकास में पीछे होने का क्या कारण हो सकता है ?
जनकपुर का विकास नहीं होने के दो कारण हैं । पहला कारण राज्य की विभेद नीति और दूसरा इमानदारी की कमी । राज्य ने अभी तक जनकपुर में धार्मिक पर्यटकीय दृष्टि से विकास के लिए निवेश ही नहीं किया है, बल्कि यहाँ से वार्षिक अरबाें रुपया राजस्व के नाम पर लिया जरुर है । दूसरा यहाँ के मठ मन्दिर के महन्थ, राजनीतिक दल में भी इमान्दारी की कमी देखी गयी है । जहाँ पर राज्य के द्वारा विभेद हो वहाँ पर बोलने से अधिकार नहीं मिलता है, छीनना पड़ता है , यह हिम्मत दिखाने में चूक हुआ है । यहाँ के मन्दिर के मठाधीश के कारण भी

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रामअशिष यादव

जनकपुर कुुरूप और अस्तित्व विहीन बनता गया है । उधर राज्य ने भी केवल यहाँ से वसूली मात्र किया है । राजस्व का एक प्रतिशत आमदनी मात्र खर्च कर दिया जाए तो स्वर्ग बन सकता है ।
आप ने भी स्वच्छ जनकपुर सुन्दर जनकपुर बनाने का संकल्प लिया है ? कहाँ और कैसी कैसी बाधा का सामना करना पड़ा है ?
देखिए, कार्य करने वाले को ही बाधा और समस्या आती है । इससे जो व्यक्ति विचलित हो जाएगा वह कभी कार्य कर ही नही पाएगा । हमने इसी समाज के बल पर जनकपुर में परिवर्तन लाने का संकल्प लिया है । इसमें सभी का सहयोग है और रहेगा मुझे विश्वास है । समाज का अगुवाई करने वाला स्वच्छ और ईमानदार व्यक्ति सामाजिक अभियन्ता बनकर आगे आएगा तो जनकपुर का विकास असम्भव नहीं है । मैंने ‘स्वच्छ जनकपुर, हरियो जनकपुर और सुन्दर जनकपुर’ बनाने का संकल्प लिया है और यह अभियान स्थानीयवासी के ही बलबूते चलता आ रहा है । उसी प्रकार दो वर्षो से यहाँ पर गंगा आरती चल रही है । राज्य का कोई निकाय आर्थिक सहयोग नही किया है । फिर भी आज नेपाल के कोने—कोने में फैल चुका है । उसी प्रकार समाजसेवी पवन सिंघानिया ने भी स्वर्गद्वारा एक्कल प्रयास से बनाया है । अगर समाजिक अभियन्ता आगे आएँगे तो तुलसीकृत रामायण में उल्लेख अनुसार जनकपुर को आर्दश, सभ्य और धार्मिक स्थल बनाया जा सकता है ।
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए क्या करना होगा ?
ऐसा काम जिससे यहाँ की संस्कृति झलके इसी का खयाल कर के यहाँ विकास किया जाना चाहिए । राजा जनक, भगवती सीता, विद्वान अष्टावक्र की जन्मभूमि तथा देवलोक की तपोभूमि है जनकपुर । साँस्कृतिक सम्पदा धनी होते हुए भी संरक्षण सम्बद्र्धन और सौन्दर्यीकरण नहीं होने पर पर्यटक आकर्षित नही हो पा रहे हैं । धार्मिक स्थल, मठ मन्दिर का संरक्षण सम्बद्र्धन, धार्मिक पोेखर तथा सरोवर के सौन्दर्यीकरण के साथ ही आनेवाले पर्यटकों को सुरक्षा की अनुभूति होने पर मुझे लगता है स्वतः पर्यटक आने लगेंगे । जिससे राज्य और स्थानीयवासियाें की आमदानी भी बढ़ जाएगी ।

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