item-thumbnail

संविधान नैतिक पतन की राह पर चलना सिखा रहा है

March 18, 2016

निर्मला यादव, नेतृसंघीय समाजवादी फोरमइस देश में संविधान क्या आया मानों भूचाल ही आ गया । जिसने देश को आन्तरिक अन्तद्र्वन्द्ध में धकेल दिया गया है । मधे...

item-thumbnail

बेटी को सशक्त बनाना ही सबसे बड़ी आवश्यकता है

March 18, 2016

कोमल वलीगायिकासंविधान का आना ही सबसे बड़ी सकारात्मक बात है । हमें इसका स्वागत करना होगा क्योंकि सभी नेपाली को इसका इंतजार था । संविधान जब बन रहा था तो...

item-thumbnail

राज्य की व्यवस्था को महिला आत्मसात् नहीं कर पाई

March 18, 2016

मीना स्वर्णिकारसमाज सेवीनया संविधान हमारे सामने आया पर हम इसका आनन्द नहीं ले पाए । हमने बहुत भोगा है । हम जानते हैं कि इस देश की महिला चाहे वह किसी भी...

item-thumbnail

मां को बच्चे को पहचान दिलाने का अधिकार होना चाहिए

March 18, 2016

पद्मिनी प्रधानांङ, अध्यक्षसशक्ति नेपालहमारे देश की महिलाओं की मानसिकता आज तक बदली नहीं है । आज भी कई महिला ऐसी हैं, जो यह सोचती हैं कि हम बेटी क्यों प...

item-thumbnail

नागरिकता के सवाल को राष्ट्रीयता के साथ जोड़ना ही सबसे बड़ा विभेद है

March 18, 2016

सरिता गिरी, राजनीतिज्ञविवाह जैसी संस्था का भी राजनीतिकरण कर दिया है इस संविधान ने । जहाँ किसी महिला ने किसी विदेशी से अपनी मरजी से अगर विवाह किया तो अ...

item-thumbnail

यह महिला अधिकार की लड़ाई नहीं, मानवता की लड़ाई है

March 18, 2016

आरती चटौत, पत्रकारनेपाल टेलीविजनवर्तमान संविधान में हमने क्या खोया क्या पाया इस विषय पर मैं कुछ आधारभूत बातों को इस सन्दर्भ में रखना चाहती हूँ । विगत ...

item-thumbnail

प्रस्तावना से ही महिला हक की कटौती

March 18, 2016

दीपेन्द्र झा, अधिवक्ता, सर्वोच्च अदालतवर्तमान संविधान महिलाओं के हक में कितना है और कितना नहीं है, इस विषय पर मैं पूरी कोशिश करुँगा कि मैं इसे स्पष्ट ...