item-thumbnail

जलेश्वर में 521 वाँ तुलसी जयंती समारोह

0 August 17, 2018

जलेश्वर, 17 अगस्त ।आज नेपाल के जलेश्वर में 521 मा तुलसी जयंती महोत्सव का आयोजन ज्येष्ठ नागरिक जिला संघ महोत्तरी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के अध्यक...

item-thumbnail

भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी का निधन से शोक में डूबा संपूर्ण देश

0 August 16, 2018

{हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट} नई दिल्ली — ” हार नहीं मानुंगा रार नहीं ठानुंगा ” जैसी कविताओं के कालजयी रचनाकार, सफल...

item-thumbnail

दर्द तो है इस बात का दिल में कि, सांसे देकर धड़कन ने साथ छोड़ दिया ।

0 August 16, 2018

प्रिया मिश्रा कुछ खूबसूरत लम्हों ने साथ छोड़ दिया कि हसीं ख्वाबों ने साथ छोड़ दिया , दर्द तो है इस बात का दिल में कि, सांसे देकर धड़कन ने साथ छोड़ दिया...

item-thumbnail

वीरगंंज मेंं नेपाल¬ भारत साहित्य महोत्सव शुरु

0 August 12, 2018

वीरगंज, 12अगस्त । औद्योगिक नगरी वीरगंज मेंं नेपाल भारत साहित्य महोत्सव शुरु हो गया है । दो दिनों तक जारी रहनेवाला उक्त महोत्सव का उद्घाटन प्रदेश नं. २...

item-thumbnail

मैं और यादें,  यादें और सिर्फ यादें

0 August 10, 2018

आषाढ़ का पहला दिन मधु प्रधान आज फिर  काली घटा छाई है  घने काले पहाड़ जैसे  बादलों से  नीचे उतरते  उमड़ते छोटे-छोटे  बादल के टुकड़ों ने  घेर लिया सारा आकाश...

item-thumbnail

नेपाल–भारत साहित्य महोत्सव की तैयारियां पूरी

0 August 9, 2018

काठमांडू, ९ अगस्त । वीरगंज में ‘नेपाल भारत–साहित्य महोत्सव–२०१८’ होने जा रहा है । आयोजक संस्था के अनुसार इसकी तैयारिया पूरी हो चुकी है । महोत्सव यही भ...

item-thumbnail

अगर बचानी बेटियां, करें आज संकल्प । बेटी का जग में नहीं, कोई और विकल्प ।

0 August 9, 2018

बेटी है इक्कीस डा. रामनिवास ‘मानव’ बेटा–बेटी में नहीं, कहने को कुछ भेद । मरती फिर भी बेटियां, इस बात का खेद ।। क्या देना, उनको यहां, भले–बुरे की सीख ।...

item-thumbnail

भावनाओं को व्यक्त करती आधुनिक छोटी कविताएँ – ललन चौधरी

0 August 8, 2018

हिमालिनी,अंक जुलाई २०१८ | हिंदी में लंबी कविताओं की परंपरा में जिन कवियों ने मिसाल कायम की उसमें सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ‘सरोज स्मृति’, ‘राम की...

item-thumbnail

बेटियों की रूह तक को अपने नाखूनों से नोचे ज़ा रहे हो

0 August 8, 2018

      पूजा बहार वाह रे दुनियावालो क्यों हड़कम्प मचा रहे हो , अपनी बेटियों पे उँगली उठे तों मखमल के पर्दे , दूसरे की बेटियों की रूह तक को...

item-thumbnail

नहीँ आरजू कोई दौलत-ए-जहाँ की… मुहब्बत की तेरी  नज़र चाहती हूँ

0 August 7, 2018

दुआओं का तेरे असर चाहती हूँ  जीवन मॆं मैं कुछ अगर चाहती हूँ ॥ मिले ना मिले जो भी अपना मुकद्दर ! साथ जिसमें हो तू वो सफर चाहती हूँ ॥ नहीँ आरजू कोई दौलत...

item-thumbnail

वक़्त की आंच से जल रहा है जिगर नेह की बारिशों से बुझा जाइये ।।आरती आलोक वर्मा

0 August 4, 2018

गजल आरती आलोक वर्मा दास्ताँ प्रीत की अब सुना जाइये  इक गजल प्यार से गुनगुना जाइये ।। चांद पलकें बिछाये खड़ा है जहाँ  चांदनी बन वहाँ आप आ जाइए ।। नींद ...

item-thumbnail

मासिक वेतन पूरनमासी का चाँद है जाे एक दिन दिखता है अाैर घटते खतम हाे जाता है. प्रेमचंद

0 August 1, 2018

१९३२ में हंस में प्रकाशित प्रेमचंद की अात्मकथा के कुछ अंश   मेरा जीवन सपाट, समतल मैदान है, जिसमें कहीं-कहीं खड्ढे तो हैं पर टीलों, पर्वतों, घने ज...

item-thumbnail

प्रेमचंद की जयंती: धनिया, होरी, घीसू …आज भी सब वहीं के वहीं खड़े हैं…

0 July 31, 2018

अशोक मिश्र | महाराष्ट्र का एक बड़ा हिस्सा विदर्भ कहलाता है, जो कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस संभाग में...

item-thumbnail

औरत खुद में एक कविता होती है और उसमें शामिल हर शब्द हमारे कुकृत्यों पर आंसू बहाते हैं : ललन चौधरी

0 July 31, 2018

ललन चौधरी | साहित्य अपने पलकों पर स्वप्न सजाए एक खूबसूरत दुनियां को देखती है,जहां कोई औरत सुदंर सपने मे हंस रही होती है और उसकी मनभावन ,लुभावन अदा पर ...

item-thumbnail

तुम बने सागर  : पूजा बहार

0 July 30, 2018

एक नदी अनमनी सी, चंचल, कलकल, धवल थी वो पगली सरल,सजल सी ! पहाड़ों से छलाँग लगाकर, बर्फ बनकर और पिर खुद को गलाकर, अपने साजन से मिलन की खातिर, हर पीड़ा व...

item-thumbnail

साहित्यकार लाठ रचित ‘छमिया’ का लोकार्पण

0 July 28, 2018

काठमांडू, २८ जुलाई । उद्योगपति तथा साहित्यकार गणेश लाठ द्वारा रचित व्यंग्य कथा संग्रह ‘छमिया’ का लोकर्पण किया गया । शनिबार काठमांडू बानेश्वर स्थित लेख...

item-thumbnail

अक्षर अक्षर में शब्द शब्द में सांसें भरने आए : ललन चाैधरी

0 July 27, 2018

ललन चाैधरी अक्षर अक्षर में शब्द शब्द में सांसें भरने आए गीतों में मुस्कान भरे जीवन संघर्ष में गाए .. बचपन बीता लहरों में गीत लहरों में लहराए.. जीवन के...

item-thumbnail

हम पर कृपा बरसाना गुरूवर : संगीता ठाकुर

0 July 27, 2018

हम पर कृपा बरसाना गुरूवर अगर न होते गुरूवर मेरे तो हम कहाँ चलपाते जग में अगर चलना हम सिख भी जाते पर हँसना कहाँ सिख पाते जग में । पग– पग पर मार्गदर्शन ...

item-thumbnail

इंतजार करना ही मिलन का उत्कर्ष है : डॉ. रमा

0 July 26, 2018

हिमालिनी, अंक जुलाई, 2018 । ‘चाहतों के साये में’ से जब गुजर रही थी  तो एक बात जो सबसे पहले दिमाग में आई  वो ये कि कविता में बात कहने के लिए शब्दों का ...

item-thumbnail

कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे! विदा कविवर नीरज

0 July 19, 2018

१९ जुलाई साहित्य जगत काे अाज एक अपूरणीय षाति झेलनी पड रही है । महान गीतकार गाेपालदास नीरज ने अाज इस दुनिया काे अलविदा कह दिया । पर वाे कहीं गए नहीं वा...

item-thumbnail

नाराज़ हैं मेहरबाँ मेरे : डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

0 July 18, 2018

नाराज़ हैं मेहरबाँ मेरे  नाराज़ हैं मेहरबाँ मेरे अब आ भी जाओ कि अंजुमन को तेरी दरक़ार है ढूँढता रहा न मिला कोई तेरे जैसा कि महफ़िल तेरे बिना बेक़ार है तेरा...

item-thumbnail

अंग्रेज़ी का अध्यापक, जिसकी भाषा पंजाबी अाैर जिसने हिंदी साहित्य में एक प्रतिमान स्थापित किया वाे थे भीष्म साहनी

0 July 18, 2018

१८ जुलाई   आजकल महानगरों के कुछ ‘अतिकुलीन’ परिवारों में चलन शुरू हुआ है कि बच्चे अपने अभिभावकों को मम्मी-पापा कहने के बजाय उनका नाम लेते हैं. इस ...

item-thumbnail

महान कवि राम इकबाल सिंह ‘राकेश ‘ की 107वीं जयंती पर शत शत नमन

0 July 14, 2018

जिस मिट्टी की महक और खुशबू में रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित गेंहूं और गुलाब जैसे चिंतकपरक और मानवोपयोगी निबंध रचे गये,भला वहां मानवतावाद के मजबूत रस्...

item-thumbnail

मिसेज सिंह का स्मार्टफोन : दिलीप कुमार

0 July 12, 2018

हिमालिनी, अंक जून 2018 । आजकलए रौनक ए बजम हैं,उनके चेहरे का नूर गजब का है उनकी बढ़ती उम मानो थम सी गई है । लोगबाग उनकी बढ़ती उम और चढ़ते जादू का सीक्र...

item-thumbnail

दिल को पागल होने दो : आरती आलोक वर्मा (गजल)

0 July 11, 2018

    –  आरती आलोक वर्मा मुझको आपा खोने दो दिल को पागल होने दो ।। गम की बारिश होने दो काजल मुझको धोने दो ।। आंसू झम झम बरसेंगे आंखे बादल होने दो ।...

item-thumbnail

पीड़ा को सहने की तरकीब : डॉ. रूपेश जैन

0 July 10, 2018

पीड़ा को सहने की तरकीब हे नीलकंठ तुमे शत शत नमन कंठ में गरल धरते हो सदियों से पीड़ा को सहते हो मैं भी विष का चषक पीने वाला हूँ इस पीड़ा को सहने की कोई...

item-thumbnail

सोच रहा हूँ (कविता ) : डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

0 July 4, 2018

सोच रहा हूँ   एक दिन मेरे दोस्त को, मैं लगा गुमसुम बोला वो, क्या सोच रहे हो तुम बातें बहुत सी हैं सोच रहा हूँ, क्या सोचूँ, बोला मैं।   अलग-अलग हैं कित...

item-thumbnail

भेड़िया आया था ( लघुकथा ) : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

0 July 3, 2018

“भेड़िया आया… भेड़िया आया…” पहाड़ी से स्वर गूंजने लगा। सुनते ही चौपाल पर ताश खेल रहे कुछ लोग हँसने लगे। उनमें से एक अपनी हँसी दबाते हुए बोला, “लो! सूरज स...

item-thumbnail

प्रसिद्ध वालीवूड गायक सोनू निगम ने साहित्यकार बसंत चौधरी की पुस्तक का किया लाेकार्पण।

0 June 26, 2018

२६ जून मुंबई: जेडब्ल्यू मैरियट, जुहू में २५ जून, २०१८ की शाम को प्रतिष्ठित कवि,साहित्यकार, गजलकार और गीतकार श्री बसंत चौधरी की पुस्तक “चाहतों के...

item-thumbnail

गाेपाल गहमरी जिनकाे पढने के लिए लाेगाें ने हिन्दी सीखी

0 June 24, 2018

२४ जून डरिये मत, यह कोई भकौआ नहीं है, धोती सरियाकर भागिए मत, यह कोई सरकारी सीआईडी नहीं है. है क्या? क्या है? है यह पचास पन्ने की सुंदर सजी-सजायी मासिक...

item-thumbnail

“विशुद्ध वंदना” : डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

0 June 21, 2018

“विशुद्ध वंदना” वेष दिगम्बर धारी मुनिवर करुणा अब जगाएँगे पार करो खेवैया नहीं तो हम भव में ठहर जाएँगे भक्ति भाव से आपको पुकारें हे! विशुद्ध...

item-thumbnail

योग दिवस – डा. मनजीत कौर

0 June 21, 2018

आओ हम सब मिलकर योग दिवस मनायें, गांँव गांँव और शहर शहर में, इसकी अलख जगायें योग का मतलब है जोड़ना, मोह को मन से तोड़ना, मानव को प्रकृति से जोड़ना, चित...

item-thumbnail

बसन्त रचित ‘वसन्त’ पर साहित्यकारों के बीच चर्चा–परिचर्चा

0 June 19, 2018

लिलानाथ गाैतम /काठमांडू, १९ जून । साहित्यकार तथा कवि बसन्त चौधरी द्वारा रचित तथा विभिन्न ९ भाषा में प्रकाशित कविता संग्रह ‘वसन्त’ पर आज (मंगलबार) साहि...

item-thumbnail

टाइम्स ग्रुप इंडिया द्वारा बसंत रचित चाहतों के साये में लोकार्पित

0 June 16, 2018

16 जून नई दिल्ली । दिनांक 15 जून को टाइम्स ऑफ इंडिया ने नेपाल के प्रसिद्व कवि एवम उद्योग पति द्वारा रचित चाहतों के साये में का लोकार्पण कार्यक्रम आयोज...

item-thumbnail

हिमालिनी द्वारा विदाई समारोह एवं लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित ।

0 June 14, 2018

१४ जून२०१८, काठमांडू | भारतीय राजदूतावास (काठमान्डू) की प्रथम सचिव (पीआईसी)सुश्री रुबी जसप्रीत शर्मा ने अपने कार्यकाल का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के प...

item-thumbnail

अवधी साहित्यकार बिष्णु कुमाल का ७१वाँ जन्म दिवस तथा बहुभाषिक कवि गोष्ठी का आयोजन

0 June 4, 2018

नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल । बाके जिला की अवधी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान केन्द्रीय समिति के संस्थापक अध्यक्ष, अवधी वरिष्ठ साहित्यकार तथा चित्रकार विष्णु...

item-thumbnail

तरु पल्लव सी मैं : मनीषा गुप्ता

0 May 19, 2018

यूँही ✍✍✍तरु पल्लव सी मैं ह्म्म्म , यूँही चलते चलते कब थामा तुमने हाथ समझ ही न सकी बस महफूज़ करने लगी खुद को कब तुम दिन ब दिन आदत बन गए कब बदल दी तुमने...

item-thumbnail

कवि हृदय बसन्त चौधरी ! बेकल मन की अभिव्यक्ति चाहताें के साए में : डा.श्वेता दीप्ति ( फोटो फीचर सहित)

0 May 16, 2018

कवि हृदय बसन्त चौधरी ! जिन्हें जितना मैंने जाना, व्यापारी व्यक्तित्व में एक मासूम दिल, जो जीना चाहता है— अपनी ख्वाहिशों के साथ, अपने अहसासों के साथ और...

item-thumbnail

प्राकृतिक सुरक्षा के क्षेत्र में नेपाल और भारत को मिलकर काम करना चाहिए : डा. विजय पण्डित

0 May 11, 2018

१० मई , २०१८ को श्री लूनकरणदास गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर ने अपना वार्षिकोत्सव एवं २४ वाँ स्रष्टा सम्मान कार्यक्रम एक भव्य समारोह के साथ आयोजित ...

item-thumbnail

लूनकरणदास गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर द्वारा स्रष्टा सम्मान एवं काव्य पुस्तक ‘चाहतों के साए में’ का लोकार्पण (फोटो फीचर सहित )

0 May 10, 2018

  दिनांक १० मई , काठमांडू | श्री लूनकरणदास गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर ने अपना वार्षिकोत्सव एवं २४ वाँ स्रष्टा सम्मान कार्यक्रम एक भव्य समारोह के...

item-thumbnail

नेपाल–भारत साहित्य महोत्सव’ के आयोजन समिति की वृहत बैठक

0 May 8, 2018

कुमार सच्चिदानंद सिंह, बीरगंज, २५ गते मंगलवार | नेपाल–भारत साहित्य महोत्सव–२०१८’, वीरगंज की आयोजन समिति की वृहत बैठक आज इसके आयोजक ‘नेपाल–भारत सहयोग म...

item-thumbnail

नेपालगञ्ज में बहुभाषिक गजल गोष्ठी सम्पन्न

0 May 6, 2018

पवन जायसवाल, नेपालगञ्ज/(बाँके) बैशाख २३ गते । गुल्जारे अदब नेपालगञ्ज की संयोजकत्व में नेपालगंज में बहुभाषिक गजल गोष्ठी सम्पन्न हुई है । कार्यक्रम में ...

item-thumbnail

हिमालिनी की संपादक श्वेता दीप्ति मातादीन मूर्तिदेवी स्मृति पुरस्कार से सम्मानित

0 May 6, 2018

नारनौल, हरियाणा | मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट नारनौल द्वारा एक भव्य समारोह आयोजित करके डा.श्वेता दीप्ति को साहित्य, शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र ...

item-thumbnail

बुद्ध, तुम कब आओगे… ? : कैलाश महतो

0 April 30, 2018

बुद्ध, तुम कब आओगे… ? कैलाश महतो हर साल बैशाख में तेरे, याद में लोग चिल्लाते हैं, उसी तिथि पर, उसी मिति पर, फरियाद लोग सुनाते हैं । न तुम होते ह...

item-thumbnail

गजल

0 April 21, 2018

आरती आलोक वर्मा खुशी धड़कनों को  हवा कर रही है तेरी  आरजू  की  दुआ  कर रही है ।। ये दुनिया भी क्या खूब है जख्म देकर वही जख्म की अब दवा कर रही है ।। हव...

item-thumbnail

एक और कलम खामोश हो गईः विदा कविवर !

0 April 21, 2018

जीवन का एक कटु सत्य और हमारी खामोशी । एक दिन जब हमारे हाथों से सब छूट जाता है और रह जाती है सिर्फ टीस देती हुई यादें । तीन चार दिनों पहले सामाजिक संजा...

item-thumbnail

वैश्वीकरण के दौर में विस्तार पा रही है हिन्दी

0 April 20, 2018

हिमालिनी, अप्रैल 2018 अंक । इस वर्ष विश्व हिन्दी दिवस पर भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित कार्यक्रम का विषय था “हिन्दी का वैश्वीकरण” । आज के परिेप्रेक्ष्य...

item-thumbnail

तुम कैसे नहीं जाओगे अतिथि ? – संजीव निगम

0 April 12, 2018

संजीव निगम , हिमालिनी, अप्रैल अंक , २०१८ | रेल की पटरी से हमारे घर  बिछे हुए अतिथि , अगर हमारे घर आने से पहले ही तुमने शरद जोशी जी का वह मशहूर व्यंग्य...

item-thumbnail

बसन्त की वसंत अप्राप्य का व्यक्त संगम : डा. श्वेता दीप्ति

0 April 11, 2018

हिमालिनी , अप्रिल अंक  २०१८ | ‘वसंत’! नाम का असर कुछ ऐसा कि, चेहरे पर मुस्कान आ जाय । मौसम की बेरुखी से निजात दिलाता वसंत हर दिल अजीज होता है । जी हाँ...

item-thumbnail

मधेशी एकता की संवाहक – हिन्दी : संजय पाण्डेय

0 April 5, 2018

संजय पाण्डेय, वीरगंज, ५ मार्च | नेपाल का दक्षिणी समतल भूभाग जिसे मधेश कहा जाता है, वह सांस्कृतिक और भावनात्मक रुप से तो एक है किन्तु अलग अलग क्षेत्रों...

item-thumbnail

मानवता के प्रति समर्पित एक सरल और सहज व्यक्तित्व के मालिक बसन्त रचित ‘वसन्त’ का विमोचन

0 April 4, 2018

काठमान्डू ४ अप्रील | एक भव्य समारोह में कवि बसन्त चौधरी की कृति वसन्त का विमोचन किया गया । साहित्यकार बसन्त चौधरी की यह पाँचवी कृति है । नेपाली, हिन्द...

item-thumbnail

कात्यायनी और कविता : डा.श्वेता दीप्ति

0 March 29, 2018

डा.श्वेता दीप्ति, काठमांडू |  नेपाल यात्रा में आईं हुई कात्यायनी जी से मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ । ९ मई १९५९ को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मी का...

item-thumbnail

हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री कात्यायनी काठमांडू में (फोटो फीचर सहित)

0 March 29, 2018

काठमांडू | २९ मार्च | हिन्दी साहित्यजगत की प्रसिद्ध कवयित्री कात्यायनी इनदिनों नेपाल भ्रमण में हैं | उनके साथ प्रसिद्ध राजनैतिक चिन्तक शशिप्रकाश जी का...

item-thumbnail

बैल बीमार नहीं पड़ा है उसकी सरकारी नौकरी कन्फर्म हो गई है : अजय कुमार झा

0 March 29, 2018

अजय कुमार झा, जलेश्वर | मुझे एक कहानी याद आ रही है। एक आदमी ने रास्ते से गुजरते वक्त, एक खेत में एक बहुत मस्त और तगड़े बैल को काम करते हुए देखा। वह पा...

item-thumbnail

वक्त की बात : गिरीश चन्द्र लाल

0 March 25, 2018

सही काम करने वाले समझते हैं, उन्हें सब अच्छा ही कहेंगे । समझना कुछ बुरा नहीं, पर हर वक्त ऐसा नहीं होता । ऐसी बातों में वक्त की सूई कभी टेढी–मेढी और कभ...

item-thumbnail

गजल

0 March 25, 2018

मिथिलेश आदित्य चल रहा हूँ मैं अकेले जिन्दगी की राह में, जैसे कोई डूबता हो खुद अपनी आह में । क्या मनाऊँ मैं खुशी आजादी ए गुलशन की, अब कोई आशा नहीं बाकी...

item-thumbnail

एक ख्वाहिश : अयोध्यानाथ चौधरी

0 March 25, 2018

अयोध्यानाथ चौधरी मेरी ख्वाहिश है तुझे छू लूँ मैं पर मयस्सर तो नहीं मेरी नजरें तो तेरे पीछे है तुम जहाँ जाओ वहीं । तुम तो फरिश्ता हो, आसमाँ से टूट आयी ...

item-thumbnail

रामनारायण रमण कृत नवगीत संग्रह ‘नदी कहना जानती है’ का भव्य लोकार्पण

0 March 23, 2018

रायबरेली। भीतर से बाहर तक नदी के अविरल, लयबद्ध, कल्याणकारी भाव को समोये वरिष्ठ साहित्यकार श्रद्देय रामनारायण रमण जी का सद्य: प्रकाशित नवगीत संग्रह ...

item-thumbnail

एक और कलम खामोश हो गई : विदा कविवर ! – डा.श्वेता दीप्ति

0 March 20, 2018

हिन्दी साहित्य के एक– एक रत्न साथ छोड़ रहे हैं और दे जा रहे हैं एक समृद्ध इतिहास और कभी ना भरने वाला खालीपन । ( दिनांक १५ अगस्त २०१५, अन्नपूर्ण होटल म...

item-thumbnail

जिन्दगी

0 March 12, 2018

-लक्ष्मी जोशी जिन्दगी तू इतनी दुखी नहीं होती इतने तनाव में नहीं होती इतने अभाव में नहीं होती अगर वो मानव का मुखौटाधारी नाग तुझे अपने जाल में उल्झाये न...

item-thumbnail

“प्रेम से वंचित हो रहे है प्रेम के फूल ” : पूजा गुप्ता “नेपाल “

0 March 9, 2018

पूजा गुप्ता “नेपाल “, दुहबी १८ पूस | दुनिया के हर बच्चे का जन्म माँ की गर्भ से होता है औऱ पिता की आत्मा उसमे समाहित होता है शायद इसलिए बच्...

1 2 3 9