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गजल

0 April 21, 2018

आरती आलोक वर्मा खुशी धड़कनों को  हवा कर रही है तेरी  आरजू  की  दुआ  कर रही है ।। ये दुनिया भी क्या खूब है जख्म देकर वही जख्म की अब दवा कर रही है ।। हव...

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एक और कलम खामोश हो गईः विदा कविवर !

0 April 21, 2018

जीवन का एक कटु सत्य और हमारी खामोशी । एक दिन जब हमारे हाथों से सब छूट जाता है और रह जाती है सिर्फ टीस देती हुई यादें । तीन चार दिनों पहले सामाजिक संजा...

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वैश्वीकरण के दौर में विस्तार पा रही है हिन्दी

0 April 20, 2018

हिमालिनी, अप्रैल 2018 अंक । इस वर्ष विश्व हिन्दी दिवस पर भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित कार्यक्रम का विषय था “हिन्दी का वैश्वीकरण” । आज के परिेप्रेक्ष्य...

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तुम कैसे नहीं जाओगे अतिथि ? – संजीव निगम

0 April 12, 2018

संजीव निगम , हिमालिनी, अप्रैल अंक , २०१८ | रेल की पटरी से हमारे घर  बिछे हुए अतिथि , अगर हमारे घर आने से पहले ही तुमने शरद जोशी जी का वह मशहूर व्यंग्य...

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बसन्त की वसंत अप्राप्य का व्यक्त संगम : डा. श्वेता दीप्ति

0 April 11, 2018

हिमालिनी , अप्रिल अंक  २०१८ | ‘वसंत’! नाम का असर कुछ ऐसा कि, चेहरे पर मुस्कान आ जाय । मौसम की बेरुखी से निजात दिलाता वसंत हर दिल अजीज होता है । जी हाँ...

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मधेशी एकता की संवाहक – हिन्दी : संजय पाण्डेय

0 April 5, 2018

संजय पाण्डेय, वीरगंज, ५ मार्च | नेपाल का दक्षिणी समतल भूभाग जिसे मधेश कहा जाता है, वह सांस्कृतिक और भावनात्मक रुप से तो एक है किन्तु अलग अलग क्षेत्रों...

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मानवता के प्रति समर्पित एक सरल और सहज व्यक्तित्व के मालिक बसन्त रचित ‘वसन्त’ का विमोचन

0 April 4, 2018

काठमान्डू ४ अप्रील | एक भव्य समारोह में कवि बसन्त चौधरी की कृति वसन्त का विमोचन किया गया । साहित्यकार बसन्त चौधरी की यह पाँचवी कृति है । नेपाली, हिन्द...

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कात्यायनी और कविता : डा.श्वेता दीप्ति

0 March 29, 2018

डा.श्वेता दीप्ति, काठमांडू |  नेपाल यात्रा में आईं हुई कात्यायनी जी से मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ । ९ मई १९५९ को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मी का...

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हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री कात्यायनी काठमांडू में (फोटो फीचर सहित)

0 March 29, 2018

काठमांडू | २९ मार्च | हिन्दी साहित्यजगत की प्रसिद्ध कवयित्री कात्यायनी इनदिनों नेपाल भ्रमण में हैं | उनके साथ प्रसिद्ध राजनैतिक चिन्तक शशिप्रकाश जी का...

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बैल बीमार नहीं पड़ा है उसकी सरकारी नौकरी कन्फर्म हो गई है : अजय कुमार झा

0 March 29, 2018

अजय कुमार झा, जलेश्वर | मुझे एक कहानी याद आ रही है। एक आदमी ने रास्ते से गुजरते वक्त, एक खेत में एक बहुत मस्त और तगड़े बैल को काम करते हुए देखा। वह पा...

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वक्त की बात : गिरीश चन्द्र लाल

0 March 25, 2018

सही काम करने वाले समझते हैं, उन्हें सब अच्छा ही कहेंगे । समझना कुछ बुरा नहीं, पर हर वक्त ऐसा नहीं होता । ऐसी बातों में वक्त की सूई कभी टेढी–मेढी और कभ...

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गजल

0 March 25, 2018

मिथिलेश आदित्य चल रहा हूँ मैं अकेले जिन्दगी की राह में, जैसे कोई डूबता हो खुद अपनी आह में । क्या मनाऊँ मैं खुशी आजादी ए गुलशन की, अब कोई आशा नहीं बाकी...

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एक ख्वाहिश : अयोध्यानाथ चौधरी

0 March 25, 2018

अयोध्यानाथ चौधरी मेरी ख्वाहिश है तुझे छू लूँ मैं पर मयस्सर तो नहीं मेरी नजरें तो तेरे पीछे है तुम जहाँ जाओ वहीं । तुम तो फरिश्ता हो, आसमाँ से टूट आयी ...

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रामनारायण रमण कृत नवगीत संग्रह ‘नदी कहना जानती है’ का भव्य लोकार्पण

0 March 23, 2018

रायबरेली। भीतर से बाहर तक नदी के अविरल, लयबद्ध, कल्याणकारी भाव को समोये वरिष्ठ साहित्यकार श्रद्देय रामनारायण रमण जी का सद्य: प्रकाशित नवगीत संग्रह ...

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एक और कलम खामोश हो गई : विदा कविवर ! – डा.श्वेता दीप्ति

0 March 20, 2018

हिन्दी साहित्य के एक– एक रत्न साथ छोड़ रहे हैं और दे जा रहे हैं एक समृद्ध इतिहास और कभी ना भरने वाला खालीपन । ( दिनांक १५ अगस्त २०१५, अन्नपूर्ण होटल म...

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जिन्दगी

0 March 12, 2018

-लक्ष्मी जोशी जिन्दगी तू इतनी दुखी नहीं होती इतने तनाव में नहीं होती इतने अभाव में नहीं होती अगर वो मानव का मुखौटाधारी नाग तुझे अपने जाल में उल्झाये न...

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“प्रेम से वंचित हो रहे है प्रेम के फूल ” : पूजा गुप्ता “नेपाल “

0 March 9, 2018

पूजा गुप्ता “नेपाल “, दुहबी १८ पूस | दुनिया के हर बच्चे का जन्म माँ की गर्भ से होता है औऱ पिता की आत्मा उसमे समाहित होता है शायद इसलिए बच्...

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी न होते तो क्या हिंदी आज जैसे स्वरूप में आ पाती ?

0 March 9, 2018

रास्तों पर चलना आसान होता है । उन्हें बनाना मुश्किल । इसलिए दूसरा विकल्प चुनने वाले लोग बिरले ही होते हैं । आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी भी उन्हीं दु...

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कवि सीताराम प्रकाश की कविता संग्रह “मैं बीज हूँ” का विमोचन

0 March 3, 2018

काठमान्डौ ३ मार्च | कवि सीताराम प्रकाश की तीसरी कविता संग्रह “मैं बीज हूँ” का आज विमोचन किया गया । कवि की यह तीसरी कविता संग्रह है । इसके पूर्व “जिए स...

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माँ

0 February 24, 2018

मैं खुद ही रोती हूँ और खुद ही चुप हो जाती हूँ । क्योंकि चुप कराने वाली और मुझे मनाने वाली मेरी मां जो अब नहीं हैं अब कौन बचाएगा जिंदगी के संघर्ष में म...

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देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता : प्रस्तुति वी.के. पासवान

0 February 5, 2018

यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों तो क्या तुम दूसरे कम...

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मधेश मे हिन्दी अपरिहार्य भाषा : बी.के. पासवान

1 January 24, 2018

प्रिय पाठक मित्रों ! 24-जनवरी,2018 – बि.के. पासवान । आज दुनियां भरमे एक लहर चल रहा है, स्वाभिमान और पहचान के लिए हर ब्यक्ति-समुदाय अपने बिगत की ...

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तरबूजा : बिम्मी शर्मा

0 January 17, 2018

नेता गिरगिट की तरह रंग तो बदलते ही थे, अब तरबूजे की तरह एक को देख कर दूसरा उसी के रंग का हो गया है या होने वाला है । विश्वास नहीं है तो नेपाल के सबसे ...

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मैं, मधेश आंदोलन हूँ ! बि.के. पासवान

0 January 16, 2018

मैं, मधेश आंदोलन हूँ ! अभी शिशिरका मौसम है, मैं भी ठिठुर सा गया हूँ, लेकिन घबरा नहीं रहा मैं, केवल बसंतकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ, बसंत आते ही मुझमे शौर्...

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साहित्य को आगे बढ़ाने में दूत का काम करती है पत्रकारिता : डॉ.रीता चौधरी

0 January 13, 2018

{हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट} नई दिल्ली {भारत}:– राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की निदेशक और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखिका डॉ....

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कोई गम नहीं है मुझको जो तू मुझे मिला नहीं : डा. श्वेता दीप्ति (विश्व हिंदी दिवस पर प्रस्तुत गजल)

0 January 13, 2018

माना कि चाहतों का दिया तुमने सिला नहीं कोई गम नहीं है मुझको जो तू मुझे मिला नहीं । सच है कि जिंदगी, तुम तक पहुँच ना पाई है हसरतों को आज भी तुमसे गिला ...

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सच कहूँ प्रिय! तुम तो, मेरी कल्पना से भी  बहुत बढ़ कर निकले!

0 January 12, 2018

जीवन में कब क्या घटित हो जाए,कोई कुछ नहीं कह सकता! कब माँ सरस्वती कौन सी छुवन ले कर ह्रदय में प्रवेश कर जाएं,इसका भी भान पहले से नहीं हो पाता! प्रेम ए...

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वरिष्ठ साहित्यकार सच्चिदानन्द चौबे का ८० वाँ जन्मदिन

0 January 5, 2018

नेपालगञ्ज, (बाके) पवन जायसवाल, २०७४ पौष २१ गते । नेपालगञ्ज उप–महानगरपालिका वार्ड नंं. ११ भवानी बाग के निवासी अवधी तथा हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार तथा ...

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टोपीवाद : बिम्मी शर्मा

0 January 3, 2018

बिम्मी शर्मा, वीरगंज । ( व्यंग्य )इस देश में राष्ट्रवाद और देश प्रेम का पयार्यवाची है टोपीवाद । आप अगर नेपाली टोपी या ढाका टोपी पहनते है तो आप सच में ...

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गजल

0 January 2, 2018

गोर्खे साइँलो वो तो आते हैं, लौट जाते है., देखकर खुद ही मुस्कुराते हैं । जब उन्हें याद आ गया कोई, गीत गजलों को गुनगुनाते हैं । जल गया ख्वाब उनकी चाहत ...

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कुछ कमी सी है

0 January 2, 2018

पूजा गुप्ता जाने क्यों सब कुछ पा कर भी इक कमी सी है, होंठ भले ही हँसते हो मेरे पर आँखों में नमी सी है, ना कुछ पाने से खुशी होती है अब, ना कुछ खोने से ...

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गांधी : उनकी सफलता का रहस्य : स्व. भद्रकाली मिश्र

0 January 1, 2018

स्व. भद्रकाली मिश्र गांधी ने पूर्वीय समस्त इच्छाओं एवं महानता का यथार्थ प्रतिनिधित्व किया । उन्होंने भौतिक उत्कर्ष की चमक के कारण तथा वैभव, शक्ति एवं ...

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हड़बड़ी के ब्याह कनपट्टी में सेनूर : बिम्मी शर्मा

0 December 21, 2017

   बिम्मी शर्मा, वीरगंज | हड़बड़ी का काम हमेशा गड़बड़ी वाला होता है । हड़बड़ी करने वाले लोग कहते या बोलते एक चीज हैं पर करते दुसरा ही हैं । यह बि...

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मुक्तिबोधः उम्र भर जी के भी न जीने का अंदाज आया

0 December 18, 2017

हरिशंकर परसाई भोपाल के हमीदिया अस्पताल में मुक्तिबोध जब मौत से जूझ रहे थे, तब उस छटपटाहट को देखकर मोहम्मद अली ताज ने कहा था– उम्र भर जी के भी न जीने क...

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”  मेरा पता”

0 December 16, 2017

”  मेरा पता” आरती आलोक वर्मा 1 तुम मुझे मेरा पता बतलाओगे? या बतलाओगे तुम मुझे मेरे होने के मायने, ना-ना मैं ये उम्मीद नहीं करतीना ही देती ...

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कुबेरनाथ राय, एक ऐसे साहित्यकार जिन्होंने हिंदी निबंध हिंदी साहित्य को अपना जीवन दिया ..मनीषा गुप्ता..

0 December 15, 2017

कुबेरनाथ राय आज की साहित्यिक श्रृंखला को आगे बढाते हुए हिमालिनि पत्रिका नेपाल में मेरा लेख एक ऐसे साहित्यकार को जिन्होंने हिंदी निबंध हिंदी साहित्य को...

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साहित्यिक महाकुम्भ नेपाल तक पहुँचे और जीवन को ऊर्जा प्रदान करे : बसंत चौधरी

0 November 30, 2017

मेरठ के आईआईएमटी विवि में २४ से २६ नोभेम्बर तक तीन दिवसीय मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल का आयोजन किया गया | इसमें नेपाल, भूटान और तिब्बत के विख्यात कवियों और ...

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मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल में नेपाल से ५० साहित्यकार भाग लेंगें

0 November 20, 2017

अन्तर्राष्ट्रीय संस्थान ग्रीन केयर सोसायटी द्वारा आई. आई. एम. टी.विश्वविद्यालय, मेरठ के सहयोग में मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल का आयोजन २४, २५ और २६ नवम्बर क...

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ऐ जिन्दगी

0 November 15, 2017

अयोध्यानाथ चौधरी ऐ जिन्दगी! तुम कब तलक , यूँही दहलीज के बाहर ऐसे ही अंगूठे से मिट्टी कुरेदती रहोगी इतनी संवेदनहीनता ! मेरा सूनापन अब मौत के समीप है बर...

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आओ चलकर सैर करें हम

0 November 15, 2017

महेशचन्द्र शर्मा हाथ पकड़कर गीता माता, मुझको चलना सिखाती है । सबसे प्रेम करो मेरे बेटे, मुझको यही सिखाती है ।। जब जब मैं देवालय जाता, प्रभु से नाता जु...

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लेखिका इस्मत चुगताई उर्फ ‘उर्दू अफसाने की फर्स्ट लेडी’ जिन्होंने महिला सशक्तीकरण की बड़ी लकीर खींचीं

0 November 14, 2017

आज की साहित्यिक श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए हिमालिनी पत्रिका ( नेपाल ) में साहित्य को समर्पित कॉलम से हम हर हफ्ते किसी लेखक और लेखिका का जीवन परिचय उनकी...

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गठबंधन नही ठगबंधन – वाम, दाम और नाम का संगम : बिम्मी शर्मा

0 November 7, 2017

बिम्मी शर्मा, वीरगंज, (व्यंग्य) | इस देश में बारबार हो रहे निर्वाचन शादी के सात फेरे जैसी हो गयी है । शादी के ही सीजन में इस देश में निर्वाचन का भी शु...

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हिन्दी साहित्य के महान लेखक तथा सम्पादक श्री रामवृक्ष बेनीपुरी : मनीषा गुप्ता

0 November 5, 2017

मनीषा गुप्ता, ★★★★★रामवृक्ष बेनीपुरी ★★★★★★★ आज की साहित्यिक की श्रृंखला में मैं मनीषा गुप्ता हिमालिनि पत्रिका ( नेपाल ) के कॉलम में जिन साहित्य कर का...

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जब तलक है जिन्दगी…मैं अपने जन का साथ हूँ : बृषेश चन्द्र लाल

0 November 3, 2017

जब तलक है जिन्दगी कोई नाथ नहीं अनाथ हूँ ये मेरा मन है मेरा तन मैं अपने जन का साथ हूँ। जो छिन गया सो छिन गया जा शून्य में न मिल गया जहाँ में कुछ मिला त...

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जनकपुर में सितायन महाकाव्य का भव्य लोकार्पण

0 October 30, 2017

जनकपुर 29 अक्टूबर । नेपाल हिंदी प्रतिष्ठान जनकपुर और भाषा संगम इलाहाबाद के संयुक्त तत्वाधान में एक कार्यक्रम आयोजित कर सितायन महाकाव्य का लोकार्पण किय...

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जनकपुर में सितायन का लोकार्पण

0 October 30, 2017

जनकपुर 29 अक्टूबर । नेपाल हिंदी प्रतिष्ठान जनकपुर और भाषा संगम इलाहाबाद के संयुक्त तत्वाधान में एक कार्यक्रम आयोजित कर सितायन महाकाव्य का लोकार्पण किय...

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महर्षि वाल्मीकि कवि,शिक्षक और ज्ञानी ऋषि थे.

0 October 23, 2017

महर्षि वाल्मीकि का जीवन – परिचय – Maharshi Valmiki Ki Jeevani आज मैं एक बार फिर हिमालिनी पत्रिका (नेपाल ) के साहित्यिक कॉलम में ले कर आई हूं “रा...

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विश्व साहित्य की सर्वोत्तम कृतियों में अभिज्ञान शाकुन्तल

0 October 16, 2017

हिमालिनि पत्रिका ( नेपाल ) की इस बार की साहित्यिक श्रृंखला में मैं मनीषा गुप्ता महाकवि कालिदास जी के व्यक्तित्व व उनके महाकाव्य # अभिज्ञान शाकुंतलम पर...

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नेपालगञ्ज में बहुुभाषिक कवि गोष्ठी

0 October 15, 2017

नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७४असोज २९ गते । नेपालगञ्ज में सामाजिक सद्भाव फैलाने के लिये और सास्कृतिक सङ्गग्रालय की स्थापना करने के लिये सहभागियों ...

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भारतीय राजदूतावास द्वारा हिंदी पखवाड़ा आयोजित

0 October 12, 2017

काठमांडू | भारतीय राजदूतावास द्वारा आयोजित हिंदी पखवाड़ा-2017 का समापन समारोह कल दिनांक 11 अक्तूबर को संपन्न हुआ | इससे पहले भारतीय राजदूतावास की तरफ ...

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सुरों की मलिका शमशाद बेगम Shamshad Begum

0 October 8, 2017

जी हाँ सहित्य और संगीत का एक अटुट रिश्ता रहा है संगीत को साहित्य के प्राण भी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नही होगा आज मैं मनीषा गुप्ता हिमालिनी पत्रिका ( नेप...

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कुर्सी का खेल … : गंगेशकुमार मिश्र

0 October 5, 2017

कुर्सी का खेल … गंगेशकुमार मिश्र °°°°°°°°°°°°° छक कर खाई; रसमलाई; जब-जब कुर्सी; मिली है, भाई। भूलूँ कैसे ? ऊँची कुर्सी; चाहूँ, भी; न जाय भुलाई। ...

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“हाम्रो संग्रह” पुुस्तक विमोचन कार्यक्रम

0 September 29, 2017

नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७४ असोज १३ गते । बाके जिला में तमुु ह्युुलछोंजधी (गुुरुङ राष्ट्रीय परिषद्) जिला कार्य समिति के आयोजन में तमुु खेमानाँव...

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नेपालगन्ज में बहुुभाषिक कवि गोष्ठी सम्पन्न

0 September 27, 2017

नेपालगन्ज, (बाके) पवन जायसवाल, असोज १२ गते । यूएनडिपी की सहयोग में तथा सूचना और मानव अधिकार अनुुसन्धान केन्द्र नेपालगन्ज की आयोजना में असोज ७ गते शनिव...

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भारत की सभ्यता बहुत पुरानी है: राजदूत मंजीव सिंह पुरी

0 September 25, 2017

काठमांडू, २५ सितंबर । भारतीय दूतावास एवं बीपी कोइराला फाउन्डेशन ने युग पुरुष मानव एकात्मवाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी के अवसर ...

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अंतोन चेखव जी के साथ उनकी कहानी के कुछ अंश

0 September 24, 2017

आज हिमालिनी पत्रिका ( नेपाल)  के आभार स्वरूप एक ऐसे लेखक से आप को रूबरू करवाते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ जो की रूसी परिवेश से आत्मसात होत...

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न जाने क्यूँ

0 September 22, 2017

राघवेन्द्र झा कभी बरसात की चुभन कभी धुप की तपन न जाने क्यूँ आजकल मौसम बेगाना लगता है ।। कभी ठण्ढक से रूबरू कभी पसीने की बदबु न जाने क्यूँ आजकल हर एहसा...

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कत्ल की रात, आज की रात सभी का गर्दन पैसे की चक्कू से कटेगा

0 September 17, 2017

बिम्मी शर्मा, वीरगंज, १७ सितम्बर | (व्यग्ँय) आज है कत्ल की रात । मतदाताओं की ईमान और विवेक को पैसे कि खंजर से लहुलुहान करने की रात है आज । यह रात कालर...

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