Tue. Sep 18th, 2018

साहित्य

विभिन्न विधा के तीन दर्जन स्रष्टाओं को साहित्यिक तथा सांस्कृतिक पुरस्कार से सम्मानीत

विजेता चौधरी, काठमाण्डू, साउन १२ संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उडडयन मन्त्रालय ने आज विभिन्न साहित्यिक

वि.पी.कोइराला नेपाल भारत फाउण्डेशन द्वरा कथकार पराजुली के कथासंग्रह पर संवाद

विजेता चौधरी, अषाढ ३१ काठमाण्डू वि.पी. कोइराला नेपाल भारत फाउण्डेशन ने साहित्यकार राजेन्द्र पराजुली के

बोली

बोली अयोध्यानाथ चौधरी क्याें मारते हो मरते हुए को ? बोली को गोली से मत

मैथिली के नाटककार महेन्द्र मलंगिया सहित तीन स्रष्टा राष्ट्रीय प्रज्ञा पुरस्कार से सम्मानित

विजेता चौधरी, अषाढ १३, काठमाण्डू मैथिली भाषा के प्रख्यात नाटककार, नाट्यकर्मी महेन्द्र मलंगिया आज राष्ट्रपति

नेपाल में हिन्दी के अस्तित्व को कोई नकार नहीं सकता : डा.श्वेता दीप्ति

जनकपुर,१२ जून | जनकपुर में आयोजित पन्द्रहवाँ नेपाल रष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के अवसर पर त्रि

बीपीकोइराला भारत नेपाल फाउन्डेशन द्वारा चित्रकला सम्बन्धि कार्यक्रम का आयोजन

काठमान्डू, २४ मई भारतीय दूतावास पी.आइ.सी विंग ने बीपी कोइराला भारत नेपाल फाउन्डेशन द्वारा नेपाल

प्रेम प्रकाश मल्ल ‘मधुकर’ पुरस्कार तथा बहुभाषिक कविगोष्ठी नेपालगन्ज में सम्पन्न

नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७३ जेष्ठ ८ गते । भेरी साहित्य समाज केन्द्रीय समिति नेपालगन्ज बा“के

भूकम्प और सरकार ! आँसूओं की क़ीमत, कौड़ियों में, अधिकार, बेड़ियों में : गंगेश मिश्र

भूकम्प और सरकार… अनिश्चितता, भूकम्प और सरकार, दोनों की, समानांतर कायम रही। आँसूओं की क़ीमत,

वीपी कोइराला नेपाल भारत फाउन्डेशन द्वारा आयोजित कन्भेरसेशन में अमर न्योपाने द्वारा रचित ‘करोड़ों कस्तुरी’

 काठमाण्डू, चैत्र २९ गते । वीपी कोइराला नेपाल भारत फाउन्डेशन द्वारा आयोजित कन्भरसेशन में अमर

क्या ईश्वर है ?

क्या ईश्वर है ?महात्मा गाँधीएक ऐसी अव्यक्त, अपरिभाषित, रहस्यमयी शक्ति अवश्य है, जो विश्व के

धर्मेन्द्र विह्वल पार्वती स्मृति पुरस्कार से सम्मानित

  काठमान्डौ, १गते | काठमान्डौ शांतिनगर, प्रयागमार्ग अवस्थित राष्ट्रीय वहावी केन्द्र के सभागार में पार्वती

समझौता

समझौतागंगेश मिश्र, कपिलवस्तु२२,फरवरीसमझौते होते रहे हैं,होते रहेंगे।जिन्हें बोने हैं काँटेबोते रहेंगे।फिर वही होगा,जो होता रहा

जिन्दगी

शुवह शुहानी मौसम दिवानी ख़ुशहाल जिन्दगी सुन्दर कहानी पग पग सँभलना सँभलकर चलना खुशीयाँ बाटकर

हाय रे राष्ट्रवाद ! गागर मे भरी हुई जल की तरह जहां, तहां छलक जाती है : बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू , २२,सेप्टेम्बर | हम नेपालवासियों के अन्दर राष्ट्रवाद कूट, कूट कर भरा है

जब भाग्य में अंधेरा, तो शहर किसके लिए था, जब धूप थी किस्मत तो सजर किसके लिए था|गुल्जारे अदब की गजल गोष्ठी

गुल्जारे अदब की मासिक गजल गोष्ठी नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल,२०७२ असोज २ गते । गुल्जारे अदब