योग योगासन, भ्रांति और सच्चाई

सदगुरु आचार्य श्री स्वामी ध्रुव जी
वर्तमान समय में योगासन के अत्यधिक प्रचार–प्रसार के बाद आमतौर पर हममें से ज्यादातरयक्ति कभी भी, किसी से, कहीं भी योगासन सीख लेते हैं । जबकि उन्हें यह पता भी नहीं रहता है कि जहाँ पर वे योगासन सीखने जा रहें हैं उन्हें योग का विशेष ज्ञान है कि नहीं । आँख मूँदकर हमें उसका प्रशंसक नहीं बनना चाहिए जिसके लाखों प्रशसंक हैं । जीवन में हमें निश्चित रूप से सारे कार्यो में सावधानी रखना चाहिए । बेहोशी, अज्ञानता और जल्दबाजी में किया गया कार्य हमें दुख देता है । योगाचार्य कि जिम्मेवारी तथा नैतिक कर्तव्य है कि पहले पूरी तरह से योगासन का ज्ञान प्राप्त कर लें । उसके बाद बिना अहंकार के सरलता के साथ ही किसी भीयक्ति को बहुत ही वैज्ञानिक एवं सटीक तरीके से योगासन की शिक्षा दें । ठीक तरीके से योगासन नहीं करने से इसके बहुत ही बुरे परिणाम होते देखा गया है । क्योंकि बाहर से योगासन सिखना और करना जितना आसान लगता है, भीतर से यह उतना ही महत्वपूर्ण और जटिल प्रक्रिया है । योगासन करने से पहले बहुत जरूरी है कि ठीक से इसका ज्ञान प्राप्त करें और तब इसका अभ्यास करें ।
योगासन — यहाँ पर एक और बात याद रखने योग्य है कि योगासन, ध्यान और प्राणायाम तीनों अलग–अलग क्रियाएँ है । योगासन एक अति प्राचीन कलात्मक और रहस्यमयीयायाम पद्धति है । जिसे बडे ही लयबद्ध तरीके से धीरे–धीरे किया जाता है । इसमें शरीर को चार दिशाओं जैसे–आगे–पीछे, दायें–बायें मोडते हैं और सीधा करते हैं । इसे तीन तरह से किया जाता है—जैसे कुछ क्रियायें बैठकर, कुछ खडे होकर और कुछ लेटकर ।
प्राणायाम –प्राणायाम एक प्रकार की साँसों की क्रिया है । योगासन करने के बाद इसे करना चाहिए । दो या तीन से ज्यादा प्राणायाम करने की जरूरत नहीं है । कोई भी प्राणायाम की एक निश्चित अवधि होती है । इसलिए १० मिनट से ज्यादा कोई भी प्राणयाम करने की आवश्यकता नहींंंं है ।
ध्यान— ध्यान एक विशेष प्रकार की दिव्य और आंतरिक स्थिति है । इसे योगासन और प्राणायाम के बाद करना चाहिए । प्रारंभ में १० मिनट से शुरु करें । अधिक से अधिक ३० मिनट तक इसे करें । इसे करने के लिए पदमासन, शवासन, सिद्धासन या सुखासन उपयोगी आसन है ।
योगासन के लाभ— ठीक से किया गया योगासन हमारे पूरे शरीर के माँसपेशियों को लचीला रखता है । रक्त संचरण को संतुलित करने में सहायता करता है । अनावश्यक द्रव्य पदार्थ को शरीर से बाहर निकाल देता है । मेटाब्लोजिम को ठीक रखता है हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है ।
पिछले २० वर्षो से योग जीवन यात्रा के दौरान सैकडो भक्तों को हमने देखा कि गलत तरीके से योगासन करने के कारण उन्हें एक दूसरी समस्या पैदा हो गई । सभी आसन सबों को नहीं करना करना चाहिए । कैसे और कितनी बार करना है ? इसका ज्ञान होना जरूरी है ।
प्रमुख आचार्य तो काफी ज्ञानी होते हैं वे इसका ख्याल रखते हैं, परन्तु उनके सहायक योगाचार्य या सह–प्रशिक्षक ‘नीम हकीम खतरे जान” कि तरह होते हैं । वे अज्ञानता और अहंकार के कारण गलत ढंग से प्रशिक्षण देते हैं । जिसका बुरा प्रभाव सामान्य जन को भोगना पडता है ।
योगासन करने के विशेष नियम—
१. योगासन करने के समय कभी भी जल्दबाजी और जबरदस्ती यानि क्षमता से अधिक शक्ति लगाकर कोई भी आसन न करें ।
२. ठंढ के मौसम में अधिक से अधिक ४० मिनट, बरसात में ३५ मिनट तथा गर्मी में ३० मिनट से ज्यादा योगासन न करें ।
३. मासिक धर्म और बीमारी की अवस्था में योगासन न करें ।
४. किसी भीयक्ति को १० से १२ आसन ही करना चाहिए ।
५. ढीला वस्त्र पहनकर और खुली जगह में ही योगासन करना चाहिए ।
६. अगर आप जाँगिंग–स्वीमिंग–डाँस–रनिंग या वाक करते हैं तो उसके बाद योगासन करें । अंत में प्राणायाम ओर ध्यान करें ।
७. कभी भी खाली पेट में ही योगासन करना चाहिए, खाने के ३–४ घंटा के बाद योगासन कर सकते हैं और योगासन करने के २०–२५ मिनट बाद ही खाना खा सकते हैं ।
८. योगासन करनेवालेयक्ति को दैनिक १०–१२ ग्लास पानी अवश्य पीना चाहिए ।
९. गर्भावस्था की स्थिति में किसी योग्य गुरु के निर्देशानुसार ही योगासन करें ।
१०. किसी भी प्रकार के आपरेशन के ३–४ महीने बाद ही उचित परामर्श लेकर योगासन करें ।
किस प्रकृति में कौन सा आसन करना चाहिए —
आनुवंशिक तथा जन्मजात रूप सेयक्ति के शरीर में किसी एक अथवा दो दोषों की प्रमुखता हो सकती है जिसके कारण उसके शरीर की प्रकृति निर्धारित होती है । अतः किस प्रकृति में कौन सा आसन करना चाहिए, वह निम्नलिखित है —
वात दोष शांत करनेवाले आसन
१.ताड़ासन,२.उत्कटासन,३.त्रिकोणासन,४.हस्तपादासन,५.सूर्य नमस्कार,६.जानुशीर्षासन
७.पश्चिमोत्तासन, ८.मेरुवक्रासन, ९.उग्रासन, १०.योगमुद्रा, ११. नौकासन (पीठ व पेट के बल) १२. विपरीतकरणी, १३.हलासन, १४.शलभासन, १५. शवासन
पित्त दोष शांत तुरंत नियंत्रित करनेवाले आसन
१.मार्जारी आसन, २. नौकासन (पीठ व पेट के बल), ३. पर्वतासन, ४. सर्वांगासन, ५.विपरीतकरणी, ६. अश्वसंचालन आसन, ७. जानुशीर्षासन, ८.पश्चिमोत्तासन, ९.उग्रासन, १०.हस्त उत्तानासन, ११. सेतुबंधासन, १२.भुजंगासन, १३.सुप्त वज्रासन, १४.आकर्ण धनुरासन, १५. शवासन
कफ दोष शांत करनेवाले आसन
१.हस्त उत्तानासन, २. पर्वतासन, ३. ताड़ासन, ४. वृक्षासन, ५. त्रिकोणासन, ६. वीरासन, ७. भुजंगासन, ८. शलभासन, ९.उग्रासन, १०.अश्वसंचालन आसन, ११. सेतुबंधासन, १२. धनुरासन, १३. शवासन, १४. नौकासन १५. आकर्ण धनुरासन,१६.चक्रासन
यहाँ मैं विशेषरूप से तीन योगासनों के बारे में विस्तृत जानकारी देने जा रहा हूँ । जो आपके तनाव को प्रबंधन करने में सहायता करेगा । इसके अलावे एकाग्रता, धैर्य, स्मरण शक्ति तथा मानसिक क्षमता एवं समझ को बढायेगा ।
१.वज्रासन— हमारे शरीर में वज्र नाम की एक नाडी है इसी कारण इस आसन का नाम वज्रासन पडा । कंबल या कुशन पर दोनों पैर को मोडकर बैठ जायें । दोनों हाथों को घुटने पर रखें । तथा कमर और पीठ सीधा रखें । लगातार पाँच मिनट तक बैठे रहें और लंबी एवं गहरी साँस लें एवं छोडें ।
२.पृथ्वी नमस्कार— इस आसन को करने के लिए वज्रासन में बैठकर दोनों हाथों को पीछे से एक हाथ को दूसरी हाथ से पकडे । लंबी साँस लें फिर साँस छोडते हुए आगे की तरफ झुके । ५सेकेंड बिना साँस के रुके फिर साँस लेते हुए उठें । इसे पाँच बार करें ।
(स्लिप डिस्क, कमर दर्द और साइटिका वाले इसे न करें ।
३.शवासन—हल्का मोटा बिस्तर पर ढीला वस्त्र लगाकर पीठ के बल लेट जायें । दोनों पैर १ फीट की दूरी पर रखें । हथेलियों को खोलकर आसमान की तरफ कर दें । आँखों को बन्द करके एक बार भाव करें कि आपके दोनों पैर, घुटने, कमर, पीठ, पेट, छाती, गरदन तथा पूरा शरीर शिथिल और शांत हो रहा है । उसके बाद दस मिनट तक धीरे–धीरे लंबी और गहरी साँस लें और छोडे ।
(लेखकः संस्थापक—योगा फाँर माइंड मैनेजमेन्ट तथा सृष्टि साधना केन्द्र,नेपाल)

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