Mon. Nov 19th, 2018

असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योति गमय |मृत्यु मा अमृतं गमय। ॐ शांति शांति शांति ||

डा श्वेता दीप्ति

सुख समृद्धि अाैर एेश्वर्य की शुभेच्छा के साथ दीपाेत्सव  के शुभअवसर पर समस्त जन काे हिमालिनी परिवार की अाेर से अनन्त मंगलकामनाएँ

असतो मा सद्गमय
तमसो मा ज्योति गमय |
मृत्यु मा अमृतं गमय।
ॐ शांति शांति शांति ||

दीपावली शब्द की उत्पति संस्कृत के दो शब्दों दीप और दिया तथा आवली के मिलने से हुई हैं. इसके उत्सव में घरों के द्वारों, घरों और मंदिरों को प्रकाश से सजाया जाता हैं. दीपावली जिसे दिवाली भी कहते हैं, इस त्यौहार को देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम हैं. नेपाल में इसे तिहार भारत के उड़ीसा राज्य में इसे दीपावली कहते हैं, बंगाल – दीपोबोली, असमी में-दीपावली, गुजरात- दिवाली, महाराष्ट्र- दिवाली, पंजाब – दिवाली कहते हैं.

दीपावली का सीधा अर्थ हैं – दीपों से जगमगा उठने वाला त्यौहार. दीपावली का पर्व खुशियो, प्रकाश तथा उजाले का पर्व कहलाता हैं. यह त्यौहार हिन्दुओं का साल का सबसे बड़ा पर्व होता हैं जो शरद ऋतू के अक्टूबर या नवम्बर महीने में मनाया जाता हैं. दीपावली एक प्राचीन हिंदू त्यौहार हैं. यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता हैं. दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों नजरिये से काफी महत्वपूर्ण माना जाता हैं. इसे दीपोत्सव भी कहते हैं. इस उत्सव को अंधेरे को प्रकाश की ओर ले जाना भी कहते हैं. इसे सिख, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायी भी बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. जैन धर्म के अनुयायी इस पर्व को महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं और सिख धर्म के लोग इसे समुदाय बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं.

कुछ प्राचीन कथाओं के अनुसार इस दिन अयोध्या के राजा श्री राम चन्द्र अपने 14 वर्ष के बनवास काटने के बाद अपने घर अयोध्या वापस आये थे. अयोध्या वासियों के लोगो का दिल श्री राम के प्रति आगमन से उत्साहित था. श्रीराम के स्वागत में अयोध्या वासियों ने घी के दिये जलाये थे. कार्तिक मॉस की सघन अमावस्या की अँधेरी रात प्रकाश के उजाले से जगमगा उठी थीं.

दीपावली पर्व धार्मिक महत्व, हिन्दू धर्म और हिन्दू दर्शन तथा मान्यताओं पर निर्भर करता है. प्राचीन समय में ग्रन्थ रामायण में बताया गया हैं कि इस दिन भगवान श्री राम जी अपने 14 साल के बनवास को काटने के बाद अपने घर लौटे थे और हिन्दू महाकाव्य महाभारत के अनुसार कुछ दीपावली को 12 वर्ष और एक साल अज्ञातवास के बाद पांडवो की घर वापसी के रूप में भी मनाया जाता हैं.

कई लोग इसे भगवान विष्णु की पत्नी और उत्सव, धन तथा देवी लक्ष्मी से भी जुड़ा मानते हैं. भारत के पूर्वी क्षेत्र उड़ीसा और वेस्ट बंगाल में हिन्दू लक्ष्मी की जगह काली की पूजा करते हैं. भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा के क्षेत्रो में इसे भगवान कृष्ण से जुड़ा बताते हैं. भारत के कुछ वेस्ट और नार्थ भागों में दीपावली के फेस्टिवल को एक नये हिन्दू वर्ष की शुरुआत का प्रतीक देखते हैं.

दीप जलाने की प्रथा के पीछे अलग-अलग कारण और कहानियाँ भी हैं. राम भक्तों के अनुसार दीपावली वाले दिन अयोध्या के राजा श्री राम ने लंका के अत्याचारी राजा रावण का विनाश करके अपने घर अयोध्या लौटे थे. इस  रावण वध से जनता में अपार हर्ष और खुशी फैल गयी थीं और दुसरे प्राचीन कहानी के अनुसार इस दिन विष्णु ने नरसिंह रूप धारण कर हिरणा-कश्यप का वध किया था.

अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह पर्व समाज में बड़े उल्लास, भाई-चारे और प्रेम का सन्देश फैलाता हैं जो धार्मिक, सामाजिक खुशियाँ देता है. हर प्रान्त और क्षेत्र में दीपावली का पर्व मनाने के कारण एवं तरीकें अलग हैं. लोगो में दीपावली की बहुत उमंग होती हैं. इस मौके पर लोग घरों को साफ-सुथरा रखते हैं. घर-घर में सुन्दर रंगोली बनायीं जाती है और दिये जलाये जाते हैं. सभी जगहों में कई पीढियों से यह उत्सव चला आ रहा हैं.

कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। दिवाली को दीपावली भी कहा जाता है। दिवाली एक त्योहार भर न होकर, त्योहारों की एक श्रृंखला है। इस पर्व के साथ पांच पर्वों जुड़े हुए हैं। सभी पर्वों के साथ दंत-कथाएं जुड़ी हुई हैं। दिवाली का त्योहार दिवाली से दो दिन पूर्व आरम्भ होकर दो दिन पश्चात समाप्त होता है।

दिवाली का शुभारंभ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन से होता है। इसे धनतेरस कहा जाता है। इस दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरि की आराधना की जाती है। इस दिन नए-नए बर्तन, आभूषण इत्यादि खरीदने का रिवाज है। इस दिन घी के दिये जलाकर देवी लक्ष्मी का आहवान किया जाता है।

दूसरे दिन चतुर्दशी को नरक-चौदस मनाया जाता है। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इस दिन एक पुराने दीपक में सरसों का तेल व पाँच अन्न के दाने डाल कर इसे घर की नाली ओर जलाकर रखा जाता है। यह दीपक यम दीपक कहलाता है।

एक अन्य दंत-कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर राक्षस का वध कर उसके कारागार से 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था।

तीसरे दिन अमावस्या को दिवाली का त्योहार पूरे भारतवर्ष के अतिरिक्त विश्वभर में बसे भारतीय हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन देवी लक्ष्मी व गणेश की पूजा की जाती है। यह भिन्न-भिन्न स्थानों पर विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है।

दिवाली के पश्चात अन्नकूट मनाया जाता है। यह दिवाली की श्रृंखला में चौथा उत्सव होता है। लोग इस दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर गोवर्धन की पूजा करते हैं।

शुक्ल द्वितीया को भाई-दूज या भैयादूज का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि यदि इस दिन भाई और बहन यमुना में स्नान करें तो यमराज निकट नहीं फटकता।

 

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