Sun. Oct 21st, 2018

अहंकार की बलि-वेदी पर मधेश आन्दोलन, मधेश; मधेशी नेताओं से बहुत दुःखी है : गंगेश मिश्र

आज पश्चिम की राजनीति में, कोहराम मचा हुआ है, मधेश के शीर्षस्थ नेतागण ( माननीय त्रिपाठी जी, गुप्ता जी एवं मिश्रा जी ) अगला चुनाव, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ( एमाले ) के सूर्य निशान तले लड़ने जा रहे हैं; ये कोई ताज्जुब वाली बात तो नहीं किन्तु, इसे मधेशी आवाम किस रूप में ले ? इससे मधेश आन्दोलन को, क्या लाभ मिलने वाला है ? क्या, ये इस पार्टी में रहकर ही संविधान संशोधन करवाने वाले हैं ? या, ये लोग अपनी जीत की सुनिश्चितता के लिए ही; इस पार्टी में प्रवेश कर रहे हैं ?

गंगेशकुमार मिश्र, कपिलवस्तु | विडम्बना कहें या महत्वाकांक्षा, पिछले दिनों में मधेश; मधेशी नेताओं के आचरण से ज्यादे दुःखी है। मधेशी आन्दोलन के बहाने, अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को फलीभूत करने की लाससा ने; इस आन्दोलन की गति को मन्थर किया है।
पहले सिद्धांत पे आधारित हुआ करती थी राजनीति, परन्तु आज व्यवहारिकता के कसौटी पर राजनीति को कसने की कोशिश की जा रही है; जिसने राजनीति को मैला कर दिया है। शुरुआती दौर में मधेश आन्दोलन, सम्पूर्ण मधेशियों के पहचान की लड़ाई हुआ करती थी, किन्तु अब इसे मधेशी नेताओं ने अपनी महत्वाकांक्षा की बलिवेदी पर चढ़ा दिया है।
बीस वर्षों बाद, आयोजित स्थानीय निकाय निर्वाचन के समर में; प्रत्यक्ष रूप से केवल दो नम्बर क्षेत्र में ही, मधेशी दल निर्वाचन में शामिल हुए। इसका प्रमुख कारण था, मधेश के नेताओं में समय-सापेक्ष निर्णय लेने की अक्षमता और दृढ़ इच्छा-शक्ति का अभाव।
मधेशी नेतागण समय-समय पर, अपना उपहास कराते रहें हैं, यही वज़ह है कि इन पर मधेशी जनता भी विश्वास नहीं करती; एक बात याद रखनी होगी कि मधेशी सभ्य समाज अपनी अस्मिता बचाए रखने के लिए; कांग्रेस, एमाले, माओवादी आदि पहाड़वादी पार्टी के सम्पर्क में रहती है; यह कहते अपार कष्ट होता है कि मधेश; मधेशी नेताओं से बहुत दुःखी है।
आज पश्चिम की राजनीति में, कोहराम मचा हुआ है, मधेश के शीर्षस्थ नेतागण ( माननीय त्रिपाठी जी, गुप्ता जी एवं मिश्रा जी ) अगला चुनाव, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ( एमाले ) के सूर्य निशान तले लड़ने जा रहे हैं; ये कोई ताज्जुब वाली बात तो नहीं किन्तु, इसे मधेशी आवाम किस रूप में ले ? इससे मधेश आन्दोलन को, क्या लाभ मिलने वाला है ? क्या, ये इस पार्टी में रहकर ही संविधान संशोधन करवाने वाले हैं ? या, ये लोग अपनी जीत की सुनिश्चितता के लिए ही; इस पार्टी में प्रवेश कर रहे हैं ?
सवाल उठते रहे हैं, उठते रहेंगे; किन्तु इन सवालों का ज़वाब, इन नेताओं के पास नहीं मिलेगा। इसका ज़वाब तो, अब मधेश की जनता को ही देना है।

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