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अाज है परशुराम जयंती, जानें, भगवान परशुराम से जुड़ी 6 रोचक बातें

१८ अप्रेल
भगवान परशुराम माता रेणुका और ऋषि जमदग्नि की चौथी संतान थे। शिव भक्ति के कारण इन्हें भोले भंडारी से वरदान स्वरूप परशु मिला था। इसी कारण इनका नाम परशुराम पड़ा।

 -माना जाता है कि भगवान परशुराम आज भी धरती पर हैं। इन्हें 7 अमर देवताओं में एक माना जाता है। इसीलिए सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में भी इनका उल्लेख मिलता है।

– भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे।

-भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया पर हुआ था। खास बात यह है कि इसी तिथि में भगवान के 2 अन्य अवतार नर-नारायण और हयग्रीव का भी अवतरण हुआ था।

-पिता की आज्ञा का मान रखने के लिए परशुराम को अपनी ही माता का वध करना पड़ा था। पिता से ही वरदान मांगकर उन्होंने अपनी माता को पुन: जीवित करा लिया।

-त्रेता युग में भगवान राम ने ही परशुराम को द्वापर युग तक सुदर्शन चक्र संभालने की जिम्मेदारी थी। इसीलिए गुरु संदीपनी के यहां आकर परशुराम ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र सौंपा था।

– परशुराम ने ही द्वापर युग के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारियों में शुमार भीष्म और कर्ण को धनुर्विद्या सिखाई।

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