Tue. Oct 16th, 2018

अाज है भैयादूज, बहनें माँगती हैं भाइ के लम्बी उम्र की दुअा

द‍िवाली के बाद द्वितीया त‍िथ‍ि को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। मान्‍यता है क‍ि इसी द‍िन यमराज लंबे समय से म‍िलने को व्‍याकुल बहन यमुना से म‍िलने पहुंचे थे…

यमुना नदी में स्नान करना शुभ
भैया दूज को यम द्वितीया नाम से भी पुकारते हैं। इस बार भैया दूज पर्व 21 अक्‍टूबर को मनाया जाएगा। यह त्‍योहार भाई-बहन के प्‍यार का प्रतीक है। इस द‍िन बहनें अपने भाई के माथे पर त‍िलक कर उनके उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई भी उन्‍हें दक्ष‍िणा आद‍ि देकर सदैव उनकी रक्षा व मान रखने का वचन देते हैं। मान्‍यता है क‍ि अगर इस द‍िन भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी उम्र लंबी होगी। मान्‍यता है क‍ि आज के द‍िन यमराज अपनी बहन यमुना के घर म‍िलने आते हैं।

यमुना ने यमराज से मांगा वरदान

पौराण‍िक कथाओं के मुताबि‍क इसी द्वि‍तीया को यमराज बहन यमी यानी क‍ि यमुना नदी से मिलने पहुंचे थे, तब यमी ने उनकी खूब सेवा की थी। इस पर यमराज ने यमी से प्रसन्‍न होकर वरदान मांगने को कहा। ऐसे में यमी ने कहा क‍ि यमुना नदी में स्नान करने वाला प्राणी यमलोक न जाए। यह सुन यमराज चिंतित हो गए। वहीं भाई को परेशान देख यमी ने अपना वरदान बदल दि‍या। फ‍िर कहा क‍ि आज के द‍िन जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करे व यमुना के जल में स्नान करे उसे यमलोक न जाना पड़े। इस पर यमराज ने ऐसा ही होने का वर द‍िया था।

इस द‍िन देश के अलग-अलग ह‍िस्‍सों पर अलग-अलग तरीके से पूजा होती है। कुछ स्‍थानों पर बहनें भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाकर उस पर सिन्दूर कद्दू के फूल, पान, सुपारी और पैसे रखकर उनके हाथों पर पानी छोड़ती हैं। इस दौरान यह भी कहती है क‍ि “गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े। वहीं कुछ जगहों पर बहनें धरती पर दूज बनाती हैं। इसके बाद उसकी व‍िधि‍वत पूजा करती है। पूजा के बाद भाई के माथे पर टीका कर म‍िठाई खि‍लाती हैं।

 

चील द‍िखना शुभ माना जाता

वहीं कुछ जगहों पर मान्‍यता है क‍ि संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुखी दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय आसमान में चील उड़ती दिखना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है या चील जाकर यमराज को बहनों का संदेश सुना देगी। वहीं बहुत जगहों पर इस द‍िन बहनें भाई को अपने घर पर आमंत्रित करती हैं। अगर क‍िसी कारण वश भाई नहीं पहुंच पाते हैं तो शाम को वह खुद जाकर टीका करने के बाद साथ में भोजन करती हैं।

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