Thu. Oct 18th, 2018

इंसानियत ही किसी के घर का चिराग बुझने से बचा सकती है, सोचिये तो सही

डॉ शिल्पा जैन सुराणा, वारंगल,तेलंगाना | संवेदनहीनता का एक और मामला मुरादाबाद में नजर आया जहाँ कार की टक्कर से घायल एक युवक ने तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया, उसकी घायल बहन लोगो के सामने गिड़गिड़ाती रही पर किसी ने उनकी मदद नही की। इसी तरह कोटा का 17 साल का मासूम से युवा अपनी जिंदगी से असमय ही हाथ धो बैठा, सड़क हादसे का शिकार हुआ ये युवा बीस मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा मगर कोई उसकी मदद को आगे नही आया।
पति पत्नी और बच्चे स्कूटर पर सवार थे कि पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी, बीवी और बच्चे ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, पति मदद के लिए गुहार लगाता रहा पर लोग सामने से गुजरते रहे मगर किसी ने उनकी मदद नही की, किसी ने पुलिस को फ़ोन किया, किसी ने एम्बुलेंस को फ़ोन किया पर किसी ने उन्हें हॉस्पिटल पहचानने की जहमत नही दिखाई।
भारत मे सड़क हादसों के आंकड़े दिल दहलाने वाले है, शायद ही कोई ऐसा दिन नही आया जब ऐसे हादसों की खबर अखबार में नही आई, मगर खबर तो सिर्फ खबर होती है, सोशल मीडिया पर दुनिया के सामने हम बड़ी बड़ी बाते करते है, अच्छे अच्छे संदेश भेजते है, पर जरूरत पड़ने पर हम ही जैसे लोग मूकदर्शक बने रहते है, शर्म तो तब आती है जब लोग ऐसी घटनाओं का वीडियो बना कर रिकॉर्ड करते रहते है।
अब तो सरकार ने भी ये नियम बना दिया है कि जो भी सड़क हादसे में घायल किसी व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है तो उस पर किसी भी तरह की कानूनी कार्यवाही नही की जाएगी, पर फिर भी लोगो मे जागरूकता का अभाव है, जरूरी है इस बारे में लोगो को मार्गदर्शन दिया जाए, पुलिस व प्रशासन भी मुहिम चलाये, मीडिया भी सहयोगी बने जो लोग ऐसे लोगो की मदद करने के लिए आगे आते है, उन्हें बढ़ावा देना चाहिये, क्योंकि असली हीरो तो ऐसे ही लोग होते है, जो दूसरों की मदद करने से नही कतराते। जो लोग असमय ही काल कवलित हो जाते है उन परिवारों की पीड़ा कोई नही समझ सकता, हमारी इंसानियत ही किसी के घर का चिराग बुझने से बचा सकती है, एक बार सोचिये तो सही।
डॉ शिल्पा जैन सुराणा
वारंगल
तेलंगाना

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