Sun. Oct 21st, 2018

इस चर्चित युद्धभूमि पर था आम का पेड़, जिसके आमों से निकलता था ‘खून’

तीन भीषण युद्धों का गवाह रह चुके पानीपत में एक स्मारक है ‘काला अंब’। ‘अंब’ पंजाबी शब्द है, जो आम (फल) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ‘काला अंब’ पानीपत में बना एक मशहूर स्मारक है, जिसका इतिहास काफी दिलचस्प है। इस जगह को काला आम कहे जाने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है।
दिल्ली से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पानीपत में बना ‘काला अंब’ दरअसल एक स्मारक है, जिसे पानीपत के तीसरे युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद में बनाया गया है।पानीपत की जमीन पर तीन युद्ध लड़े गए थे, जो कि सन् 1526, सन् 1556 और सन् 1761 में लड़े गए।

पानीपत का तीसरा युद्ध मराठों और मुगलों के बीच लड़ा गया था। मराठों की तरफ से सदाशिवराव भाऊ और मुगलों की ओर से अहमदशाह अब्दाली ने नेतृत्व किया था।इस युद्ध को भारत में मराठा साम्राज्य के अतं के रूप में भी देखा जाता है। इस युद्ध में अहमदशाह अब्दाली की जीत हुई थी।’काला अंब’ के साथ एक अनोखा तथ्य जुडा है। कहा जाता है कि पानीपत के तृतीय युद्ध के दौरान इस जगह पर एक काफी बड़ा आम का पेड़ हुआ करता था। लड़ाई के बाद सैनिक इसके नीचे आराम किया करते थे।

कहा जाता है कि भीषण युद्ध के कारण हुए रक्तपात से इस जगह की मिट्टी लाल हो गई थी, जिसका असर इस आम के पेड़ पर भी पड़ा। रक्त के कारण आम के पेड़ का रंग काला हो गया और तभी से इस जगह को ‘काला अंब’ यानी काला आम के नाम से जाना जाने लगा। इस युद्ध में तकरीबन 70,000 मराठा सैनिकों की मौत हो गई थी।एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इस पेड़ पर लगे आमों को काटने पर उनमें से जो रस निकलता था, उसका रंग रक्त की तरह लाल होता था।कई वर्षों बाद इस पेड़ के सूखने पर इसे कवि पंडित सुगन चंद रईस ने खरीद लिया। सुगन चंद ने इस पेड़ की लकड़ी से खूबसूरत दरवाजे को बनवाया। यह दरवाजा अब पानीपत म्यूजियम में रखा गया है।अब इस जगह पर एक स्मारक बनाया गया है, जिसे ‘काला अंब’ कहा जाता है।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of