Tue. Dec 11th, 2018

व्यग्ंय  बिम्मी कालिंदी शर्मा


इस देश में ओलीयुग का आरंभ हो गया है । बिजली के खंबे पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पोष्टर टांग कर नए या ओली युग का आगाज कर दिया गया है । पहले बिजली के खंबे पर कुत्ता पेसाब करता था अब उसी खंबे पर पीएम ओली महोदय पोष्टर में विराजमान हो गए है तो इस का मतलब है कि देश विकास के मार्ग पर खूब प्रगति कर रही है पर फाइलों पर । जिस खंबे पर बिजली घंटो तक नदारद रहती है उसी खंबे पर अपने लटके, झटके सहित ओली महोदय हाजिर हैं । बेचारा कुत्ता दुम हिलाते हुए गाली दे रहा होगा कि मेरे अधिकार क्षेत्र पर सेंध मार दिया ।
अब ओली की चारों तरफ जयजयकार हो रही है । पीएम ओली ने कहा है जनताको बताने या दिखाने के लिए यह तामझाम किया गया है । साथ ही उन्होने यह भी कहा कि अगली बार से बाजा भी बजाया जाएगा । कहने का मतलब यह है कि अभी सिर्फ आंख को झेलना पड़ रहा है अगलीबार से कान बेचारा भी परेशान होगा । समृद्धि को बताने या दिखाने के लिए या कौन सा नया सूत्र ईजाद किया गया है ? समृद्धि काम से आती है नाम से नहीं पर ओलीमहोदय ने इस को बताने या जताने के लिए बिजली खंबे में टंगने वाले पोष्टर का सहारा लिया । और इस के लिए राज्यकोष का ८ करोड रुपए खर्च कर दिए । राज्य का पैसा और ओली दोनों एक दूसरे के जानीदुश्मन हैं ।
सामाजिक सुरक्षा योजना के नाम पर सब खुश हो रहे हैं । पर यह कोई देखता या नहीं पता कि एक निर्मला को सुरक्षा न देने वाली सरकार उसी निर्मला के अपराधी को सुरक्षा दे कर बचा रही है । यह कैसी सामाजिक सुरक्षा है जहां गरीबों को दिन दहाडेÞ डर है और अमीरों को रात में भी सुरक्षा है । देश के सुरक्षाकर्मी से ही सर्वसाधारण जनता असुरक्षित है और बातों की डीगं ऐसी हांकी जा रही है जैसै कि कोई भूउपग्रह का प्रक्षेपण कर लिया हो । बातों और मुहावरों के तानेबाने से ही पांच सालतक सत्ता में टिके रहने की मशां है । बात के साथ भात और साथ भी जरुरी है यह सत्ता चलाने वाले भूल गए हैं । बस शोसल मीडिया में अपने, अपने हनुमानों को वाक युद्ध कर के अपने दल और नेता कि सुरक्षा करने कि तालीम दी जा रही है । इस के लिए देश की सत्ता भत्ता और भोजन देती ही होगी ।
अब संचार मंत्री और सरकार के प्रवक्ता ने निर्मला के बारे में किसी भी सरकारी मीडिया में समाचार प्रसारण और प्रकाशित करने के लिए निषेध कर दिया है । सरकार कंचनपुर की बलात्कार और हत्या के बाद खत्म हो चुकी एक निर्मला पंत से ही नहीं बांकी अन्य जीवित निर्मलाओं से भी डर रही है । अपने पापकर्म ही तो सरकार और उसके संयत्र को निर्मल होने नहीं दे रही है । सरकार तमाम मुद्धे जो सुलझाने बाकी है उनको किनारा कर के नए युग का शंखघोष कर रही है । पर यह नया युग कैसा है, इस में देश के नागरिको को क्या, क्या मिलेगा यह कोई नहीं जानकारी देता है । बस सब ओली युग की रट लगाए हुए हैं । क्या ओली महोदय का शासन खत्म होने के बाद फिर पुराना युगलौट आएगा ? क्या नए या ओलीयुग में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे आधारभूत आवश्यक्ताओं की पूर्ति निःशुल्क या कम कीमत पर होगी ? क्या देश के नागरिकों को अब कर की मार नहीं झेलनी पडेगी ? सब से ज्यादा तो देश के नागरिकों को असुरक्षा और महंगाई ने त्रस्त किया हुआ है । क्या वह इस से मुक्त हो जाएगें ? इस का जवाब कौन देगा ? और नएं युग में यह सब मुहैया नहीं करा सकती सरकार तो फिर काहे का नयां युग ? भांड मे जाए ऐसे नए या ओली युग ।
मोनो और मेट्रो रेल का सपना दिखा कर सरकार ईलेक्ट्रिक बस के संचालन पर आ गई जो पहले भी देश की राजधानी मे चल चुकी है । अब नए युग का हल्ला फैला कर वही सामाजिक सुरक्षा योजना में सिमट गयी है । यह भी ठीक तरीके से कार्यान्वयन हो तो कोई बात बनें । नहीं तो यह भी खोदा पहाड़ निकला चूहा जैसा ही होगा । भेड़, बकरी को जैसे भेडि़हर हांकता है सरकार देश की जनता को भी भेड, बकरी मान कर उसी तरह का बर्ताव कर रही है । अब भेड़ को थोड़ा सा खिला दिया, पुचकार दिया, यदि फिर भी नहीं माना तो लाठी से मार कर ठिकाने मे ला दिया बस ।
सत्य, त्रेता, द्धापर और कलियुग के बाद हम सब लोग जिंदा ही ईस लिए थे कि यह नयां युग या ओली युग का दर्शन कर सके । हम सब का जनम सफल हो गया और हम कृतार्थ हो गए जहां रोजमर्रा के दुख और संकटो से हिचकोले खाते हुए बैलगाडी मे चढ़ कर हम ओलीयुग मे आगए । ओली नें ही एकबार कहा था नेपाल में लोकतंत्र या गणतंत्र का आना बैलगाडी से अमेरिका जाने जैसा ही है । अब ओली के ही शासनकाल में हम बैलगाडी में बैठ कर नए युग में आ गए हैं । वास्तव में यह नयायुग या ओलीयुग नहीं खंबायुग है । जिस में कुत्तो की आजादी छीन ली गई है । आज ओली का पोष्टर बिजली के खंबे पर लगी है, इस में वह फूले नहीं समा रहे हैं । कुछ सालो बाद सिहं दरवार के दिवाल पर उनका फोटो टांगा जाएगा और उस में माला भी पहनाया जाएगा । तब न देखने के लिए ओली रहेगें न उनका नयां या ओली युग ही बचा रहेगा । आमीन ।

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